मध्यप्रदेश में बदलेंगी गोशालाओं की तस्वीर, वेलनेस सेंटर और टूरिज्म हब के रूप में होंगी विकसित

मध्यप्रदेश की गो-शालाओं की तस्वीर अब पूरी तरह बदलने वाली है। इन्हें अब केवल पशु-आश्रय स्थल नहीं बल्कि आधुनिक वेलनेस सेंटर और आकर्षक टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाएगा।
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मध्यप्रदेश में बदलेंगी गोशालाओं की तस्वीर, वेलनेस सेंटर और टूरिज्म हब के रूप में होंगी विकसित

राजीव सोनी, भोपाल। मध्यप्रदेश में अब गो-शालाएं सिर्फ गोवंश के संरक्षण तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उन्हें वेलनेस सेंटर, पर्यटन और रोजगार के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। मोहन यादव सरकार ने गो-शालाओं की पारंपरिक पहचान बदलने के लिए मेगा प्रोजेक्ट की तैयारी शुरू कर दी है। इस योजना के तहत गो-शालाओं में वेलनेस सेंटर, योग और नेचुरोपैथी सुविधाएं, पशु अस्पताल, नस्ल सुधार केंद्र, बायो-सीएनजी प्लांट, सोलर एनर्जी और होम-स्टे जैसी गतिविधियां विकसित की जाएंगी। सरकार इस प्रोजेक्ट को पीपीपी मॉडल पर शुरू करने जा रही है। विभागीय स्तर पर शुरुआती टेंडर और प्रशासनिक प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। दावा किया जा रहा है कि यह देश में अपनी तरह का पहला बड़ा प्रोजेक्ट होगा।

दमोह में बनेगी 40 हजार गोवंश की विशाल गो-शाला

सूत्रों के मुताबिक सबसे पहले दमोह जिले में करीब 1000 बीघा जमीन पर 35 से 40 हजार गोवंश क्षमता वाली आधुनिक गो-शाला विकसित की जाएगी। इस परियोजना में देश की कई निजी कंपनियों ने रुचि दिखाई है। सरकार का मानना है कि इससे गोसंरक्षण के साथ हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा। दमोह के अलावा सागर, रीवा, जबलपुर, अशोकनगर और शिवपुरी सहित प्रदेश के 14 जिलों में भी इस तरह की परियोजनाओं के लिए जमीन चिन्हित की गई है।

गो-शालाओं में बनेंगे वेलनेस सेंटर और होम-स्टे

सरकार गो-शालाओं को पर्यटन से जोड़ने की तैयारी कर रही है। योजना के तहत यहां योग, पंचकर्म, नेचुरोपैथी और वेलनेस सेंटर विकसित किए जाएंगे। मॉडल को उत्तराखंड के पतंजलि संस्थान और बेंगलुरु के जिंदल नेचुरोपैथी सेंटर की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है। गो-शाला परिसर में पर्यटकों के लिए होम-स्टे और प्राकृतिक वातावरण में रहने की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का उद्देश्य देश-दुनिया के पर्यटकों को गोसेवा और भारतीय ग्रामीण संस्कृति से जोड़ना है।

गोबर से बनेगी बायो-सीएनजी और सोलर एनर्जी

हजारों गोवंश से निकलने वाले गोबर का उपयोग बायो-सीएनजी उत्पादन और सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट में किया जाएगा। इसके लिए गौ-पालन कंसोर्टियम बनाने की तैयारी की जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे गो-शालाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी।

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देसी नस्लों के संरक्षण पर फोकस

योजना के तहत गोवंश की नस्ल सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें मालवीय, निमाड़ी, गिर, साहीवाल और पारकर जैसी देसी दुधारू नस्लों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए हाईटेक पशु चिकित्सालय और आधुनिक ब्रीडिंग सेंटर भी विकसित किए जाएंगे।

मंत्री लखन पटेल बोले- एक साल में जमीन पर दिखेगा प्रोजेक्ट

पशुपालन एवं डेयरी विकास मंत्री लखन पटेल ने कहा कि यह सरकार का महत्वाकांक्षी और नया कॉन्सेप्ट है। योजना पर लंबे समय तक मंथन किया गया है और अगले एक साल में इसे जमीन पर उतारने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि परियोजना का संचालन निजी ऑपरेटर्स करेंगे जबकि सरकार निगरानी और सहयोग की भूमिका में रहेगी। मंत्री ने दावा किया कि आने वाले समय में प्रदेश की सड़कों पर आवारा गोवंश नजर नहीं आएगा।

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गो-शालाओं को पहले से मिल रहा अनुदान

 प्रदेश की पंजीकृत गो-शालाओं में गोवंश के भरण-पोषण और चारे-पानी के लिए सरकार पहले से प्रति गाय प्रतिदिन 40 रुपए का अनुदान देती है। अब नई परियोजना के जरिए गो-शालाओं को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

Sumit Shrivastava
By Sumit Shrivastava

मास कम्युनिकेशन में Ph.D और M.Phil पूर्ण की है तथा टीवी और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते ...Read More

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