'घर नहीं तो फिर कहां?अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही सोनम वांगचुक का बड़ा ऐलान, बोले- ‘घर नहीं, पहले यहां जाऊंगा’

पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आखिरकार अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए हैं। लंबे समय तक भूख हड़ताल पर रहने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अब स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर अपने समर्थकों को यह खुशखबरी दी। वीडियो में उन्होंने कहा कि अस्पताल से निकलने के बाद वे सबसे पहले राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
अस्पताल से बाहर आते ही लोगों को कहा धन्यवाद
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि अब उनकी तबीयत पहले से काफी बेहतर है और वे धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। उन्होंने कहा, सभी को नमस्कार। आखिर वह दिन आ गया, जब मैं अस्पताल से डिस्चार्ज होकर बाहर निकल रहा हूं। अब मैं पहले से काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं। खाना भी खा रहा हूं और शरीर में धीरे-धीरे ताकत वापस आ रही है। वांगचुक ने कहा कि अस्पताल से सीधे घर जाने के बजाय वे सबसे पहले राजघाट जाएंगे। वहां महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद ही अपने घर के लिए रवाना होंगे।
राजघाट जाकर बापू को देंगे श्रद्धांजलि
सोनम वांगचुक ने बताया कि उनके आंदोलन की शुरुआत भी राजघाट से हुई थी। इसलिए आंदोलन के सफल होने के बाद वे फिर से वहीं जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देना चाहते हैं। उन्होंने कहा, जब मैं स्विट्जरलैंड से भारत लौटा था, तब भी अनशन शुरू करने से पहले सबसे पहले राजघाट गया था। वहां बापू को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद ही जंतर-मंतर पहुंचा था। अब आंदोलन पूरा होने और अस्पताल से बाहर आने के बाद एक बार फिर राजघाट जाकर उन्हें नमन करूंगा।
समर्थकों का जताया दिल से आभार
वीडियो में सोनम वांगचुक ने उन सभी लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने आंदोलन के दौरान उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि यह जीत केवल उनकी नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की है जिसने आंदोलन को सफल बनाने के लिए अपनी आवाज उठाई। उन्होंने कहा, मैं आप सभी का दिल की गहराइयों से शुक्रिया अदा करता हूं। आपने मेरी आवाज को अपनी आवाज बनाया। पूरे देश से लोगों ने इस आंदोलन का समर्थन किया और आखिरकार हमारी मांग पूरी हुई। आप सभी को मेरा सलाम। जय हिंद।
28 जून को छात्रों के आंदोलन में हुए थे शामिल
सोनम वांगचुक 28 जून को छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए थे। उस समय देशभर में पेपर लीक मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। वांगचुक ने छात्रों का समर्थन करते हुए जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने लगातार 26 दिनों तक अनशन किया। इस दौरान हजारों छात्र, सामाजिक संगठन और कई लोग उनके समर्थन में सामने आए। आंदोलन के दौरान उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई, लेकिन उन्होंने अपनी मांगों से पीछे हटने से इनकार कर दिया।
तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में कराया गया भर्ती
लंबे समय तक भोजन न करने के कारण सोनम वांगचुक की तबीयत गंभीर रूप से खराब हो गई। डॉक्टरों की सलाह के बाद 18 जुलाई को उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उन्हें अस्पताल में इलाज के बजाय हिरासत में रखा गया हो। उनके इस बयान के बाद मामला और चर्चा में आ गया।
दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद मेदांता अस्पताल भेजे गए
सोनम वांगचुक के परिवार और समर्थकों ने उनकी बेहतर चिकित्सा की मांग की। इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया गया। वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज किया गया। कुछ दिनों के इलाज और देखभाल के बाद उनकी सेहत में लगातार सुधार हुआ और अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
36 दिन तक चला छात्रों का बड़ा आंदोलन
पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन कई दिनों तक जारी रहा। इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) कर रही थी। आंदोलन की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। करीब 36 दिनों तक चले इस आंदोलन में देश के अलग-अलग राज्यों से छात्र और युवा शामिल हुए। जंतर-मंतर पर लगातार धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल जारी रही। सोनम वांगचुक भी इसी आंदोलन का हिस्सा बने और उन्होंने छात्रों के समर्थन में अनशन किया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ आंदोलन
लगातार चले विरोध प्रदर्शन और बढ़ते दबाव के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की गई। इसके बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री नियुक्त किया। आंदोलन खत्म होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया।











