श्यामपुर दुष्कर्म कांड में पॉक्सो कोर्ट का कड़ा फैसला: आरोपी को 20 साल का कठोर कारावास, पीड़िता को एक लाख रुपये प्रतिकर

सीहोर। जिले के श्यामपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका को बहला-फुसलाकर घर से ले जाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में पॉक्सो न्यायालय ने कठोर फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर ने आरोपी विशाल अहिरवार, पिता चैनसिंह उर्फ दिनेश, उम्र 18 वर्ष, निवासी ग्राम रावणखेड़ा, थाना श्यामपुर, जिला सीहोर को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने आरोपी को धारा 5(एल)/6 पॉक्सो अधिनियम के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास से दंडित किया। इसके अतिरिक्त धारा 87 भारतीय न्याय संहिता के तहत 2 वर्ष का कठोर कारावास तथा धारा 137(2) बीएनएस के तहत 1 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। आरोपी पर कुल 2000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। न्यायालय ने पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के उद्देश्य से उसे एक लाख रुपये प्रतिकर राशि दिए जाने का आदेश भी पारित किया है।
रात में घर से गायब हुई थी बालिका
अभियोजन के अनुसार, पीड़िता के पिता ने 20 अगस्त 2024 को थाना श्यामपुर में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनकी 16 वर्षीय पुत्री कक्षा 9 में अध्ययनरत थी। घटना की रात परिवार भोजन करने के बाद सो गया था। रात करीब 1 बजे बालिका घर में नहीं मिली। परिजनों और रिश्तेदारों के स्तर पर तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की और संभावित स्थानों पर दबिश दी। विवेचना के दौरान 26 अगस्त 2024 को पुलिस ने पीड़िता को दस्तयाब किया। पुलिस पूछताछ और वैधानिक प्रक्रिया में पीड़िता के कथन दर्ज किए गए। उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया गया तथा न्यायालय के समक्ष धारा 164 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत बयान कराए गए।
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आरोपी के साथ दूर ले जाने का आरोप
पीड़िता ने अपने कथनों में बताया कि वह आरोपी को पड़ोस में रहने के कारण जानती थी। आरोपी उससे बातचीत करता था और विवाह का झांसा देता था। आरोप है कि आरोपी उसे मोटरसाइकिल से लेकर महाराष्ट्र के अमरावती जिले के ग्राम कुंभी गोरखेड़ी गया। बाद में उसे ग्राम मासोद ले जाकर खेत में बने मकान में रखा गया, जहां आरोपी ने उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को 26 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया। विवेचना पूर्ण होने के बाद अभियोग पत्र सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। अभियोजन ने दस्तावेजी साक्ष्य, चिकित्सीय साक्ष्य, पीड़िता के कथनों और अन्य मौखिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध अपराध सिद्ध किया। अभियोजन की ओर से विशेष लोक अभियोजक आशीष त्यागी ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। प्रस्तुत साक्ष्यों और मौखिक अंतिम तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना और कड़ी सजा सुनाई।
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कानून व्यवस्था पर स्पष्ट संदेश
यह फैसला नाबालिगों के विरुद्ध अपराध करने वालों के लिए कड़ा कानूनी संदेश है। पुलिस और अभियोजन की समन्वित कार्रवाई से आरोपी को दोषसिद्धि मिली। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों में त्वरित जांच, प्रभावी अभियोजन और कठोर दंड सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
EDIT BY: ADITI RAWAT












