अशोकनगर में इलाज से इनकार; 45 किमी दूर ट्रेन से गुना पहुंची प्रसूता, रात 2 बजे ऑपरेशन के बाद स्वस्थ बच्चे का जन्म

गुना। कहते हैं, जिसका कोई नहीं होता, उसका भगवान होता है। गुना जिला अस्पताल में सामने आया एक संवेदनशील मामला इस कहावत को चरितार्थ करता है। पति और पिता को खो चुकी अनामिका जोगी के लिए प्रसव के समय उसकी बहन ही एकमात्र सहारा थी। अनामिका की मां कोटा में मजदूरी करती हैं, जबकि उसके पति सुनील जोगी की इसी साल जनवरी में सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
अशोकनगर अस्पताल से किया गया रेफर
अनामिका जब भीषण प्रसव पीड़ा के बीच अशोकनगर जिला अस्पताल पहुंची, तो कथित तौर पर वहां डिलीवरी कराने से मना कर दिया गया। चिकित्सकों ने इसे हाई रिस्क ऑपरेशन बताते हुए ग्वालियर या भोपाल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद निराश और परेशान अनामिका अपनी बहन के साथ दिनभर भूखी-प्यासी भटकती रही।
देर रात अस्पताल पहुंचे डॉक्टर
लगातार बढ़ती प्रसव पीड़ा के बीच अनामिका आखिरकार अपनी बहन के साथ ट्रेन से करीब 45 किलोमीटर दूर गुना जिला अस्पताल पहुंची। रात करीब 2 बजे अस्पताल में उसकी स्थिति बेहद गंभीर और हाई रिस्क दिखाई दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ऑन-कॉल स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. सतीश राजपूत को तत्काल अस्पताल बुलाया गया।
ब्लड की व्यवस्था कर कराई सफल डिलीवरी
डॉ. राजपूत ने अनामिका की नाजुक स्थिति के साथ उसकी पारिवारिक परिस्थितियों को भी समझा। मरीज के साथ कोई पुरुष या रक्तदाता मौजूद नहीं था। ऐसे में डॉक्टर ने स्वयं आगे बढ़कर रक्त की व्यवस्था कराई और अपनी ओर से आर्थिक मदद भी की। इसके बाद रात में ही सफल ऑपरेशन कर डिलीवरी कराई गई। अनामिका ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया। फिलहाल मां और नवजात दोनों सुरक्षित बताए जा रहे हैं।




















