नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए सीहोर में मदद की मुहिम, छोटी बच्ची ने सबसे पहले बढ़ाया हाथ

सीहोर। नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया है। इस मुश्किल घड़ी में पड़ोसी देश के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए सीहोर की सीवन पुत्र टीम ने अनोखी पहल की। सोमवार को टीम ने लिसा टॉकीज से कोतवाली चौराहा तक सहायता अभियान चलाया और लोगों से आर्थिक सहयोग की अपील की।
छोटी बच्ची ने की मदद की शुरुआत
अभियान के दौरान सबसे भावुक पल तब आया, जब एक छोटी बच्ची ने सबसे पहले सहायता पात्र में अपनी ओर से राशि डालकर सहयोग किया। बच्ची को देखकर आसपास मौजूद लोगों और दुकानदारों का भी हौसला बढ़ा। इसके बाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक कई लोगों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार आर्थिक मदद की। लोगों ने आगे आकर नेपाल के बाढ़ प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई।
‘मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं’
सीवन पुत्र प्रदीप चावड़ा ने कहा कि नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा को देखते हुए टीम ने यह अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक सहायता राशि जुटाकर बाढ़ प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है और संकट के समय जरूरतमंद लोगों के साथ खड़ा होना ही सच्ची सेवा है।
देशभक्ति गीतों के साथ चला सहायता अभियान
अभियान के दौरान लोगों में सेवा और देशभक्ति की भावना जगाने के लिए यूट्यूबर अशोक नामदेव ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी। गीतों के बीच सहायता अभियान भी जारी रहा। लोगों ने देशभक्ति गीतों का आनंद लेने के साथ नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए आर्थिक सहयोग भी दिया। इससे पूरे अभियान में सेवा और मानवीय संवेदना का माहौल नजर आया।
टीम के सदस्यों ने संभाली जिम्मेदारी
सहायता अभियान को सफल बनाने में सीवन पुत्र राम गोपाल आर्य, वीरेंद्र सिंह बिसौरिया, प्रदीप साबू, दिनेश कुमार, दिनकर, हरीश आर्य, देवेंद्र राय, सुनील शर्मा, सुरेश भगत, बाबू डागर, लक्ष्मण सिंह चौकसे, अशोक नामदेव, मुकेश राय, कैलाश चव्हाण, वैभव राठौर, कनीराम मालवीय, प्रकाश यादव, संतोष मेवाड़ा, मोहन लाल राय, बीएल बकोरिया, नितेश जायसवाल, राधेश्याम मकवाना, उमेश चावड़ा, देवेश सिसोदिया और विल्सन जैन सहित टीम के सदस्यों ने भूमिका निभाई।
‘छोटी मदद, बड़ी उम्मीद’
सीवन पुत्र टीम ने लोगों से अपील की कि नेपाल में आपदा से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दे। टीम का कहना है कि मदद की रकम भले ही छोटी हो, लेकिन मुश्किल समय में यही सहयोग किसी जरूरतमंद के लिए बड़ी उम्मीद बन सकता है। सीहोर में चले इस अभियान ने ‘इंसानियत की कोई सीमा नहीं होती’ का संदेश दिया।




















