राम रहीम को बड़ी राहत :पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में हाईकोर्ट ने किया बरी, तीन आरोपियों की उम्रकैद बरकरार

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। हालांकि, तीन अन्य आरोपियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई है। जानिए इस 23 साल पुराने चर्चित केस की पूरी कहानी, अदालत का फैसला और घटनाक्रम।
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पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में हाईकोर्ट ने किया बरी, तीन आरोपियों की उम्रकैद बरकरार
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    चंडीगढ़। करीब 23 साल पुराने चर्चित पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को इस मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि, उनके खिलाफ साजिश रचने के पर्याप्त सबूत नहीं मिले। इस केस में दोषी ठहराए गए तीन अन्य आरोपियों कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल की उम्रकैद की सजा को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है।

    यह मामला देश के चर्चित आपराधिक मामलों में से एक रहा है, जिसमें एक पत्रकार की हत्या, डेरा प्रमुख पर लगे गंभीर आरोप और लंबे कानूनी संघर्ष ने इसे सुर्खियों में बनाए रखा।

    क्या है पूरा मामला

    हरियाणा के सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या वर्ष 2002 में गोली मारकर की गई थी। उन्होंने अपने अखबार में डेरा सच्चा सौदा से जुड़े गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था। इन आरोपों में डेरे में साध्वियों के यौन शोषण से संबंधित एक चिट्ठी भी शामिल थी, जिसे छत्रपति ने अपने अखबार में प्रकाशित किया था। इसके बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं।

    आखिरकार 19 अक्टूबर 2002 की रात को उनके घर के बाहर अज्ञात हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन 21 अक्टूबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

    हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

    पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि, उपलब्ध सबूतों के आधार पर यह साबित नहीं होता कि राम रहीम इस हत्याकांड की साजिश में शामिल थे। कोर्ट ने कहा कि, अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूत राम रहीम को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए उन्हें इस मामले में राहत दी जाती है। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत और गवाह मौजूद हैं। इसी आधार पर उनकी सजा को बरकरार रखा गया है।

    हालांकि, राम रहीम को साध्वियों के यौन शोषण केस में 10 साल कैद की सजा हुई है। जिसकी वजह से राम रहीम को अभी जेल में ही रहना होगा।

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    किन आरोपियों की सजा बरकरार

    इस केस में हाईकोर्ट ने तीन आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इन आरोपियों में शामिल हैं-

    • कुलदीप सिंह
    • निर्मल सिंह
    • कृष्ण लाल

    अदालत ने कहा कि, इन तीनों के खिलाफ उपलब्ध सबूत और गवाह उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं।

    2019 में CBI कोर्ट ने सुनाई थी सजा

    इससे पहले 17 जनवरी 2019 को पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया था। सीबीआई कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम समेत चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके अलावा जुर्माने का भी प्रावधान किया गया था। इस फैसले के खिलाफ सभी दोषियों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अब अपना फैसला सुनाया है।

    कोर्ट में क्या-क्या दलीलें दी गईं

    सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और सीबीआई दोनों की ओर से कई अहम दलीलें दी गईं। राम रहीम के वकील बसंत राय ने अदालत में कहा कि इस मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई है। उन्होंने कहा कि, पत्रकार को लगी गोली सॉफ्ट लेड से बनी थी। वकील ने यह भी तर्क दिया कि, ऐसी गोलियां आमतौर पर सैन्य उपकरणों और स्नाइपर में इस्तेमाल की जाती हैं।

    उन्होंने अदालत को बताया कि, घटना को 23 साल बीत चुके हैं और अब गोली पर मौजूद निशान या पहचान चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं।

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    गोली की जांच को लेकर उठे सवाल

    कोर्ट में यह भी सवाल उठा कि, जिस कंटेनर में गोली रखी गई थी, उस पर एम्स की सील लगी हुई थी और फोरेंसिक विशेषज्ञों के हस्ताक्षर भी मौजूद थे। बचाव पक्ष ने पूछा कि, अगर कंटेनर की सील कभी खोली ही नहीं गई, तो फिर फोरेंसिक लैब ने गोली की जांच कैसे की। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि विशेषज्ञों के हस्ताक्षर गोली पर थे या कंटेनर पर। इन सवालों के आधार पर अदालत ने सबूतों को पर्याप्त नहीं माना।

    हाईकोर्ट की टिप्पणी

    सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि, प्रस्तुत की गई गोलियों पर कोई स्पष्ट निशान दिखाई नहीं दे रहे हैं। अदालत ने शिकायत पक्ष के वकील से पूछा कि, फोरेंसिक विशेषज्ञों ने गोली पर हस्ताक्षर किए थे या कंटेनर पर। इस पर शिकायत पक्ष की ओर से कहा गया कि, कंटेनर पर विशेषज्ञों के हस्ताक्षर मौजूद हैं, लेकिन गोली पर हस्ताक्षर के निशान अब स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहे।

    राम रहीम पर तीन बड़े केस

    डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर अलग-अलग मामलों में कई गंभीर आरोप लगे थे।

    1. साध्वी यौन शोषण केस

    वर्ष 2017 में पंचकूला की विशेष अदालत ने दो साध्वियों के यौन शोषण के मामले में राम रहीम को दोषी ठहराया था। इस मामले में उन्हें 20 साल की सजा सुनाई गई थी।

    2. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति मर्डर केस

    इस मामले में जनवरी 2019 में सीबीआई कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में उन्हें बरी कर दिया है।

    3. डेरा मैनेजर रणजीत सिंह हत्याकांड

    इस केस में भी हाईकोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया था। हालांकि, इस फैसले को सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

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    अभी भी जेल में ही रहेगा राम रहीम

    हालांकि हाईकोर्ट से इस मामले में राहत मिलने के बावजूद राम रहीम अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेगा। इसकी वजह यह है कि, साध्वी यौन शोषण मामले में उसे 20 साल की सजा सुनाई जा चुकी है और वह फिलहाल उसी सजा के तहत जेल में बंद है।

    कौन थे पत्रकार रामचंद्र छत्रपति

    रामचंद्र छत्रपति हरियाणा के सिरसा जिले के रहने वाले पत्रकार थे। उन्होंने वर्ष 2000 में वकालत छोड़कर पत्रकारिता शुरू की और सिरसा से अपना अखबार प्रकाशित करना शुरू किया।

    साध्वियों के शोषण की चिट्ठी प्रकाशित की

    2002 में उन्हें एक गुमनाम चिट्ठी मिली जिसमें डेरा सच्चा सौदा में साध्वियों के यौन शोषण का आरोप लगाया गया था। छत्रपति ने 30 मई 2002 को इस चिट्ठी को अपने अखबार में प्रकाशित कर दिया। इसके बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं।

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    कैसे हुई हत्या

    परिवार के अनुसार चिट्ठी प्रकाशित होने के बाद कई महीनों तक उन्हें धमकियां मिलती रहीं। 19 अक्टूबर 2002 की रात को जब रामचंद्र छत्रपति अपने घर के बाहर मौजूद थे, तभी हमलावरों ने उन पर गोली चला दी। उन्हें कुल पांच गोलियां मारी गईं। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन दो दिन बाद उनकी मौत हो गई।

    जांच CBI को सौंपी गई

    शुरुआत में पुलिस जांच से परिवार संतुष्ट नहीं था। इसके बाद पत्रकार के परिवार ने मुख्यमंत्री से मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की। जनवरी 2003 में उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इसके बाद 10 नवंबर 2003 को हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया।

    केस की टाइमलाइन

    इस मामले में पिछले दो दशकों में कई अहम घटनाएं हुईं।

    19 अक्टूबर 2002: सिरसा में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को गोली मारी गई।

    21 अक्टूबर 2002: दिल्ली के अपोलो अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हुई।

    जनवरी 2003: बेटे अंशुल छत्रपति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

    10 नवंबर 2003: हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए।

    2017: साध्वी यौन शोषण मामले में राम रहीम को दोषी ठहराया गया।

    11 जनवरी 2019: सीबीआई कोर्ट ने चार आरोपियों को दोषी करार दिया।

    17 जनवरी 2019: सभी दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

    7 मार्च 2026: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राम रहीम को बरी कर दिया।

    रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड देश के सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा है। इस मामले ने पत्रकारों की सुरक्षा, धार्मिक संगठनों की जवाबदेही और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर कई बहसों को जन्म दिया। करीब 23 साल बाद आए इस फैसले ने एक बार फिर इस केस को राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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