Naresh Bhagoria
30 Nov 2025
पल्लवी वाघेला
भोपाल। मैं बस यह देखना चाहती थी कि मुझे किसी लड़की को किस करके कैसा लगता है? ओटीटी पर मिसमैच्ड सीरीज देखी थी, तबसे अपनी सेक्सुअलिटी को लेकर कंफ्यूज थी। साथ में ट्रिप पर थे, तो अपनी फ्रेंड को कडल करके बहुत अच्छा लगा, लेकिन तब शेयर करने की हिम्मत नहीं हुई। इसी फ्लो में स्कूल के वॉशरूम में उसे किस किया। 15 वर्षीय किशोरी ने काउंसलिंग के दौरान यह शेयर किया कि वेब सीरीज और मूवी में होमोसेक्सुअलिटी देखने के बाद कंफ्यूजन के चलते उसने अनजाने में अपनी बेस्ट फ्रेंड को मोलेस्ट किया। यह इकलौता मामला नहीं है। भोपाल में हर माह तीन से चार मामले सामने आ रहे हैं। वहीं वंद्रेवाला फाउंडेशन से मिली जानकारी के अनुसार मप्र से छह माह में 112 मामलों में टीनएजर्स और रिलेटिव्स ने सेक्सुअल कंफ्यूजन को लेकर मदद मांगी है। भोपाल, इंदौर जैसे शहरों के साथ छोटे टाउन जैसे आष्टा, ललितपुर, सतना, देवास आदि भी इसमें शामिल हैं।
अनजाने में मोलेस्ट करने के अलावा ब्लेकमेल कर फ्रेंड को मोलेस्ट करने के तीन केस भी आए हैं। एक केस में 17 वर्षीय किशोर ने अपने फ्रेंड को फेक आईडी से लड़की बनकर मैसेज किए। दोस्त की निजी तस्वीरें मांगी और बाद में इन्हीं का इस्तेमाल कर उसे ब्लैकमेल कर मोलेस्ट किया। हालांकि, जब मामला बढ़ा और काउंसलिंग हुई। काउंसलिंग में किशोर ने कहा कि वह खुद श्योर नहीं था कि उसे किसी लड़के के साथ रिलेशनशिप में रहना है या नहीं। दोस्त को मोलेस्ट करते हुए उसे लगा कि वह कंफर्टेबल नहीं है और उसने वहीं स्टॉप कर दिया। मामले में एफआईआर होते-होते बची। एक्सपर्ट के मुताबिक यदि बच्चा बाइलॉजिकली एलजीबीटीक्यू प्लस ग्रुप से हैं तो इसे रोकना संभव नहीं है। वहीं, यदि वह एक्सपेरिमेंट के लिए होमोसेक्सुअलिटी की तरफ आकर्षित हो रहा है तो ओरिएंटेशन के जरिए उसे रोका जा सकता है। दोनों ही स्थितियों में जरूरी है कि पैरेंट बच्चे को बताएं कि वो बच्चे से अनकंडीशनली लव करते हैं और हर परिस्थिति में बच्चे के साथ हैं, ताकि बच्चा किसी गलत दिशा में न जाए या गलत कदम न उठाए।
बच्चों के लिए कार्यरत समाजसेवी निहारिका पंसोरिया ने कहा कि बच्चों को सेक्सुअल ओरिएंटेशन सही समय पर देना बहुत जरूरी है। यह भूमिका एक टीचर बहुत अच्छे से निभा सकते हैं। उनकी भूमिका बच्चों के साथ दोस्ताना हो सकती है या वह बच्चे से संतुलित संवाद कर सकते हैं। इसके अलावा वह सिलेबस के माध्यम से बच्चों को आवश्यक सेक्स एजुकेशन दे सकते हैं। साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीप्ति सिंघल ने कहा बच्चों में सेक्सुअल ओरिएंटेशन को लेकर कंफ्यूजन होता है तो वह इसे एक्सप्लोर करने के लिए इस तरह का कदम उठा सकते हैं। जिस तरह से इन दिनों एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में होमोसेक्सुअलिटी को दिखाया जा रहा है, उनको देखकर बच्चे इसे महसूस करना चाहते हैं। जरूरी है कि बच्चा जब किशोरावस्था में पहुंचता है तो रेगुलर बातचीत शुरू करके पैरेंट्स उसे नेचुरल वे में हर प्रकार की रिलेशनशिप के बारे में समझाएं। पैरेंट बच्चों को सुनने पर फोकस करें, अपनी बातें थोपे नहीं। यदि आप खुद सहज नहीं है बच्चे से बात करने में तो अपने किसी विश्वसनीय परिचित, टीचर या थैरेपिस्ट की मदद लें।