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Peoples Update Special : आठ साल पहले खरीदी गईं 7 ईवी कारें ऊर्जा विकास निगम के दफ्तर में खा रहीं जंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के उपयोग के बढ़ाने पर जोर दिया है। मप्र सरकार अपनी ईवी नीति के तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी बढ़ावा दे रही है लेकिन मप्र में आठ साल पहले खरीदी गई सात ईवी दफ्तर में ही खड़ी हैं। इनका उपयोग नहीं किया जा रहा। सरकारी उपयोग के लिए खरीदी गई 1 कार की कीमत करीब 11 लाख रुपए थी।
आठ साल पहले खरीदी गईं 7 ईवी कारें ऊर्जा विकास निगम के दफ्तर में खा रहीं जंग

संतोष चौधरी, भोपाल। राज्य सरकार एक ओर नई ईवी नीति और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दे रही है। वहीं दूसरी ओर करीब आठ साल पहले खरीदी गई 7 ईवी सरकारी कारें रखरखाव के अभाव में मप्र ऊर्जा विकास निगम के दफ्तर परिसर में जंग खा रही हैं।  इन वाहनों को राज्य में ई-वाहनों को बढ़ावा देने और सरकारी उपयोग में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से खरीदा गया था लेकिन एक से डेढ़ साल तक ही इनका उपयोग किया गया।

टाटा की ई-सीरीज कारें खरीदी

जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार की एजेंसी एनर्जी एफिशिएंसी सर्विस लिमिटेड (ईईएसएल) के सहयोग से वर्ष 2017-18 के आसपास निगम ने टाटा से इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रयोग के तहत ये कारें खरीदी थीं। उस समय एक कार की कीमत करीब 11 लाख रुपए थी। देश में तब इलेक्ट्रिक कारों का बाजार बेहद सीमित था और टाटा की ई-सीरीज कारें सरकारी संस्थानों में उपयोग के लिए ली जा रही थीं।

सीएम, सीएस और पीएस को भेजी गई थीं ये कारें

सूत्रों के मुताबिक, एक कार तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के उपयोग के लिए, दूसरी तत्कालीन मुख्य सचिव बीपी सिंह और तीसरी तत्कालीन पीएस मनु श्रीवास्तव के पास भेजी गई थी। बताया जाता है कि तत्कालीन मुख्य सचिव ने कुछ ही दिनों में कार वापस लौटा दी थी। इसके बाद धीरे-धीरे सभी वाहन वापस निगम के पास आ गए।

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मेंटेनेंस और बैटरी बनी सबसे बड़ी समस्या

इन कारों का रखरखाव काफी महंगा साबित हुआ। सबसे बड़ी परेशानी बैटरी और तकनीकी खराबियों की रही। बताया जाता है कि एक बैटरी बदलने का खर्च ही चार से पांच लाख रुपए तक पहुंच रहा था। उस समय ईवी में इतनी अच्छी तकनीक नहीं थी जिससे कारों में बैटरी की उम्र सीमित थी और चार्जिंग सुविधाएं भी पर्याप्त नहीं थीं। कई मामलों में बैटरी की कीमत वाहन के मौजूदा मूल्य के बराबर पहुंच गई। धीरे-धीरे सभी कारों में बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम से जुड़ी दिक्कतें आने लगीं। स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता भी मुश्किल हो गई। ऐसे में वाहनों को चलाने के बजाय परिसर में खड़ा कर दिया गया।

सरकार की नई ईवी नीति पर भी उठे सवाल

दिलचस्प पहलू यह है कि एक ओर सरकार नई ईवी नीति और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर शुरूआती प्रयोग के तौर पर खरीदी गई सरकारी ईवी कारें रखरखाव के अभाव में बेकार पड़ी हैं। भोपाल में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग स्टेशन, सर्विस नेटवर्क और तकनीकी सपोर्ट अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

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पुरानी ईवी मेंटेनेंस से बाहर हो चुकी हैं

आठ साल पहले खरीदी गई ईवी मेंटेनेंस के बाहर हो चुकी है। इन ईवी कारों को रिप्लेसमेंट किया जाना है। इसके लिए उनसे कोटेशन मांगा जाएगा। कोटेशन मिलते ही उन्हें रिप्लेस किया जाएगा।

अमनवीर सिंह बैंस, एमडी, मप्र ऊर्जा विकास निगम

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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