इंदौर में रियल एस्टेट कारोबारी बंटी नागर की मौत:7 हजार कॉल, मोबाइल लॉक और आखिरी बातचीत पर पुलिस की नजर

इंदौर। चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी संदीप उर्फ बंटी नागर की मौत के मामले में पुलिस की जांच अब कई अहम सवालों पर केंद्रित हो गई है। परिजन द्वारा आर्थिक संकट को आत्महत्या की वजह मानने से इनकार के बाद पुलिस निजी जीवन, आखिरी दिनों की गतिविधियों, मोबाइल और संपर्कों की जांच कर रही है। पुलिस को आशंका है कि ब्लैकमेलिंग का कोई एंगल भी हो सकता है, हालांकि इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है।
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मौत से पहले दोस्तों से बनाई दूरी
पुलिस के अनुसार बंटी नागर ने घटना से करीब तीन दिन पहले दोस्तों और परिचितों से दूरी बनाना शुरू कर दी थी। दिल्ली से लौटने के बाद उनके व्यवहार में बदलाव महसूस किया गया। शुक्रवार रात के बाद उन्होंने फोन पर बातचीत भी कम कर दी थी। अब पुलिस इस बदलाव को जांच की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है।
आखिरी कॉल का राज खोलने में जुटी पुलिस
बंटी के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की शुरुआती जांच में करीब डेढ़ महीने में 7 हजार से ज्यादा कॉल सामने आई हैं। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि घटना से पहले उन्होंने किन लोगों से बातचीत की, किससे कितनी देर बात हुई और किन नंबरों पर बातचीत अचानक बंद हुई।पुलिस छह महीने की कॉल डिटेल का भी विश्लेषण कर रही है। हाईप्रोफाइल मामला होने के कारण फिलहाल पुलिस संबंधित लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं कर रही है।
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मोबाइल का पैटर्न लॉक बना बड़ी पहेली
पुलिस के लिए बंटी का मोबाइल सबसे अहम कड़ी बना हुआ है। फोन का पैटर्न लॉक अभी तक नहीं खुल पाया है। पुलिस और विशेषज्ञ कई पैटर्न आजमा चुके हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली। गलत पैटर्न डालने पर लॉकिंग टाइम बढ़ने के कारण प्रक्रिया और जटिल हो रही है।पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल खुलने के बाद चैट, कॉल, रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल जानकारी से मौत से पहले की गतिविधियों का पता चल सकता है। बताया गया है कि बंटी फोन पर बातचीत की रिकॉर्डिंग भी करते थे।
ऑफिस पहुंचने का तरीका भी जांच के घेरे में
सीसीटीवी फुटेज की जांच में पुलिस को पता चला कि रविवार दोपहर करीब 1.11 बजे बंटी द मार्क बिल्डिंग के कॉरिडोर से अपने ऑफिस की ओर जाते दिखाई दिए। उनके हाथ में मोबाइल था। पुलिस के अनुसार वे मेन ऑफिस की चाबी के बजाय 404 नंबर वाले ऑफिस की चाबी लेकर पहुंचे थे।यही वह ऑफिस था, जहां बाद में उनकी मौत का पता चला। इस बिंदु को पुलिस जांच में महत्वपूर्ण मान रही है। परिवार के मुताबिक दोपहर करीब 1.30 बजे के बाद उन्हें फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। शाम करीब 5.30 से 6 बजे के बीच बेटा ऋषित उन्हें तलाशते हुए ऑफिस पहुंचा, तब घटना की जानकारी हुई।
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परिवार ने आर्थिक संकट से किया इनकार
बुधवार को बंटी की पत्नी अपर्णा, बेटे ऋषित और बड़े भाई पुलिस थाने पहुंचे। पुलिस ने उनसे पूछताछ की। परिवार ने कर्ज या किसी बड़े आर्थिक संकट को मौत की सीधी वजह मानने से इनकार किया है। परिवार ने आर्थिक और अन्य दस्तावेज जुटाकर विस्तृत बयान देने के लिए समय मांगा है।पुलिस अब कारोबार के साथ बंटी के निजी जीवन और आखिरी दिनों की गतिविधियों को भी जांच का हिस्सा बना रही है।
कारोबार सामान्य चलने की बात सामने आई
पुलिस ने बंटी के ऑफिस कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए हैं। कर्मचारियों के अनुसार प्रोजेक्ट सामान्य तरीके से चल रहे थे और बंटी रोजाना प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों से मुलाकात करते थे। उन्हें किसी बड़े आर्थिक संकट या कारोबार में रुकावट की जानकारी नहीं थी।जानकारी के अनुसार बंटी के कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट चल रहे थे। कुछ प्रोजेक्टों को विकास संबंधी मंजूरियां मिल चुकी थीं। इसी महीने सांवेर तहसील में करोड़ों रुपए की जमीन खरीदकर उसकी रजिस्ट्री कराने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस इन सभी दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है।
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फाइनेंसरों से जुड़े दावों की भी जांच
मामले की पड़ताल के दौरान कुछ बड़े फाइनेंसरों से बंटी के आर्थिक लेन-देन की चर्चाएं सामने आई हैं। विभिन्न रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से कई लोगों द्वारा करोड़ों रुपए दिए जाने के दावे किए गए हैं। हालांकि इन नामों और रकम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।पुलिस इन दावों को भी जांच का हिस्सा बना सकती है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या किसी आर्थिक लेन-देन, दबाव या अन्य विवाद का बंटी की मौत से कोई संबंध था।
ब्लैकमेलिंग एंगल की भी पड़ताल
बंटी के व्यवहार में अचानक आए बदलाव और अंतिम दिनों में कम हुई बातचीत के बाद पुलिस ब्लैकमेलिंग की आशंका समेत अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही है। हालांकि अभी तक पुलिस ने ब्लैकमेलिंग को मौत की वजह नहीं माना है और न ही किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसा आरोप साबित हुआ है।




















