Naresh Bhagoria
19 Jan 2026
इंदौर में भिखारी मुक्त शहर बनाने का अभियान तो आपने सुना ही होगा। लेकिन इस अभियान के दौरान जो सच सामने आया, उसे सुनकर आप भी दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो जाएंगे। कहने को तो वह भिखारी था, लेकिन असलियत में वह एक ऐसा शख्स निकला जिसने पूरे शहर को चौंका दिया।
सराफा बाजार में लगातार शिकायतें आ रही थीं कि एक भिखारी वहां भीख मांगता है। लोग उसे देखकर सहानुभूति जताते थे, कुछ लोग उसे बचाकर भी रखते थे और कुछ लोग उसे देखकर बस भिखारी की तरह ही निकल जाते थे। लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि उसी भिखारी के पास मकान, गाड़ी, ऑटो और ड्राइवर तक होगा? सुनने में मजाक लग रहा है, लेकिन यह सच है।
मांगीलाल नाम का यह शख्स विकलांग होने के बावजूद पटिए पर चलकर भीख मांगता था। उसके ऊपर ऐसा भी लगता था कि वह सच में मदद का हकदार है। लेकिन जब नगर निगम की टीम ने लगातार शिकायतों के बाद उसे रेस्क्यू किया, तो मामले की असलियत ने सबको चौंका दिया।
जब अधिकारियों ने उसकी संपत्ति और खातों की जांच की, तो उनकी आंखें खुली की खुली रह गईं। मांगीलाल के पास शहर के अलग-अलग इलाकों में तीन पक्के मकान थे। भगत सिंह नगर में उसका एक बड़ा तीन मंजिला मकान था और शिवनगर में भी एक और बड़ा मकान। इसके अलावा रेड क्रॉस सोसाइटी से विकलांगता के तहत मिलने वाला 10×20 का मकान भी उसके नाम पर था।
अब आप सोच रहे होंगे कि भिखारी के पास इतनी संपत्ति कैसे हो सकती है? इसका जवाब है भीख और मकान किराए से। लेकिन यह सब कुछ नहीं था। मांगीलाल ने अपने बिजनेस को और भी बड़ा बना रखा था। वह सराफा बाजार के कई व्यापारियों को दिन और सप्ताह के हिसाब से ब्याज पर पैसे देता था।
मांगीलाल के पास एक कार भी थी, लेकिन उससे भी ज्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि कार चलाने के लिए उसके पास एक ड्राइवर भी था, जिसे वह 12 हजार रुपये सैलरी देता था।
सोचिए, सड़क पर भीख मांगते हुए मांगीलाल को लोग देखकर सोचते होंगे, इतना दुखद है, चलो कुछ दे देते हैं। और वहीं दूसरी ओर, उसकी कार में बैठकर ड्राइवर उसे किसी शाही परिवार की तरह गाड़ी चलाता होगा।