पिता की मौत पर नहीं पहुंचीं बेटियां, अब तेरहवीं में भी रहीं गैरहाजिर; समाज के लोगों ने निभाईं सभी रस्में

हरियाणा के सोनीपत से सामने आई शिवचरण राम रतन गुप्ता की कहानी एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि बुजुर्गों के लिए परिवार का साथ आखिर कितना जरूरी है। वृद्धाश्रम में रह रहे शिवचरण गुप्ता का हाल ही में निधन हुआ था। उनकी मौत के बाद अंतिम संस्कार से लेकर अस्थि विसर्जन तक की रस्में परिवार की बेटियों की गैरमौजूदगी में पूरी की गईं। अब रविवार को उनकी तेरहवीं भी हो गई, लेकिन इस मौके पर भी उनकी तीनों बेटियां वहां नहीं पहुंचीं। सोनीपत के गीता मंदिर में शिवचरण गुप्ता की तेरहवीं के लिए हवन-यज्ञ कराया गया। उनकी तस्वीर पर लोगों ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और हिंदू रीति-रिवाज के मुताबिक अंतिम रस्में पूरी की गईं। कार्यक्रम में सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग और स्थानीय नेता पहुंचे। लोगों के लिए प्रसाद की भी व्यवस्था की गई। हालांकि, इस पूरे कार्यक्रम में शिवचरण के परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं था। उनकी बेटियों की गैरमौजूदगी इसलिए भी चर्चा में रही, क्योंकि पिता के अंतिम संस्कार के वक्त भी वे खुद वहां मौजूद नहीं थीं।
अंतिम संस्कार में वीडियो कॉल से जुड़ी थीं बेटियां
शिवचरण गुप्ता की मौत के बाद जब अंतिम संस्कार की तैयारी हुई, तब उनकी तीनों बेटियां मौके पर नहीं पहुंचीं। बताया गया कि दाह संस्कार के दौरान बेटियों ने वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की थी। इसके बाद जब हरिद्वार में शिवचरण की अस्थियों का विसर्जन किया गया, तब भी बेटियों की मौजूदगी प्रत्यक्ष रूप से नहीं थी। इस दौरान WhatsApp के जरिए बातचीत हुई। अब जब पिता की तेरहवीं की रस्म हुई तो उम्मीद थी कि परिवार के सदस्य इसमें शामिल होंगे, लेकिन बेटियां इस कार्यक्रम में भी नहीं पहुंचीं।
बेटियों ने पहले ही तेरहवीं में आने से कर दिया था मना
वृद्धाश्रम चलाने वाले आनंद कुमार ने बताया कि शिवचरण गुप्ता की अंतिम क्रियाएं हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार पूरी की गईं। उनके मुताबिक, बेटियों से बातचीत हुई थी और उन्होंने पहले ही तेरहवीं के कार्यक्रम में शामिल होने में असमर्थता जताई थी। आनंद कुमार के मुताबिक, शिवचरण की अंतिम यात्रा से लेकर तेरहवीं तक की जरूरी रस्में सामाजिक लोगों और वृद्धाश्रम से जुड़े लोगों ने पूरी कीं। इस दौरान शिवचरण की तस्वीर को कार्यक्रम में रखा गया और लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। हवन-यज्ञ के बाद प्रसाद भी वितरित किया गया।
भाई को करीब 10 साल तक नहीं थी शिवचरण के जिंदा होने की जानकारी
इस कहानी का एक और पहलू बेहद चौंकाने वाला है। शिवचरण गुप्ता के बड़े भाई महेंद्र गुप्ता को करीब 10 साल तक यह जानकारी ही नहीं थी कि उनके भाई जिंदा हैं। जानकारी के मुताबिक, नेपाल में आए भूकंप के दौरान महेंद्र ने शिवचरण की मौत मान ली थी। बाद में सोशल मीडिया के जरिए उन्हें पता चला कि उनका भाई जिंदा है और सोनीपत के एक वृद्धाश्रम में रह रहा है। इसके बाद महेंद्र सोनीपत पहुंचे और भाई से संपर्क हुआ। शिवचरण की मौत के बाद उनके भाई ने हरिद्वार जाकर उनकी अस्थियों का विसर्जन किया।
बेटी ने कहा था- पिता से बहुत प्यार था, लेकिन मजबूरियां थीं
शिवचरण की बेटियों की ओर से पहले यह बात सामने आई थी कि वे अपने पिता से प्यार करती थीं, लेकिन कुछ मजबूरियों के चलते उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सकीं। बताया गया कि बड़ी बेटी ने बातचीत के दौरान कहा था कि अगर उनकी तबीयत ठीक होती तो वह खुद हरिद्वार पहुंचतीं। बेटियों ने अंतिम रस्मों की जिम्मेदारी वृद्धाश्रम प्रबंधन को सौंप दी थी। यानी बेटियों की ओर से पिता से पूरी तरह भावनात्मक दूरी होने की बात सीधे तौर पर सामने नहीं आई है। हालांकि, अंतिम संस्कार और तेरहवीं जैसे अहम मौकों पर उनकी गैरमौजूदगी ने इस पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है।
समाजसेवियों ने निभाई अंतिम रस्मों की जिम्मेदारी
शिवचरण गुप्ता के अंतिम संस्कार से लेकर तेरहवीं तक की रस्मों में सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों और स्थानीय लोगों ने सहयोग किया। उनके बड़े भाई महेंद्र गुप्ता ने अस्थि विसर्जन की जिम्मेदारी निभाई। अब तेरहवीं के दौरान भी सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग और स्थानीय नेता गीता मंदिर पहुंचे। उन्होंने शिवचरण की तस्वीर पर फूल चढ़ाए और उन्हें श्रद्धांजलि दी। एक बुजुर्ग की मौत के बाद परिवार की गैरमौजूदगी और समाज के लोगों के आगे बढ़कर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाने की यह कहानी सोनीपत में चर्चा का विषय बनी हुई है। साथ ही यह घटना उन बुजुर्गों की स्थिति पर भी सवाल खड़े करती है, जो जीवन के आखिरी पड़ाव में परिवार के बजाय वृद्धाश्रम का सहारा लेने को मजबूर हो जाते हैं।













