Aakash Waghmare
19 Jan 2026
नई दिल्ली। 1990 में कश्मीर से अपने घर-जमीन छोड़कर पलायन की की याद दिलाते कश्मीरी पंडितों ने अपनी घर वापसी की याद दिलाई है। इस बारे में एआईकेएस (आॅल इंडिया कश्मीरी समाज) का एक प्रतिनिधिमंडल अध्यक्ष रविंद्र पंडित की अगुवाई में नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री पीएमओ जितेंद्र सिंह को मिला और कश्मीर से 36वें पलायन दिवस की पूर्व संध्या पर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। इसमें 1990 में अपने घर-बार छोड़ने वाले कश्मीरी पंडितों की मांगों और दुर्दशा पर प्रकाश डाला गया और दोबारा से कश्मीर में बसाहट के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया।
भारतीय और विदेशी कश्मीरी पंडितों के संगठनों का सर्वोच्च निकाय के प्रतिनिधि मंडल में शामिल एआईकेएस के अध्यक्ष रविंद्र पंडित के साथ महिला विंग अध्यक्ष कुसुम शिशु, अजय ठुस्सू और श्रवण पंडित ने इस मौके पर एनएएडी के एक विशेष अंक को भी जारी करवाया। खास यही कि एआईकेएस से आगरा, अहमदाबाद, इलाहाबाद, अंबाला, अमृतसर, बैंगलोर, बहादुरगढ़, बड़ौदा, भोपाल, चंडीगढ़, देहरादून, दिल्ली, धर्मशाला आदि में विस्थापित जीवन जी रहे कश्मीरी जुडेÞ हैं। ज्ञापन मे कहा गया है कि कश्मीरी पंडित समुदाय गरिमा, सुरक्षा और समृद्धि का जीवन जीने का हकदार है। उनकी मातृभूमि में वापसी को हकीकत बनाने के लिए ठोस कार्रवाई की जरूरत है।
लंबे समय से लंबित मुद्दा कश्मीरी पंडितों का पुनवार्स
एआईकेएस का कहना है कि कश्मीरी पंडित समुदाय 35 से ज्यादा सालों से निर्वासन में रह रहा है, और उन्हें भारी चुनौतियों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अब समय आ गया है कि सरकार उनके पुनर्वास के लिए ठोस कदम उठाए और उनकी मातृभूमि में वापसी को हकीकत बनाए। कश्मीरी पंडित समुदाय शरणार्थी शिविरों और अन्य अस्थायी आश्रयों में रह रहा है, और गुजारा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। समुदाय ने अपनी सांस्कृतिक जड़ें, सामाजिक संबंध और आर्थिक स्थिरता खो दी है। अब मोदी सरकार के पास इस लंबे समय से लंबित मुद्दे को हल करने और कश्मीरी पंडितों को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करने का अवसर है।
कश्मीरी विस्थापितों के सामने हैं मुख्य चुनौतियाँ
एडवोकेट विवेक तन्खा के बिल का समर्थन करे सरकार
कश्मीरी पंडित समुदाय के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए, संसद को घाटी में उनकी सम्मानजनक वापसी और पुनर्वास के लिए एक प्रस्ताव पारित करना चाहिए या एडवोकेट विवेक तन्खा के प्राइवेट मेंबर बिल का संसद में समर्थन करना चाहिए। साथ ही विस्थापितों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाए। अन्यथा भाजपा विधायक विधानसभा में बिल लेकर आएं।
कश्मीरी पंडितों की दशकों से लंबित मांगें और समस्याएं
- अल्पसंख्यक दर्जा: भारत सरकार को कश्मीरी पंडित समुदाय को अल्पसंख्यक घोषित करना चाहिए और आवश्यक समर्थन और सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। इससे शिक्षा और रोजगार में आरक्षण तक पहुँच, सांस्कृतिक और भाषाई अधिकारों की सुरक्षा, सामुदायिक विकास और कल्याण के लिए समर्थन के साथ ही सरकार और निर्णय लेने वाले निकायों में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।