संकट में भारत के साथ खड़ा रहेगा रूस! पुतिन ने तेल, खाद और परमाणु ऊर्जा पर दिया बड़ा भरोसा

भारत और रूस के रिश्तों को लेकर मॉस्को से बड़ी खबर सामने आई है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के साथ ऊर्जा, खाद और परमाणु क्षेत्र जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। बातचीत के दौरान पुतिन ने साफ संकेत दिया कि मुश्किल समय में रूस भारत के साथ खड़ा रहेगा और जरूरत के मुताबिक जरूरी सप्लाई बढ़ाने के लिए तैयार है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर के बीच भारत के लिए रूस का यह भरोसा काफी अहम माना जा रहा है। खासतौर पर कच्चे तेल और फर्टिलाइजर की सप्लाई भारत की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र से सीधे जुड़ी है। पुतिन ने कहा कि रूस भारत को ऊर्जा और खाद की सप्लाई बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।
जयशंकर ने पुतिन को दिया पीएम मोदी का संदेश
मॉस्को में हुई बैठक की शुरुआत में एस जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पुतिन को शुभकामनाएं दीं। जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें एक संदेश देकर भेजा है, जिसे वह रूसी राष्ट्रपति तक पहुंचाना चाहते हैं। जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने मॉस्को में हुई इंटरगवर्नमेंटल कमीशन की बैठक का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक इस बैठक में आर्थिक सहयोग, परमाणु ऊर्जा और फर्टिलाइजर समेत कई मुद्दों पर अच्छी प्रगति हुई है। जयशंकर ने कहा कि हमारा आर्थिक सहयोग काफी बढ़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी रूस के राष्ट्रपति से दोबारा मुलाकात का इंतजार कर रहे हैं।
पुतिन बोले- भारत के किसानों के लिए सप्लाई बढ़ा रहे हैं
बैठक के दौरान व्लादिमीर पुतिन ने भारत के साथ आर्थिक संबंधों को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस साल दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है। पुतिन के मुताबिक पिछले साल कारोबार में कुछ कमी आई थी, लेकिन इस साल इसमें फिर बढ़ोतरी हो रही है। पुतिन ने इस बढ़ोतरी का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से भारत-रूस संबंधों को मजबूत करने पर दिए जा रहे व्यक्तिगत ध्यान को भी दिया। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग सिर्फ ऊर्जा तक सीमित नहीं है। उन्होंने फर्टिलाइजर सप्लाई का विशेष रूप से जिक्र किया। पुतिन ने कहा कि रूस भारतीय किसानों और कृषि क्षेत्र की जरूरतों को देखते हुए इस मुद्दे को सुलझाने के लिए काम कर रहा है और सप्लाई बढ़ाई जा रही है। उन्होंने कहा कि हम इन सप्लाई को बढ़ा रहे हैं और आगे भी ऐसा करने के लिए तैयार हैं। भारत के लिए यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि देश में कृषि उत्पादन के लिए फर्टिलाइजर की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है। रूस लंबे समय से भारत के लिए ऊर्जा और उर्वरक का एक महत्वपूर्ण साझेदार रहा है।
तेल के साथ परमाणु और हाईटेक सेक्टर पर भी बात
पुतिन ने बातचीत के दौरान केवल ऊर्जा और फर्टिलाइजर का जिक्र नहीं किया। उन्होंने परमाणु ऊर्जा, हाईटेक सेक्टर और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात भी कही। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई मुद्दे एजेंडे में हैं और सहयोग तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे संकेत मिलता है कि भारत और रूस अपने पारंपरिक रक्षा और ऊर्जा संबंधों से आगे बढ़कर तकनीक और परमाणु क्षेत्र में भी साझेदारी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत के लिए परमाणु ऊर्जा का क्षेत्र लंबे समय से रूस के साथ सहयोग का अहम हिस्सा रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में आगे की बातचीत को रणनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत-रूस व्यापार में फिर तेजी
पुतिन ने भारत और रूस के बीच बढ़ते व्यापार पर भी खुशी जताई। उन्होंने कहा कि इस साल दोनों देशों का ट्रेड टर्नओवर बढ़ रहा है। पिछले साल इसमें थोड़ी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन अब स्थिति में सुधार हुआ है। रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत और रूस के संबंधों को बेहतर बनाने पर व्यक्तिगत तौर पर ध्यान दे रहे हैं। पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को अपनी शुभकामनाएं भी भेजीं और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि दोनों नेताओं की जल्द मुलाकात होगी। उन्होंने यह भी कहा कि शंघाई सहयोग संगठन यानी एससीओ के ढांचे के तहत दोनों नेताओं की मुलाकात की योजना है और संभव है कि इस साल फिर से उनकी मुलाकात हो।
एससीओ और ब्रिक्स को लेकर भी चर्चा
एस जयशंकर ने बातचीत के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एससीओ समिट में पुतिन से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि रूस के राष्ट्रपति को ब्रिक्स समिट में शामिल होने और इसकी वार्षिक बैठक की मेजबानी करने का मौका मिलेगा। जयशंकर ने रूस के साथ भारत के रिश्तों को मजबूत द्विपक्षीय सहयोग बताया। उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग के लिए रूस का आभार भी जताया।
बैठक में कई बड़े अधिकारी रहे मौजूद
पुतिन और जयशंकर की मुलाकात के दौरान रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव, रूसी राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव और रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कुल मिलाकर, जयशंकर की मॉस्को यात्रा के दौरान भारत और रूस ने ऊर्जा, फर्टिलाइजर, परमाणु ऊर्जा और हाईटेक सेक्टर में सहयोग आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। पश्चिम एशिया में तनाव के बीच रूस की ओर से भारत को सप्लाई बढ़ाने की तैयारी का भरोसा ऐसे समय में सामने आया है, जब ऊर्जा और कृषि से जुड़ी आपूर्ति को लेकर दुनिया भर में अनिश्चितता बनी हुई है।





















