शशि थरूर बोले-पासपोर्ट हमेशा से विश्वनीय नागरिक प्रमाण, केंद्र लोगों के बीच भ्रम फैला रही, विदेश मंत्रालय ने यात्रा प्रमाण बताया

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पासपोर्ट को लेकर केंद्र सरकार के हालिया रुख पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि सरकार का यह कहना कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं, बल्कि केवल यात्रा दस्तावेज है, एक बड़ा कानूनी विरोधाभास पैदा करता है। थरूर के मुताबिक, वर्षों से पासपोर्ट को सबसे भरोसेमंद सरकारी दस्तावेज माना जाता रहा है। ऐसे में अगर इससे भी नागरिकता साबित नहीं होती, तो आम नागरिक किस दस्तावेज के आधार पर अपनी नागरिकता साबित करेगा।
थरूर ने दिया यह सुझाव
थरूर का कहना है कि जब तक सरकार किसी व्यक्ति का पासपोर्ट या आधार कार्ड रद्द नहीं करती, तब तक इन्हें नागरिकता का पर्याप्त प्रमाण माना जाना चाहिए।
- UIDAI गैर-भारतीय निवासियों के लिए अलग तरह का आधार कार्ड जारी करे।
- सामान्य भारतीय आधार और वैध पासपोर्ट को नागरिकता का स्वीकार्य प्रमाण बनाया जाए।
- इससे नागरिकता से जुड़े विवाद कम होंगे और प्रशासनिक प्रक्रिया भी आसान होगी।
किसने क्या कहा?
अमित मालवीय (भाजपा)
उन्होंने कहा कि सरकार ने कोई नया नियम नहीं बनाया है। पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 के तहत विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किया जा सकता है।
कपिल सिब्बल (राज्यसभा सांसद)
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर नागरिकता साबित करने का आधार क्या होगा।
जावेद अख्तर (गीतकार)
गीतकार जावेद अख्तर का कहना है कि विदेश मंत्रालय के बयान को तर्कहीन बताते हुए पूछा कि क्या सरकार गैर-भारतीयों को भी भारतीय पासपोर्ट जारी कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
विदेश मंत्रालय ने 24 जून को जारी एक आदेश में स्पष्ट किया कि पासपोर्ट का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को वैध बनाना है, न कि नागरिकता का अंतिम प्रमाण देना। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी आधार कार्ड को पहचान का दस्तावेज बता चुका है, नागरिकता का नहीं। इसी मुद्दे को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
पासपोर्ट सेवाओं को लेकर सरकार का दावा
विदेश मंत्रालय का कहना है कि पिछले एक दशक में देश में पासपोर्ट सेवाओं को पहले के मुकाबले काफी मजबूत बनाया गया है। सरकार के अनुसार, पासपोर्ट सेवा केंद्रों और उनसे जुड़ी सुविधाओं की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है, जिससे अधिक लोगों तक सेवाएं पहुंच रही हैं।मंत्रालय के मुताबिक, 2025 में शुरू किए गए चिप आधारित ई-पासपोर्ट की अब तक 1.47 करोड़ प्रतियां जारी की जा चुकी हैं। साथ ही, पासपोर्ट आवेदन के निपटारे का औसत समय घटकर 5 से 6 दिन रह गया है, जिससे लोगों को पहले की तुलना में जल्दी पासपोर्ट मिल रहा है।
पासपोर्ट से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जो सरकार ने दी
- अब तक 1.47 करोड़ चिप आधारित ई-पासपोर्ट जारी किए जा चुके हैं।
- पासपोर्ट आवेदन का औसत निपटारा 5-6 दिनों में हो रहा है।
- भारतीयों को 27 देशों में वीजा-फ्री प्रवेश की सुविधा मिल रही है, जबकि 2019 में यह संख्या 16 थी।
1 जुलाई से बढ़ जाएगी पासपोर्ट फीस
केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से पासपोर्ट शुल्क बढ़ाने का फैसला किया है। जिसके तहत अलग- अलग कैटेगरी के हिसाब से पासपोर्ट की फीस तय की गई है। इनमें सामान्य पासपोर्ट, तत्काल पासपोर्ट शामिल है। जिस पर केंद्र ने चॉर्ज बढ़ाए है।
- 36 पेज सामान्य पासपोर्ट: 1,500 से बढ़कर 2,500 रुपए
- 36 पेज तत्काल पासपोर्ट: 3,500 से बढ़कर 5,000 रुपए
- 60 पेज सामान्य पासपोर्ट: 2,000 से बढ़कर 3,500 रुपए
- 60 पेज तत्काल पासपोर्ट: 4,000 से बढ़कर 6,000 रुपए











