शाही मस्जिद हटाने पर हाजी हारून का सवाल: बोले- आठ लोगों की सहमति को पूरे समाज का फैसला कैसे मान लिया

भोपाल। हाजी हारून ने गुरुवार को भोपाल में पत्रकारवार्ता के दौरान कहा कि सिंहस्थ सभी धर्मों की आस्था का केंद्र रहा है और आयोजन के नाम पर धार्मिक स्थलों को हटाना उचित नहीं है। उन्होंने शाही जामा मस्जिद के हिस्से को हटाए जाने और अन्य धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद को नुकसान पहुंचाने के फैसले में किन्हीं आठ मुस्लिम नुमाइंदों की सहमति को आगे किया जा रहा है, जबकि आमजन को इसमें शामिल नहीं किया गया। हाजी हारून ने वक्फ संपत्तियों के संचालन में सियासी हस्तक्षेप खत्म करने और उज्जैन मामले में कार्रवाई का सामना कर रहे लोगों से केस वापस लेने की मांग की।
सिंहस्थ के नाम पर धार्मिक स्थलों को हटाने पर सवाल
हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि विकास, आस्था और सियासत के नाम पर ऐसा घालमेल दिखाई दे रहा है, जिसमें शहर के उस हिस्से को भी वीरान किया जा रहा है, जहां आयोजन का असर नहीं है। उन्होंने कहा कि चंद मतलबपरस्त और मौकापरस्त लोगों ने कौम के लिए बड़ा फैसला कर लिया, जबकि इसका उन्हें कोई इख्तियार नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल किसी भी मजहब का क्यों न हो, उसका नुकसान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और मामले को लेकर सभी जिम्मेदारों से बात की जाएगी।
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सिंहस्थ सभी धर्मों की आस्था का केंद्र रहा है
हाजी हारून ने कहा कि उज्जैन में आयोजित होने वाला सिंहस्थ सदियों से सभी धर्मों की आस्था का केंद्र रहा है और इसमें सभी मजहब के लोग अकीदत के साथ शामिल होते रहे हैं। उनका कहना है कि क्षिप्रा नदी के जिस छोर पर सिंहस्थ का आयोजन होता है, उसका उस हिस्से से कोई वास्ता नहीं है, जहां आयोजन के नाम पर धर्मस्थलों को हटाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि शाही जामा मस्जिद हो या खड़े हनुमान, किसी की आस्था ढहाकर किस धार्मिक समागम की कल्पना की जा रही है। मौजूदा सड़क चौड़ीकरण कार्रवाई को लेकर प्रशासन का कहना है कि शाही मस्जिद का वही हिस्सा हटाया जा रहा है, जो प्रस्तावित सड़क की सीमा में आता है।
शाही जामा मस्जिद को लेकर प्रशासन पर लगाए आरोप
हाजी हारून ने कहा कि सिंहस्थ आयोजन की आड़ में पक्षपातपूर्ण तरीके से मस्जिदों, मंदिरों और धार्मिक स्थलों को गिराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्किंग के नाम पर एक मस्जिद गिराए जाने से लेकर राह आसान करने के नाम पर शाही जामा मस्जिद की मीनार हटाए जाने तक की कार्रवाई अफसोसजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां शाही जामा मस्जिद को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, वहीं सामने मौजूद एक निजी भवन को सिर्फ इसलिए बख्श दिया गया कि वह किसी धन्ना सेठ की मिल्कियत है। उन्होंने कहा कि उसके नुकसान की भरपाई कर सड़क चौड़ी की जा सकती थी कच्ची दुकानों और पोस्ट ऑफिस की तरफ के निर्माण को भी हटाया जा सकता था। प्रशासन की ओर से सड़क चौड़ीकरण के लिए कई धार्मिक और अन्य निर्माणों पर कार्रवाई की बात कही गई है।
आठ मुस्लिम नुमाइंदों की सहमति पर उठाए सवाल
हाजी हारून ने कहा कि मस्जिद को नुकसान पहुंचाने के मामले में किन्हीं आठ मुस्लिम नुमाइंदों की सहमति को आगे किया जा रहा है, जबकि आमजन को इस फैसले में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि कौम के फैसले लेने वाले वह आठ लोग कौन होते हैं और उनकी क्या मजबूरी या उन पर क्या दबाव था कि उनका लिया गया फैसला पूरी कौम पर थोप दिया गया। उन्होंने कहा कि शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने को लेकर स्थानीय प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच सहमति की बात भी सामने आई थी।
वक्फ संपत्तियों में सियासी दखल बंद करने की मांग
हाजी हारून ने मांग की कि वक्फ संपत्तियों का संचालन सिख गुरुद्वारा की तर्ज पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सियासी हस्तक्षेप से बने वक्फ बोर्ड हमेशा से मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाहों और वक्फ संपत्ति का नुकसान करते आए हैं और वर्तमान में भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सियासी दखल बंद होने तक वक्फ का नुकसान होता रहेगा। हाजी हारून ने कहा कि इसके लिए जमीयत उलमा हिन्द सभी जिम्मेदार नेताओं, अधिकारियों और न्याय व्यवस्था तक जाएगी। उन्होंने उज्जैन मामले में निर्दोष लोगों पर पुलिसिया कार्रवाई पर भी नाराजगी जताई और तत्काल आरोपी बनाकर जेल भेजे गए लोगों से केस वापस लेने की मांग की। साथ ही न्यायालय से जंतर-मंतर मामले की तरह उज्जैन मामले में भी संज्ञान लेने की मांग की।




















