Peoples Update Special :केरवा डैम के कैचमेंट में रसूखदारों के बंगले-रिसॉर्ट, बांध भरने वाली नदी का रुख मोड़ा

मप्र की राजधानी भोपाल में कैरवा डैम के आसपास और सहायक नदियों पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जे कर लिए हैं। इनमें प्रसिद्ध फिल्म निर्माता प्रकाश झा भी शामिल हैं। पीपुल्स टीम ने इस पर पूरी पड़ताल की।
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केरवा डैम के कैचमेंट में रसूखदारों के बंगले-रिसॉर्ट, बांध भरने वाली नदी का रुख मोड़ा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ब्रजेंद वर्मा,भोपाल। झीलों की नगरी में केरवा डैम का अस्तित्व खतरे में है।  भूमाफिया ने डैम के आसपास और बांध को भरने वालीं सहायक नदी केरवा व नालों के ऊपर कब्जे कर लिए हैं।  किसी ने बंगले तो किसी ने रिसॉर्ट बना लिए हैं। इनमें कई बड़े नेता और अधिकारी शामिल हैं।

    कैचमेंट एरिया में प्लॉटिंग

    अतिक्रमण करने वालों की दबंगई इतनी है कि डैम के कैचमेंट एरिया में प्लॉटिंग की जा रही है।  केरवा नदी दो हिस्सों में बंटी है। पहला हिस्सा आंवला, कोटरा,  समसगढ़, भानपुर के पास से गुजरता है। वहीं दूसरा हिस्सा सरवर गांव से शुरू होता है। पीपुल्स समाचार की टीम ने मेंडोरा-मेंडोरी से लेकर समसगढ़ तक 8 किमी का सफर किया तो सामने आया कि अगर ऐसे ही कब्जे होते रहे तो डैम का कैचमेंट एरिया ही गायब हो जाएगा।  

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     कैचमेंट एरिया में फिल्म निर्माता प्रकाश झा का पक्का निर्माण

    पीपुल्स समाचार की टीम ने 8 किमी घूमकर देखे अवैध निर्माण

    समसगढ़, बेरखड़ी : भूमाफिया प्लॉटिंग कर रहे हैं।

    केकड़ियां, भानपुर, समसपुरा :  डैम के आसपास रिसॉर्ट, बंगले बन चुके हैं और भी बन रहे हैं।

    केरवा नदी व जंगल से निकलने वाले नालों के ऊपर मकान बन चुके हैं। नदी का रुख मोड़ दिया गया है।

    कैचमेंट एरिया में फिल्म निर्देशक प्रकाश झा फिल्म प्रोडक्शन ने पक्का निर्माण कर लिया है।

    कैचमेंट में, अमलतास, स्प्रिंग फार्म नाम से प्लॉटिंग की जा रही है।

    मीतूखेड़ी : पुल बनाकर कृषि भूमि में प्लाटिंग की जा रही है। पहाड़ों को काटा जा रहा है। पेड़ों को काटकर भी धड़ल्ले से निर्माण भी किए जा रहे हैं।

    नियमों को तोड़-मरोड़कर कर कब्जे

    मास्टर प्लान-2005 के अनुसार डैम के आसपास बॉटनीकल गार्डन बना सकते हैं। लो-डेंसिटी वाले क्षेत्र में 10000 वर्गफीट जमीन पर सिर्फ 600 वर्गफीट जगह पर निर्माण कर सकते हैं। टीएंडसीपी और पंचायत से ऐसी अनुमति ली जाती है। इसके बाद निर्माण कर लिए जाते हैं। 

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    नदी के पास की जा रही प्लॉटिंग

    क्या कहता है नियम

    • सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार नदी, डैम, तालाब के 50 मीटर के दायरे में निर्माण नहीं किया जा सकता है।
    • मास्टर प्लान-2005 के अनुसार नदी, डैम व तालाब के आसपास रेस्टोरेंट, रिसॉर्ट, होटल सहित अन्य तरह की व्यवसायिक गतिविधियां संचालित नहीं की जा सकती हैं।
    • सीवेज नहीं छोड़ सकते।
    • किसी का रास्ता रोककर निर्माण नहीं किया सकता।

    डंपरों की आवाजाही से रहता है हादसों का डर

    मेंडोरा, मेंडोरी सहित आसपास के इलाकों में तेज से अवैध निर्माण हो रहे हैं। इससे बड़ी संख्या में दिन में डंपर निकल रहे हैं। जिससे हादसों का डर बना रहता है।

    संदीप सिंह, राहगीर

    रसूखदारों के निर्माण, इसलिए कार्रवाई नहीं

    केरवा डैम को रसूखदार खत्म करने पर तुले हैं। यदि ऐसे ही अवैध कब्जे होते रहे तो सीवेज केरवा डैम में बड़ी मात्रा में मिलेगा, जिससे कोलार के लोगों को पीने लायक पानी नहीं मिलेगा।

    ब्रजलाल साहू, कोलार

    एनजीटी में याचिका लगाई है

    केरवा डैम कोलार के ढाई लाख से ज्यादा लोगों को पानी पिला रहा है। सीवेज मिलने से पानी प्रदूषित हो रहा है। नियमों को ताक पर रखकर जो निर्माण हुए हैं, उन पर प्रशासन का बुलडोजर चलना चाहिए। केरवा को बचाने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका लगाई है।

    राशिद नूर, पर्यावरणविद्

    मास्टर प्लान की अनदेखी

    मास्टर प्लान को ध्यान में रखकर टीएंडसीपी अनुमति देता है। केरवा डैम के आसपास नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बाउंड्रीवॉल का निर्माण हो रहा है।  कृषि भूमि भी अवैध रूप से प्लाटिंग हो रही है। सभी रसूखदारों की ओर से किए जा रहे हैं। इससे पर्यावरण का संरक्षण होना मुश्किल है।

    हर्षवर्धन सिंह, पर्यावरण एडवोकेट

    डैम के आसपास जांच कराई जाएगी

    अवैध कब्जों, निर्माण व अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई के लिए प्रशासन सख्त है। हाल ही में अधिकारियों की बैठक लेकर अवैध कॉलोनियों को चिन्हित कराया है। केरवा डैम के आसपास हो रहे निर्माणों की भी जांच कराई जाएगी। नियमानुसार निर्माण नहीं करने वालों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

    कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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