छिंदवाड़ा की कुसमेली मंडी में मंडी टैक्स बढ़ने का असर, अनाज की आवक 70 हजार से घटकर 40 हजार बोरे तक पहुंची

छिंदवाड़ा। व्यापारियों और स्थानीय जानकारों के अनुसार, टैक्स में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी से माल ढुलाई और व्यापार का खर्च बढ़ गया है। इसका असर मंडी में अनाज की आवक पर भी पड़ा है, जो पहले करीब 70 हजार बोरे तक होती थी, लेकिन अब घटकर 30 से 40 हजार के आसपास रह गई है।
मंडी टैक्स 1 से बढ़कर 1.5 प्रतिशत हुआ
मध्य प्रदेश शासन ने कृषि उपज पर मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.5 प्रतिशत कर दिया है। व्यापारियों के अनुसार, 0.50 प्रतिशत की इस बढ़ोतरी का सीधा भार माल ढुलाई और व्यापार पर पड़ा है। कुसमेली मंडी में बढ़े हुए टैक्स को लेकर व्यापारियों के बीच चिंता बनी हुई है।
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एक गाड़ी पर टैक्स 18 हजार रुपए तक पहुंचा
पहले 30 से 35 टन क्षमता वाली एक मालवाहक गाड़ी पर मंडी टैक्स औसतन 8 से 10 हजार रुपए तक बनता था। टैक्स की दर डेढ़ प्रतिशत होने के बाद अब एक ही गाड़ी पर यह राशि बढ़कर 17 से 18 हजार रुपए तक पहुंच गई है। इससे ट्रांसपोर्टेशन और भंडारण की लागत काफी बढ़ गई है।
मंडी में अनाज की आवक में भारी गिरावट
बढ़े हुए टैक्स के विरोध और आर्थिक बोझ के कारण कुसमेली मंडी में अनाज की आवक में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां सामान्य तौर पर मंडी में करीब 70 हजार क्विंटल या बोरे तक अनाज की आवक होती थी, वहीं अब यह घटकर 30 से 40 हजार के आसपास सिमट गई है। इसका असर मंडी के कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है।
कागजी आंकड़ों और धरातलीय स्थिति में अंतर
मंडी के दस्तावेजों और कुल आवक के आंकड़ों के अनुसार, 40 हजार बोरे की आवक पर लगभग 130 गाड़ियों का माल बाहर निकलना चाहिए। लेकिन धरातल पर स्थिति अलग नजर आ रही है। कागजों पर 100 से अधिक गाड़ियों की आवाजाही दर्शाए जाने के बावजूद धर्म कांटे पर वास्तव में महज 10 गाड़ियां ही तौल कराकर निकल रही हैं। इससे तौल और निकासी के वास्तविक आंकड़ों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मंडी शुल्क बढ़ने से किसानों पर पड़ सकता है असर
स्थानीय जानकारों का मानना है कि अगर मंडी शुल्क की दरें इसी तरह ऊंची रहीं और कुसमेली मंडी में पारदर्शी व्यवस्थाएं सुनिश्चित नहीं की गईं, तो मंडी का राजस्व प्रभावित हो सकता है। व्यापारी दूसरे वैकल्पिक रास्तों या राज्यों की ओर रुख कर सकते हैं। इसका खामियाजा अंततः क्षेत्र के अन्नदाता किसानों को कम दामों और बाजार में अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा के रूप में भुगतना पड़ सकता है।




















