MP हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित 17 आपराधिक मामलों की चार्जशीट पेश करे सरकार

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश के सांसदों और विधायकों के खिलाफ चल रहे 17 आपराधिक मामलों को लेकर राज्य सरकार को अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सरकार से इन सभी लंबित मामलों की चार्जशीट पेश करने को कहा है। इसके बाद हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच यह तय करेगी कि यदि सरकार ने इनमें से किसी मामले को वापस लेने के लिए आवेदन दिया है, तो उसे मंजूरी दी जानी चाहिए या नहीं। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच कर रही है। अब अगली सुनवाई 20 नवंबर को दोपहर 2:30 बजे होगी।
सांसदों-विधायकों के खिलाफ प्रदेश में 17 आपराधिक मामले लंबित
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ब्रह्मदत्त सिंह ने कोर्ट को बताया कि फिलहाल मध्यप्रदेश में सांसदों और विधायकों के खिलाफ कुल 17 आपराधिक मामले लंबित हैं। इस पर डिवीजन बेंच ने सरकार से इन मामलों से संबंधित चार्जशीट पेश करने के निर्देश दिए। कोर्ट का उद्देश्य संबंधित मामलों की स्थिति और उनमें उपलब्ध आरोपों की जानकारी के आधार पर मुकदमा वापसी से जुड़ी अर्जियों पर निर्णय लेना है।
मुकदमा वापस लेने की अर्जियों पर हाईकोर्ट करेगा फैसला
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच यह तय करेगी कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ चल रहे मामलों में सरकार की ओर से दाखिल मुकदमा वापसी की अर्जियों को स्वीकार किया जाए या नहीं। इसके लिए कोर्ट ने पहले सभी लंबित मामलों की चार्जशीट और संबंधित रिकॉर्ड पेश करने को कहा है। यानी सरकार की ओर से किसी मामले को वापस लेने की मांग करने मात्र से उसे मंजूरी नहीं मिलेगी, बल्कि हाईकोर्ट संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर फैसला करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2020 में दर्ज हुई थी जनहित याचिका
इस मामले की शुरुआत अश्विनी कुमार उपाध्याय की जनहित याचिका से हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए देश के सभी हाईकोर्ट को सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमों की निगरानी करने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 22 सितंबर 2020 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में यह जनहित याचिका दर्ज की गई थी। इसके तहत प्रदेश में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों की स्थिति की नियमित निगरानी की जा रही है।
20 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले में सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त, संजय के अग्रवाल और अधिवक्ता रविशंकर पटेल ने भी अपनी दलीलें रखीं।




















