सीवन नदी की सफाई में मिली गीता-रामायण और देवी-देवताओं की तस्वीरें, आस्था और जिम्मेदारी पर उठे सवाल
सीहोर। चद्दर पुल पर पिछले तीन दिनों से चल रहे स्वच्छता अभियान में सामने आई इस तस्वीर ने सीवन की पीड़ा को एक बार फिर उजागर कर दिया। सीवन पुत्रों ने नदी से जलकुंभी और कचरा निकालने के साथ सनातन धर्म से जुड़ी इन सामग्रियों को भी गंदगी के बीच से बाहर निकाला।
महिला घाट से शुरू हुई स्वच्छता की अलख
सीहोर की सीवन नदी की दुर्दशा से कुछ महीने पहले तक हर कोई परिचित था। कभी नदी का पानी इतना प्रदूषित हो चुका था कि वह जल के बजाय जले हुए ऑयल जैसा नजर आता था। ऐसे कठिन हालात में सीवन पुत्र टीम ने नदी को स्वच्छ और पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया। महिला घाट से शुरू हुआ यह अभियान अब चद्दर पुल तक पहुंच चुका है। पिछले करीब 10 महीनों से लगातार चल रही इस मुहिम ने शहरवासियों में नदी संरक्षण के प्रति नई चेतना जगाई है।
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कचरे के बीच मिले धार्मिक ग्रंथ, भावुक करने वाला दृश्य
चद्दर पुल पर तीन दिनों से चल रहे सफाई कार्य के दौरान टीम को गीता, पुराण, रामायण, हनुमान चालीसा और देवी-देवताओं के चित्र मिले। धार्मिक आस्था से जुड़ी इन सामग्रियों का इस तरह गंदे स्थानों पर कचरे और जलकुंभी के बीच पड़ा मिलना बेहद पीड़ादायक रहा। यह दृश्य हर उस व्यक्ति को सोचने पर मजबूर करता है, जो धर्म और आस्था की बात तो करता है, लेकिन धार्मिक सामग्री के सम्मानजनक विसर्जन और नदियों की स्वच्छता के प्रति अपनी जिम्मेदारी भूल जाता है।
10 लाख श्रद्धालुओं ने महिला घाट से भरा था कावड़ का जल
सीवन अभियान की मेहनत का असर महिला घाट पर भी दिखाई दिया। इसी घाट पर सावन महीने में 10 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने कांवड़ यात्रा के लिए जल भरा था। जिस स्थान की स्वच्छता को लेकर कभी चिंता थी, वही घाट श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बना। सीवन पुत्रों का मानना है कि नदी स्वच्छ रहेगी तो धार्मिक परंपराएं भी गरिमा के साथ आगे बढ़ेंगी।
2026 तक जलकुंभी मुक्त सीवन बनाने का संकल्प
अभियान के तहत जलकुंभी निकालने का काम भी निरंतर जारी है। सीवन पुत्रों का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 में सीवन नदी जलकुंभी से मुक्त हो। जलकुंभी पानी की सतह पर फैलकर जल के प्रवाह और गुणवत्ता को प्रभावित करती है। इसके अत्यधिक फैलाव से नदी का खुला जल दिखाई देना तक मुश्किल हो जाता है। सीवन पुत्र प्रदीप चावड़ा ने बताया कि लगातार लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं। अब मध्यप्रदेश ही नहीं, दूसरे राज्यों के लोग भी सीवन अभियान से प्रेरित होकर अपनी नदियों के संरक्षण के लिए आगे आ रहे हैं। उनके अनुसार सीवन अभियान नदी संरक्षण की एक नई क्रांति बन रहा है।
सामूहिक संकल्प से बदल रही सीवन की तस्वीर
इस अभियान में मुकेश राय, प्रकाश यादव, कनीराम मालवीय, वैभव राठौर, जगदीश वर्मा, कैलाश चव्हाण, लक्ष्मण सिंह चौकसे, प्रदीप साबू, राधेश्याम मकवाना, राजकुमार सोनी, हरिनारायण ठेकेदार, सुरेश भगत, अशोक नामदेव, वीरेंद्र सिंह बिसोरिया, संतोष सिंह सिसोदिया, प्रदीप चावड़ा, सचिन प्रजापत, वैभव केवट, कमल केवट, ललिता कुशवाह, अलका कुशवाह, सीमा शर्मा और ज्योति चावड़ा सहित अनेक सीवन पुत्र-पुत्रियां अपनी भूमिका निभा रहे हैं। इनका प्रयास संदेश दे रहा है कि नदी केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। सीवन को स्वच्छ बनाने की यह मुहिम तभी सफल होगी, जब हर नागरिक नदी को कचरा डालने की जगह नहीं, बल्कि अपनी जीवनरेखा समझेगा।






















