भोपाल:छोटा तालाब प्रोजेक्ट पर NGT सख्त, 6.99 करोड़ के कायाकल्प कार्य की जांच के आदेश

भोपाल के छोटा तालाब किनारे चल रहे नगर निगम के कायाकल्प प्रोजेक्ट पर NGT ने सख्त रुख अपनाया है। पर्यावरणविद् राशिद नूर की याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने मामले की जांच के लिए संयुक्त कमेटी गठित की है। यह समिति चार सप्ताह के भीतर स्थल निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट ट्रिब्यूनल को सौंपेगी। मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को होगी। करीब 6.99 करोड़ रुपए की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का काम अप्रैल महीने में शुरू हुआ था। इसके बाद पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं।
बफर जोन में निर्माण और तालाब छोटा करने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया कि छोटा तालाब के बफर जोन में पिचिंग और सौंदर्यीकरण के नाम पर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। तालाब के किनारों पर पत्थर डालकर जल क्षेत्र को छोटा किया जा रहा है जबकि कई जगह पेड़ों की कटाई और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां भी सामने आई हैं। पर्यावरणविद् राशिद नूर ने यह भी दावा किया कि निर्माण कार्यों के चलते भोज वेटलैंड क्षेत्र की संवेदनशीलता प्रभावित हो सकती है। छोटा तालाब इसी वेटलैंड सिस्टम का हिस्सा माना जाता है जहां 50 मीटर तक निर्माण पर रोक है।
अप्रैल में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
नगर निगम ने अप्रैल के पहले सप्ताह में मछली घर के सामने वाले हिस्से में काम शुरू कराया था। यहां फुटपाथ मरम्मत, सड़क निर्माण और बाउंड्रीवॉल पिचिंग जैसे कार्य किए जा रहे थे। याचिका में कहा गया कि बिना जरूरी पर्यावरणीय अनुमति के निर्माण और तैयारी गतिविधियां की जा रही हैं जिससे झील के इकोसिस्टम पर असर पड़ सकता है।
गंदा पानी और कचरे का भी मुद्दा उठा
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि कई स्थानों पर गंदा पानी सीधे झील में गिरता दिखाई देता है जिससे पानी की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा है। इसके अलावा तालाब किनारे प्लास्टिक कचरा, घरेलू वेस्ट और सी एंड डी वेस्ट के ढेर भी देखे गए हैं। याचिकाकर्ता ने इसे गंभीर पर्यावरणीय खतरा बताया।
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NGT ने कहा- पहली नजर में गंभीर उल्लंघन
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत फोटो और दस्तावेज प्रथम दृष्टया गंभीर पर्यावरणीय उल्लंघनों की ओर संकेत करते हैं। ट्रिब्यूनल ने माना कि संबंधित एजेंसियों द्वारा तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है। ट्रिब्यूनल ने भोपाल नगर निगम को निर्देश दिया है कि वह स्थल निरीक्षण कर कथित अवैध और पर्यावरण विरोधी गतिविधियों की जांच करे और अनुपालन रिपोर्ट पेश करे।
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संयुक्त जांच समिति करेगी निरीक्षण
मामले की जांच के लिए बनाई गई संयुक्त समिति में सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और इप्को समेत अन्य एजेंसियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। समिति चार सप्ताह के भीतर निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। याचिकाकर्ता राशिद नूर की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पैरवी की।












