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सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त राशन योजना पर सवाल उठाए, कहा- रोजगार के अवसर क्यों नहीं बन रहे

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सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त राशन योजना पर सवाल उठाए, कहा- रोजगार के अवसर क्यों नहीं बन रहे
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की मुफ्त राशन योजना पर सवाल उठाते हुए कहा है कि सरकार को कब तक मुफ्त राशन बांटने की नीति पर चलना है। कोर्ट ने रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिसंबर को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

क्या है मामला

यह याचिका ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत प्रवासी श्रमिकों और अकुशल मजदूरों को मुफ्त राशन कार्ड देने से जुड़ी है। एक एनजीओ की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने अदालत से मांग की कि सभी पात्र श्रमिकों को मुफ्त राशन प्रदान करने के लिए निर्देश जारी किए जाएं। इससे पहले, जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने निर्देश दिया था कि 19 नवंबर से पहले पात्र व्यक्तियों को राशन कार्ड जारी किए जाएं।

क्या है केंद्र का पक्ष

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार 2013 के राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत 81 करोड़ लोगों को मुफ्त या रियायती दर पर राशन दे रही है। मेहता ने कहा कि यह योजना कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवासी श्रमिकों और गरीबों की मदद के लिए शुरू की गई थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार 2013 के अधिनियम से बंधी है और वैधानिक सीमा से अधिक राशन कार्ड प्रदान नहीं कर सकती।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने पूछा कि आखिर कब तक मुफ्त राशन बांटा जाएगा? सरकार रोजगार के अवसर क्यों नहीं पैदा कर रही है? पीठ ने यह भी कहा, इसका मतलब है कि वर्तमान में केवल करदाता ही इससे बाहर है।

याचिकाकर्ता का पक्ष

याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि वर्तमान में राशन कार्ड 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि यदि 2021 की जनगणना हुई होती, तो राशन कार्डों की संख्या में वृद्धि होती क्योंकि तब तक प्रवासी श्रमिकों की संख्या बढ़ चुकी होती।

इस मामले में केंद्र-राज्य मिलकर करें काम

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राशन योजना के मामले में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय बनाए रखना आवश्यक है। पीठ ने कहा, "केंद्र और राज्यों के बीच विभाजन नहीं होना चाहिए वरना यह प्रक्रिया बहुत जटिल हो जाएगी।" सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी को होगी। ये भी पढ़ें- इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव के बयान पर मचा बवाल, कहा- देश बहुसंख्यकों के अनुसार चलेगा
Wasif Khan
By Wasif Khan

फिलहाल जुलाई 2024 से पीपुल्स अपडेट में सब-एडिटर हूं। बीते 3 वर्षों से मीडिया में सक्रिय हूं। 12वीं म...Read More

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