27 हजार वोट पर अखिलेश की नजर, 2027 के लिए समझिए सपा की पूरी रणनीति

2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 15 सीटों पर जीत-हार का अंतर 1 हजार वोट से भी कम रहा था। इनमें 6 सीटें सपा, 8 बीजेपी और एक सीट निषाद पार्टी के खाते में गई थी। इसके अलावा 1 हजार से 5 हजार वोट के बीच के अंतर वाली कई सीटों पर भी मुकाबला बेहद करीबी रहा था। सपा का 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य ऐसे चुनावी गणित और संगठन को मजबूत करने की रणनीति से जोड़ा जा रहा है।
2022 में 15 सीटों पर एक हजार से कम था अंतर
पिछले विधानसभा चुनाव में कुल 15 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत और हार का अंतर 1 हजार वोट से कम रहा। इनमें 6 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की, जबकि 8 सीटें बीजेपी के खाते में गईं और एक सीट पर निषाद पार्टी के रमेश सिंह विजयी हुए।
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1 हजार से 2 हजार वोट के अंतर वाली सीटों पर भी नजर
इसके अलावा 14 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत और हार का अंतर 1 हजार से 2 हजार वोट के बीच रहा। इनमें 7 सीटों पर बीजेपी, 4 पर सपा, 2 पर अपना दल (सोनेलाल) और एक सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। ऐसे करीबी मुकाबलों को सपा की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2 से 5 हजार वोट के अंतर वाली सीटों का गणित
2 हजार से 3 हजार वोट के अंतर वाली कुल 8 सीटों में 5 पर सपा और 3 पर बीजेपी को जीत मिली थी। वहीं 3 हजार से 4 हजार वोट के अंतर वाली 7 सीटों में सपा ने 4, बीजेपी ने 2 और अपना दल (एस) ने एक सीट जीती थी। 4 हजार से 5 हजार वोट के अंतर वाली 9 सीटों में बीजेपी ने 7 और सपा ने 2 सीटें जीती थीं।
पिछड़ा, दलित और मुस्लिम वोटरों पर फोकस
सपा की रणनीति में पिछड़ा वर्ग, दलित और मुस्लिम मतदाता प्रमुख रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी ने गैर-यादव ओबीसी, अति पिछड़े वर्ग और युवाओं के बीच भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश तेज की है। 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य इसी संगठनात्मक विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।
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बूथ से गांव तक संगठन मजबूत करने की तैयारी
पार्टी नेताओं का मानना है कि हर बूथ पर नए समर्थक जोड़ने, वोटरों को सक्रिय करने और संगठन की पहुंच गांव स्तर तक बढ़ाने से चुनावी मुकाबलों में पार्टी की स्थिति बदल सकती है। अखिलेश यादव का विधानसभावार लक्ष्य तय करने का कदम संगठन को ग्राउंड लेवल पर पहले से सक्रिय करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।




















