सीहोर में सीवेज निर्माण से पोस्ट ऑफिस रोड बंद ,40 फीट चौड़ी सड़क पर पैदल निकलने तक की जगह नहीं

सीहोर। शहर के मंडी क्षेत्र में अमृत योजना के तहत चल रहा सीवेज निर्माण कार्य अब स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। करीब दो महीने से जारी निर्माण कार्य में ठेकेदार की कथित लापरवाही और मनमानी ने पूरे क्षेत्र की व्यवस्था बिगाड़कर रख दी है।
हालात इतने बदतर हो गए हैं कि अब 40 फीट चौड़े पोस्ट ऑफिस रोड को दोनों तरफ से खोदकर आवागमन पूरी तरह बाधित कर दिया गया है। लोगों के लिए पैदल निकलने तक की जगह नहीं छोड़ी गई। जिस क्षेत्र में पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं, दोनों ही रास्तों पर खुदाई कर दिए जाने से पोस्ट ऑफिस रोड का पूरा इलाका टापू बनकर रह गया है। त्योहार के समय इस अव्यवस्था ने लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
40 फीट चौड़ी सड़क पर पैदल निकलने की जगह नहीं
मंडी क्षेत्र के पोस्ट ऑफिस रोड पर इन दिनों सीवेज लाइन बिछाने का काम चल रहा है। निर्माण एजेंसी ने सड़क के दोनों तरफ खुदाई कर ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि आम नागरिकों के आवागमन का रास्ता ही बंद हो गया है।
हैरानी की बात यह है कि करीब 40 फीट चौड़ी सड़क पर पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी सुरक्षित रास्ता नहीं छोड़ा गया। निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था करना जरूरी है, लेकिन यहां लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।
दोनों रास्ते बंद, पूरा इलाका बना टापू
पोस्ट ऑफिस रोड तक पहुंचने का एक अन्य रास्ता जीन वाले कुएं के पास से है। लेकिन इस मार्ग पर भी सीवेज कंपनी ने खुदाई कर दी है। नतीजा यह है कि एक तरफ पोस्ट ऑफिस रोड बंद है तो दूसरी तरफ पहुंचने का वैकल्पिक रास्ता भी अवरुद्ध कर दिया गया है।
पिछले करीब एक सप्ताह से क्षेत्रवासी इसी परेशानी से जूझ रहे हैं। लोगों का सवाल है कि आखिर निर्माण एजेंसी ने एक साथ दोनों रास्ते बंद करने का फैसला किसकी अनुमति से लिया? क्या काम शुरू करने से पहले स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों की परेशानियों का आकलन तक नहीं किया गया?
गोदाम का कारोबार प्रभावित, व्यापारियों की बढ़ी मुश्किलें
स्थानीय नागरिक असलम खान ने बताया कि पोस्ट ऑफिस रोड पर उनका वरदाने का गोदाम है, जहां चार पहिया वाहनों का आना-जाना बेहद जरूरी है। लेकिन कंपनी ने चारों तरफ रास्ते बंद कर दिए हैं। ऐसे में माल की आवाजाही प्रभावित हो रही है और कारोबार करना मुश्किल हो गया है।
कुछ इसी प्रकार की परेशानी करना व्यावसायिक मनोज शर्मा ने बताई। निर्माण कार्य के नाम पर इस तरह रास्ते बंद कर देना व्यापारियों के लिए सीधा आर्थिक नुकसान खड़ा कर रहा है।
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दीपावली के समय जनता को परेशानी, जिम्मेदारों की व्यवस्था नदारद
स्थानीय नागरिक रामप्रकाश चौधरी, अरशद बेग, मनीष तिवारी, कैलाश राठौर, राजेश शर्मा सहित अन्य लोगों का कहना है कि दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर बाजारों में खरीदारी और आवागमन बढ़ जाता है। ऐसे समय में सड़क को पूरी तरह बंद कर देना जनता के साथ अन्याय है।
लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य से किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर लोगों को रास्तों में कैद कर देना कहां तक उचित है?
नगरपालिका अधिनियम और सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी पर सवाल
स्थानीय नागरिकों ने मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 का हवाला देते हुए सड़क पर निर्माण कार्य के दौरान यातायात और वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक और यातायात डायवर्जन की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी दुर्घटना की आशंका न रहे। लेकिन पोस्ट ऑफिस रोड पर इन व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सीएमओ ने जताई नाराजगी, ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मामले में नगर पालिका सीएमओ सुधीर कुमार सिंह ने भी लापरवाही से किए जा रहे कार्य पर नाराजगी जताई है। उन्होंने बताया कि पूरे सीहोर शहर के लिए लगभग 25 करोड़ रुपये का सीवरेज प्रोजेक्ट स्वीकृत है, जिसमें मंडी क्षेत्र का काम भी शामिल है। सीएमओ ने ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए मामले की जांच कर उचित व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया है।
जनता का सीधा सवाल, विकास के नाम पर रास्ते बंद करने की छूट किसने दी?
अब सवाल यह है कि जब निर्माण एजेंसी को पता है कि सड़क के दोनों तरफ खुदाई से पूरा क्षेत्र कट जाएगा, तो वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था पहले क्यों नहीं की गई? क्या ठेकेदार की जिम्मेदारी केवल पाइपलाइन डालकर आगे बढ़ जाना है?
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि तत्काल सुरक्षित आवागमन का रास्ता खोला जाए और निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से कराया जाए। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो उनका आक्रोश सड़क पर उतर सकता है। विकास कार्य के नाम पर जनता को परेशान करने की इस कार्यप्रणाली पर अब जिम्मेदारों को जवाब देना होगा।




















