एक ही जिले में आयुक्त से कलेक्टर... शिवम वर्मा ने संभाली इंदौर कलेक्टर की कमान, इंदौर के साथ किए खजराना गणेश के दर्शन

इंदौर। मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में मंगलवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब शिवम वर्मा ने इंदौर जिले के कलेक्टर पद की जिम्मेदारी संभाली। नगर निगम कमिश्नर के पद से आईएएस शिवम वर्मा ने इंदौर कलेक्टोरेट का चार्ज पूर्व कलेक्टर आशीष सिंह से लिया। इससे पहले उन्होंने अपनी पत्नी जयति सिंह के साथ खजराना गणेश मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की।
खास बात यह है कि जयति सिंह को बड़वानी जिले का कलेक्टर बनाया गया है। संभवतः यह पहला अवसर है जब पति-पत्नी एक साथ अलग-अलग जिलों में कलेक्टर पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

खजराना गणेश मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद पदभार ग्रहण
शिवम वर्मा और जयति सिंह ने खजराना गणेश मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर भगवान गणेश से आशीर्वाद लिया। शिवम वर्मा ने कहा, इंदौर के विकास, कानून-व्यवस्था और जनसमस्याओं का समाधान मेरी प्राथमिकता होगी। मैं पूरी मेहनत करूंगा ताकि नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतर सकूं।
नगर में सफल कार्यकाल के बाद कलेक्टर का दायित्व
शिवम वर्मा ने नगर निगम आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल में स्वच्छता अभियान, ग्रीन प्रोजेक्ट्स और आधारभूत संरचना सुधार कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दिया था। अब कलेक्टर के तौर पर उन्हें न केवल विकास कार्य बल्कि प्रशासनिक समन्वय, कानून व्यवस्था बनाए रखना और शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना होगा। उनका उद्देश्य इंदौर को एक बेहतर प्रशासनिक मॉडल बनाना है, जिससे नागरिकों की समस्याएं समय पर हल हों और शहर का विकास निर्बाध गति से चलता रहे।
ऑफिस के बाहर बैठी महिला से की मुलाकात
कलेक्टोरेट में भव्य स्वागत
कलेक्टर कार्यालय पहुंचने से पहले ही अधिकारियों, कर्मचारियों और करीबी लोगों की भीड़ शिवम वर्मा का स्वागत करने के लिए पहुंच गई थी। कार्यालय परिसर में उन्हें फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। सभी ने उन्हें शुभकामनाएं दी और नए कार्यभार के प्रति उत्साह व्यक्त किया। शिवम वर्मा ने अपने भाषण में यह भी भरोसा दिलाया कि वे निष्पक्ष प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ लोगों की आवाज को भी प्राथमिकता देंगे।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस कदम से प्रशासनिक हलकों में उम्मीदें और अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। नागरिक वर्ग ने भी नए कलेक्टर से अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद जताई है। साथ ही, यह कदम प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है।





















