डेरा सच्चा सौदा उत्तर भारत का एक बड़ा सामाजिक-धार्मिक संगठन माना जाता है, जिसका प्रभाव हरियाणा, पंजाब और आसपास के राज्यों में काफी गहरा है। हरियाणा के सिरसा में स्थित इसका मुख्यालय देश-विदेश में फैले करोड़ों अनुयायियों के कारण लगातार चर्चा में रहता है। डेरे का प्रभाव केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक कार्यों, बड़े आर्थिक ढांचे और कई बार राजनीतिक प्रभाव के कारण भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
हाल ही में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से पैरोल पर बाहर आए हैं। इन दिनों वह सिरसा स्थित डेरे में अनुयायियों के साथ सत्संग और अन्य गतिविधियों में व्यस्त हैं। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि आखिर डेरा सच्चा सौदा क्या है, इसकी शुरुआत कैसे हुई और गुरमीत राम रहीम से पहले इसके प्रमुख कौन रहे।
डेरा सच्चा सौदा की स्थापना 29 अप्रैल 1948 को संत शाह मस्ताना महाराज ने की थी। हरियाणा के सिरसा में स्थापित इस आश्रम की शुरुआत समाज में आध्यात्मिक जागरूकता फैलाने और लोगों को आध्यात्मिक मार्ग दिखाने के उद्देश्य से की गई थी।
डेरा सच्चा सौदा की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, शाह मस्ताना को अपने गुरु से आदेश मिला था कि वे बागर क्षेत्र के लोगों के आध्यात्मिक कल्याण के लिए एक आश्रम की स्थापना करें। इसी आदेश के बाद इस संस्था की नींव रखी गई, जिसे बाद में “डेरा सच्चा सौदा” के नाम से जाना जाने लगा।
शाह मस्ताना महाराज के बाद डेरा सच्चा सौदा की गद्दी सतनाम सिंह महाराज को सौंपी गई। उन्होंने डेरे के विस्तार और अनुयायियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कहा जाता है कि शाह मस्ताना ने 1960 में भविष्यवाणी की थी कि सात साल बाद डेरे का तीसरा प्रमुख आएगा, जो संस्था को आगे बढ़ाएगा। इसी भविष्यवाणी को बाद में गुरमीत राम रहीम से जोड़ा जाता है।
गुरमीत राम रहीम सिंह का जन्म 13 अगस्त 1967 को हुआ था। वर्ष 1990 में सतनाम सिंह महाराज ने एक भव्य सत्संग के दौरान उन्हें डेरा सच्चा सौदा की गद्दी सौंप दी। इसके बाद से गुरमीत राम रहीम डेरे के तीसरे प्रमुख के रूप में संस्था का नेतृत्व कर रहे हैं।
उनके नेतृत्व में डेरा सच्चा सौदा ने अपने अनुयायियों का दायरा और गतिविधियों को काफी बढ़ाया, जिससे यह संगठन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया।
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डेरा सच्चा सौदा का सिरसा स्थित आश्रम पिछले लगभग 77 वर्षों से सक्रिय है। संगठन का दावा है कि दुनिया भर में इसके 7 करोड़ से अधिक अनुयायी हैं।
इसके आश्रम और केंद्र भारत के अलावा अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भी मौजूद हैं। बड़ी संख्या में लोग नियमित रूप से डेरे से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं।
डेरा सच्चा सौदा की खासियत यह बताई जाती है कि यहां किसी भी धर्म, जाति या वर्ग के लोगों के लिए दरवाजे खुले हैं। संगठन का दावा है कि इसके अनुयायियों में हिंदू, मुस्लिम, सिख और अन्य समुदायों के लोग शामिल हैं।
डेरे के अनुयायियों का मानना है कि यहां सभी लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर नाम जपते हैं और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि कम समय में इस संस्था से जुड़ने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी।
डेरा सच्चा सौदा केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा है। संगठन की ओर से कई सामाजिक कार्यों का भी दावा किया जाता है।