CBSE के कक्षा 6 छात्रों को तीसरी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट से राहत, 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी नई व्यवस्था

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के कक्षा 6 में पढ़ रहे छात्रों को तीन-भाषा नीति के तहत तीसरी भाषा की अनिवार्यता को लेकर सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को वही छूट और राहत दी जाए, जो पहले कक्षा 7 से 9 के छात्रों को दी गई है। इसका मतलब है कि कक्षा 6 के मौजूदा छात्र तीसरी भाषा पढ़ सकेंगे, लेकिन इस विषय को लेकर उन्हें आगे CBSE की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। तीसरी भाषा का आकलन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन छात्रों के लिए नई तीन-भाषा व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू की जाए।
छात्रों पर अचानक अतिरिक्त बोझ से कोर्ट चिंतित
यह मामला CBSE की तीन-भाषा नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में कहा गया था कि जिन छात्रों ने पहले से एक भाषा की पढ़ाई शुरू कर रखी है, उनके बीच सत्र के दौरान नई भाषा की व्यवस्था लागू करने से शैक्षणिक परेशानी पैदा हो रही है। सुनवाई के दौरान अभिभावकों की ओर से पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता, भाषाओं के सीमित विकल्प और स्कूलों में जरूरी संसाधनों की कमी जैसे मुद्दे भी उठाए गए। कुछ वकीलों ने बताया कि कई छात्रों को पहले से पढ़ी जा रही भाषा बदलने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि छात्रों को अनावश्यक कठिनाई का सामना नहीं करना चाहिए। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि अदालत छात्रों के लिए ‘कम्फर्ट’ चाहती है, अतिरिक्त कठिनाई नहीं।
केंद्र ने कहा- करीब 99 फीसदी स्कूलों में व्यवस्था तैयार
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि लगभग 99 फीसदी CBSE स्कूलों में तीसरी भाषा की व्यवस्था लागू की जा चुकी है। सरकार के मुताबिक करीब 1.2 फीसदी स्कूल अभी इससे प्रभावित हैं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुल स्कूलों की संख्या को देखते हुए 1.2 फीसदी भी छोटी संख्या नहीं है। अदालत ने इसी संदर्भ में मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को कक्षा 7 के छात्रों के समान राहत देने का निर्देश दिया।
10वीं में तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं
CBSE की मौजूदा संक्रमणकालीन व्यवस्था में कक्षा 7 से 9 के छात्रों को तीसरी भाषा को लेकर विशेष छूट दी गई है। इसके तहत तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाता है और कक्षा 10 में इस विषय की CBSE बोर्ड परीक्षा नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट ने यही व्यवस्था अब मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों पर भी लागू करने को कहा है। इसका उद्देश्य यह है कि तीन-भाषा नीति के अचानक लागू होने से छात्रों की मौजूदा पढ़ाई और भाषाई विकल्पों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
पहले से दो गैर-भारतीय भाषाएं पढ़ने वाले छात्रों को भी राहत
CBSE की व्यवस्था के अनुसार, जो छात्र पहले से दो गैर-भारतीय भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें मौजूदा भाषाओं को जारी रखने की अनुमति दी जा सकती है। इसके साथ उन्हें एक भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में लेने का विकल्प दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह लचीलापन मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को भी उपलब्ध होगा। यानी उन्हें पहले से पढ़ी जा रही दोनों भाषाओं को छोड़कर नई व्यवस्था के अनुसार पूरी तरह बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी।
कक्षा 9 के आंतरिक आकलन को लेकर भी व्यवस्था
CBSE की ओर से अदालत में रखी गई व्यवस्था के अनुसार तीसरी भाषा यानी R3 का आकलन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कक्षा 9 में R3 के आंतरिक आकलन में कमजोर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को भी कक्षा 10 में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। ऐसे छात्रों को बाद में आंतरिक आकलन में दोबारा R3 में प्रदर्शन सुधारने का मौका मिलेगा। कक्षा 10 में बोर्ड परीक्षा के लिए स्कूल की ओर से R3 में पास होने का प्रमाण आवश्यक होगा।
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2027 से नई व्यवस्था पूरी तरह लागू
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का सीधा असर मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों पर पड़ेगा। वे इस समय तीसरी भाषा की पढ़ाई कर सकते हैं, लेकिन उन्हें नई व्यवस्था के तहत तुरंत बोर्ड परीक्षा की बाध्यता नहीं होगी। 1 अप्रैल 2027 से तीन-भाषा नीति की व्यवस्था इन छात्रों के लिए लागू होगी। इसका मतलब है कि अगले शैक्षणिक सत्र से कक्षा 6 में दाखिला लेने वाले छात्रों पर नई व्यवस्था सामान्य तरीके से लागू होगी। नई व्यवस्था में दो भारतीय भाषाओं और एक अन्य भाषा के विकल्प को लेकर भी बहस हुई है। सुनवाई के दौरान अंग्रेजी को गैर-भारतीय भाषा की श्रेणी में रखने पर भी सवाल उठाए गए। अदालत ने इस व्यापक मुद्दे पर आगे विचार करने की बात कही है।
पाठ्यपुस्तकों और भाषा विकल्पों पर भी उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं और अभिभावकों की ओर से अदालत में कहा गया कि कई जगह छात्रों को तीसरी भाषा की किताबें उपलब्ध कराने में परेशानी हुई। कुछ स्कूलों में किताबें ऑनलाइन उपलब्ध होने के बावजूद उनकी भौतिक प्रतियां छात्रों तक नहीं पहुंचने की बात भी कही गई। इसके अलावा कुछ स्कूलों में भाषाओं के सीमित विकल्प होने और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षण सामग्री की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे। इन मुद्दों को देखते हुए कोर्ट ने CBSE को उन स्कूलों तक पहुंचकर उनकी दिक्कतें समझने के लिए अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश भी दिया।
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सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं
अदालत ने मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को तत्काल राहत देते हुए तीन-भाषा व्यवस्था को उनके लिए अगले शैक्षणिक सत्र तक टाल दिया है। हालांकि तीन-भाषा नीति से जुड़े व्यापक कानूनी और नीतिगत सवाल अभी सुप्रीम कोर्ट के सामने विचाराधीन हैं। पीठ ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए अगली तारीख तय की है और CBSE को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश से मौजूदा कक्षा 6 के छात्रों को भाषा बदलने, नई परीक्षा व्यवस्था और बोर्ड परीक्षा की चिंता से फिलहाल राहत मिली है। वहीं CBSE की तीन-भाषा नीति का व्यापक स्वरूप आगे की न्यायिक सुनवाई में और स्पष्ट होगा।




















