परिवार पर टूटा दुख :निशानेबाज जसपाल राणा की मां का भी निधन, बेटे के जाने का सदमा नहीं सह पाईं

दिल्ली के आर्मी अस्पताल में ली अंतिम सांस
द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच नारायण सिंह राणा की पत्नी श्यामा देवी राणा (78 वर्ष) का नई दिल्ली के एक आर्मी अस्पताल में इलाज चल रहा था। परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, 12 जून को बेटे जसपाल राणा के निधन के बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली।
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बेटे के जाने का सदमा नहीं सह सकीं मां
परिजनों का कहना है कि जसपाल राणा के निधन की खबर ने श्यामा देवी राणा को भीतर तक झकझोर दिया था। बेटे के प्रति उनका विशेष लगाव था और अचानक हुए इस नुकसान ने उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाला। परिवार के लोगों के अनुसार, वह लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर होती जा रही थीं। आखिरकार यह सदमा उनके लिए जानलेवा साबित हुआ।
उत्तराखंड से देशभर में शोक की लहर
उत्तराखंड के टिहरी जिले के चिलामू गांव से संबंध रखने वाला राणा परिवार लंबे समय से भारतीय खेल जगत में अपनी पहचान रखता है। जसपाल राणा भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्यरत थे। मां और बेटे के कुछ दिनों के अंतराल में निधन की खबर से उत्तराखंड समेत पूरे देश में शोक की लहर फैल गई है।
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खेल जगत ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
जसपाल राणा के निधन के बाद से ही खेल जगत के खिलाड़ी, कोच और प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अब उनकी मां के निधन की खबर ने दुख को और गहरा कर दिया है। खेल समुदाय ने राणा परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा जताया है।
भारतीय निशानेबाजी का चमकता सितारा थे जसपाल
जसपाल राणा भारत के सबसे सफल पिस्टल निशानेबाजों में गिने जाते थे। उन्होंने मात्र 18 वर्ष की आयु में विश्व रिकॉर्ड बनाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई थी। राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई खेलों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उन्होंने भारत को कई स्वर्ण पदक दिलाए। सक्रिय खेल जीवन के बाद उन्होंने कोच के रूप में नई पीढ़ी के निशानेबाजों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय पिस्टल शूटिंग के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में उनका योगदान बेहद महत्वपूर्ण रहा। उनका जीवन भारतीय खेल इतिहास में हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।












