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सोहागपुर बनेगा आध्यात्मिक पर्यटन का नया केंद्र ?मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी कार्ययोजना

सोहागपुर को आध्यात्मिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की मांग तेज हुई है। भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ के प्रवक्ता गौरव अग्रवाल ने कहा कि नर्मदा क्षेत्र के धार्मिक और पौराणिक स्थलों को पर्यटन से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव को विस्तृत कार्ययोजना सौंपी जाएगी, जिससे स्थानीय रोजगार और व्यापार को बढ़ावा मिल सके।
मुख्यमंत्री को भेजी जाएगी कार्ययोजना

सोहागपुर। पर्यटन नगरी मढ़ई के कारण पहले से पहचान बना चुके सोहागपुर को अब आध्यात्मिक पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग उठने लगी है। भाजपा व्यापारी प्रकोष्ठ के नव नियुक्त प्रवक्ता गौरव अग्रवाल का कहना है कि नर्मदा क्षेत्र से जुड़े धार्मिक, ऐतिहासिक और पौराणिक स्थलों को पर्यटन की मुख्यधारा में लाकर न केवल क्षेत्र की पहचान मजबूत की जा सकती है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और व्यापार के नए अवसर भी तैयार किए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री के समक्ष रखी जाएगी कार्ययोजना

गौरव अग्रवाल ने कहा कि सोहागपुर में पर्यटन आधारित व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत है। इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की जाएगी। उनका कहना है कि यदि इस दिशा में ठोस पहल होती है तो क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा है सोहागपुर का पौराणिक संबंध

गौरव अग्रवाल ने दावा किया कि सोहागपुर का भगवान श्रीकृष्ण से विशेष संबंध माना जाता है। उनके अनुसार, यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध की ससुराल के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले भी उन स्थानों को तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित करने की बात कह चुके हैं, जहां भगवान श्रीकृष्ण के चरण पड़ने की मान्यता है। ऐसे में सोहागपुर भी इस योजना का हिस्सा बन सकता है।

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र्मदा क्षेत्र में कई पौराणिक स्थलों का उल्लेख

गौरव अग्रवाल के अनुसार, सोहागपुर और आसपास का नर्मदा क्षेत्र अनेक धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि सूरजकुंड को भगवान सूर्य नारायण और उनकी पत्नी छाया की तपोस्थली माना जाता है। वहीं अजेरा का रेवा-कुब्जा संगम देवी सरस्वती की तपोभूमि के रूप में प्रसिद्ध है। इसके अलावा माछा, रेवा, बनखेड़ी और ईशरपुर में भगवान श्रीराम और माता सीता के आगमन की मान्यताएं प्रचलित हैं। गलचा को ऋषि गालव की तपोस्थली तथा नारदी संगम को देवर्षि नारद की तपस्या से जुड़ा स्थान बताया जाता है। साथ ही अजेरा और सत्तावन में पांडवों द्वारा महायज्ञ किए जाने की भी स्थानीय मान्यताएं हैं।

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पर्यटन से बढ़ सकते हैं रोजगार और व्यापार

गौरव अग्रवाल का कहना है कि यदि इन धार्मिक और पौराणिक स्थलों को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाता है, तो होटल, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प, भोजनालय और अन्य पर्यटन आधारित व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा। इससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

Edited By- Sona Rajput

Neelam Tiwari
By Neelam Tiwari

नीलम तिवारी - सोहागपुर के वरिष्ठ पत्रकार, 40 वर्षों से निष्पक्ष, जनसरोकार और ग्रामीण मुद्दों की निर्...Read More

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