PU Special :मोबाइल को लेकर डांट से नाराज हुए किशोर, दो दिन में घर से निकले दो बच्चे; एक बहन को भी साथ ले गया

भोपाल से जुड़े दो मामलों में मोबाइल को लेकर डांट से नाराज होकर दो किशोर घर छोड़कर चले गए। एक 13 वर्षीय किशोर अपनी 9 साल की बहन को भी साथ ले गया। दोनों बच्चों को झांसी और आगरा से सुरक्षित रेस्क्यू कर परिवार को सौंप दिया गया।
मोबाइल को लेकर डांट से नाराज हुए किशोर, दो दिन में घर से निकले दो बच्चे; एक बहन को भी साथ ले गया
मोबाइल को लेकर डांट से नाराज हुए किशोर

पल्लवी वाघेला, भोपाल। मोबाइल फोन को लेकर माता-पिता की डांट और पढ़ाई का दबाव किशोरों पर किस तरह असर डाल रहा है, इसका उदाहरण भोपाल से जुड़े दो मामलों में सामने आया है। महज दो दिनों के भीतर दो किशोर घर छोड़कर चले गए। राहत की बात यह रही कि दोनों बच्चों को झांसी और आगरा क्षेत्र से सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया और काउंसलिंग के बाद उन्हें उनके परिवारों के सुपुर्द कर दिया गया। इन दोनों मामलों में  मोबाइल को लेकर मां की नाराजगी की बात सामने आई। एक मामले में 13 साल का किशोर अपनी 9 वर्षीय छोटी बहन को भी साथ लेकर घर से निकल गया। उसका कहना था कि मां पढ़ाई को लेकर दोनों भाई-बहन को लगातार डांटती थीं। उसे डर था कि अगर वह घर से अकेला चला गया तो बहन को भी मां की डांट सहनी पड़ेगी।

पढ़ाई में कम नंबर आए, मोबाइल पर गेम खेलते मिला किशोर

पहले मामले में 13 वर्षीय किशोर हाल ही में आए स्कूल टेस्ट के रिजल्ट में कम नंबर आने के बाद मां की नाराजगी से परेशान था। घटना वाले दिन वह मोबाइल पर गेम खेल रहा था। इसी दौरान मां ने उसे मोबाइल चलाते देख लिया और पढ़ाई नहीं करने पर डांटते हुए फोन अपने पास रख लिया। किशोर ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि इसी बात से नाराज होकर उसने घर छोड़कर अपनी नानी के पास जाने का फैसला किया। उसने यह भी बताया कि उसे लगा कि अगर वह अकेला चला गया तो उसकी छोटी बहन को भी मां की डांट सुननी पड़ेगी। इसलिए उसने 9 साल की बहन को भी अपने साथ चलने के लिए मना लिया। दोनों बच्चे दिल्ली जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए। हालांकि, झांसी के पास दोनों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। इसके बाद उनकी काउंसलिंग की गई और नानी से भी बातचीत कराई गई। समझाइश के बाद दोनों बच्चे अपने माता-पिता के साथ भोपाल लौटने के लिए तैयार हो गए।

दोस्त की चैट को लेकर मां ने मोबाइल छीना

दूसरा मामला 14 वर्षीय किशोर से जुड़ा है। काउंसलिंग के दौरान उसने बताया कि उसकी मां ने उसके मोबाइल में एक लड़की के साथ हुई चैट पढ़ ली थी। मां को शक हुआ कि वह लड़की उसकी गर्लफ्रेंड है। इसके बाद उन्होंने उसका मोबाइल अपने पास रख लिया। मोबाइल छीने जाने और मां की नाराजगी से किशोर गुस्सा हो गया और घर छोड़कर चला गया। बाद में उसे आगरा क्षेत्र से सुरक्षित बरामद किया गया। काउंसलिंग के बाद उसे भी परिवार के पास वापस भेज दिया गया।

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दोनों मामलों में मांओं ने बताई अपनी मजबूरी

बच्चों की मांओं का कहना था कि उनके बच्चे पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय लंबे समय तक मोबाइल पर गेम खेलने या चैटिंग में व्यस्त रहते हैं। इसी वजह से उन्हें कई बार बच्चों को डांटना पड़ता है और मोबाइल से दूरी बनाने के लिए कहना पड़ता है। हालांकि दोनों मांओं ने माना कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि बच्चों की नाराजगी इतनी बढ़ जाएगी कि वे घर छोड़ने जैसा कदम उठा लेंगे। काउंसलिंग के दौरान उन्हें भी बच्चों से बातचीत करते समय संयम बरतने और उनकी बात समझने की सलाह दी गई।

इस साल 8 महीने में मोबाइल को लेकर 23 बच्चे घर से निकले

मोबाइल फोन को लेकर बच्चों और अभिभावकों के बीच बढ़ता तनाव चिंता का विषय बन रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस साल के शुरुआती आठ महीनों में प्रदेश से जुड़े ऐसे 23 मामले सामने आए हैं जिनमें माता-पिता द्वारा मोबाइल छीन लिए जाने के बाद बच्चों ने घर छोड़ दिया। इन घटनाओं से साफ है कि किशोर उम्र में मोबाइल को लेकर लगाई गई पाबंदी या डांट का असर कई बार बच्चों के व्यवहार पर गंभीर रूप से पड़ सकता है। ऐसे में अभिभावकों के लिए जरूरी है कि मोबाइल इस्तेमाल को लेकर नियम तय करने के साथ बच्चों से बातचीत का रास्ता भी खुला रखें।

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अचानक मोबाइल छीनने से बढ़ सकता है तनाव

साइकोलॉजिस्ट दिव्या दुबे मिश्रा के मुताबिक, जब बच्चे लगातार गैजेट्स के इस्तेमाल के आदी हो जाते हैं तो उनका दिमाग स्क्रीन से मिलने वाली खुशी के लिए उस पर निर्भर होने लगता है। ऐसी स्थिति में अचानक मोबाइल छीन लेना या बहुत ज्यादा डांटना बच्चे के लिए तनावपूर्ण हो सकता है। उनके अनुसार इस उम्र में बच्चे कई बार भावनाओं के प्रभाव में सही और गलत के बीच अंतर नहीं कर पाते। ऐसे समय में उन्हें जो जगह सुरक्षित लगती है, वे उसकी ओर जाने का फैसला कर सकते हैं। इसलिए माता-पिता को मोबाइल की आदत कम कराने के साथ-साथ बच्चों से लगातार संवाद बनाए रखना चाहिए। इन दोनों मामलों में समय रहते बच्चों को सुरक्षित बरामद कर लिया गया। लेकिन घटनाएं यह सवाल जरूर खड़ा करती हैं कि मोबाइल और पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव डालते समय अभिभावक किस तरह संतुलन बनाए रखें।

Sumit  Shrivastava
By Sumit Shrivastava

सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...Read More

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