किंडर जॉय के लिए जिद : घर से दो हजार रुपए लेकर निकला बच्चा, पहले झांसी घूमा फिर पहुंचा भोपाल

पल्लवी वाघेला, भोपाल। अपनी मनपसंद चीज न मिलने पर बच्चे घर से चोरी कर, घर छोड़ने का कदम भी उठा सकते हैं। ऐसे ही एक मामले में लखनऊ क्षेत्र के संभ्रांत घर का बच्चा घर छोड़कर भोपाल तक आ पहुंचा। जब रेस्क्यू करने के बाद इसका कारण पूछा गया तो पता चला कि बच्चे ने किंडर जॉय खाने की जिद में ऐसा किया था। जब मां ने नहीं दिलवाई तो उसने मां के पर्स में रखे रुपए निकाले और घर से निकल गया।
मां मेडिकल फील्ड में पिता सरकारी कर्मचारी
इन रुपए से दस किंडर जॉय खरीदने के बाद बच्चा स्टेशन पहुंचा और बीच में घूमता-भटकता हुआ भोपाल आ पहुंचा, जहां उसे रेस्क्यू किया गया। जानकारी के अनुसार बच्चे की मां मेडिकल फील्ड में और पिता सरकारी विभाग में कार्यरत हैं। बच्चे को सौंप दिया गया है। बता दें, बीते साल भोपाल में ऐसे 89 बच्चों को रेस्क्यू किया गया जो अपनी जिद पूरी न होने के चलते घर छोड़कर निकल आए।
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दुकान से उधारी में लेकर खाता था किंडर जॉय
जानकारी के मुताबिक बच्चा बीते कुछ दिनों से लगातार किंडर जॉय खा रहा था। नहीं दिलाने पर घर के सामने मौजूद किराना दुकान से बच्चा उधार में ले आता था। इससे नाराज मां ने बच्चे को डांटा और दुकानदार से भी कहा कि बच्चे को उधार कोई सामान न दे। मां की यह सख्ती बच्चे को रास नहीं आई। जब माता-पिता काम पर निकले तो घर में मौजूद आया को चकमा देकर बच्चा निकल गया।
मां के पर्स पर थी नजर
इसके पहले ही उसने मां के घर पर रखे पर्स से दो हजार 170 रुपए निकाल लिए थे। अपने कोचिंग बैग में जरूरी सामान रखकर बच्चा घर से निकला और स्टेशन पहुंचने के पहले दस किंडर जॉय खरीदी। रेस्क्यू के वक्त इनमें से दो किंडर जॉय और 438 रुपए बच्चे के पास बचे थे। बच्चे ने कहा कि उसे पता था कि घर में खूब डांट पड़ेगी इसलिए उसने घर छोड़ने की ठान ली थी।
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झांसी के किले में रील्स और मूवी देखी
उसने झांसी के किले की रील्स और मूवी देखी थी। इसलिए उसने झांसी जाने का फैसला किया। बच्चे ने कहा कि ट्रेन की भीड़ में उससे कोई टिकट का नहीं पूछ पाता और बच्चों के लिए छिपना आसान हो जाता है इसलिए वह ट्रेन में बैठा। झांसी में उसने किला और एक पार्क और महालक्ष्मी का मंदिर घूमा। बच्चे ने कहा कि वह मॉल भी घूमना चाहता था लेकिन जब उसे आस-पास मॉल नहीं मिला तो उसने स्ट्रीट से सॉफ्टी और समोसा खा लिया।
भोपाल के बाद उज्जैन का प्लान
बच्चे ने कहा कि वह भोपाल में घूमने के बाद उज्जैन जाना चाहता था। उसने सोचा था कि वह उज्जैन में रहकर काम करेगा क्योंकि वहां मंदिर ज्यादा होने से उसे रहने और काम की दिक्कत नहीं होगी। बच्चे ने कहा कि एक बार मन में आया था कि घर लौट जाए, लेकिन डांट और मार के डर से उसने इरादा बदल दिया।
समझदारी से लें काम
जिद पूरी न होने पर घर बच्चों के घर छोड़ने के मामले नए नहीं है, लेकिन इतने छोटे बच्चों का इतनी दूर तक निकल आना चिंता का विषय है। बच्चे के साथ अनहोनी भी संभव थी। जरूरी है कि बच्चों को इस तरह के खतरों से अवेयर करें। साथ ही बच्चा यदि कोई गलती करता है तो इस बात को लेकर बच्चे को बार-बार परेशान न करें और स्थिति को प्यार से हैंडल करें।
दिव्या दुबे मिश्रा, काउंसलर












