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प्रतिबंध के बाद भी बन रहा था एनालॉग पनीर, रुद्रांश डेयरी पर फिर छापा; 25 क्विंटल पनीर जब्त, जांच पर उठे सवाल

सीहोर के पचामा स्थित रुद्रांश डेयरी पर खाद्य सुरक्षा विभाग ने देर रात छापा मारकर करीब 25 क्विंटल संदिग्ध एनालॉग पनीर जब्त किया। एक सप्ताह में यह दूसरी कार्रवाई है।
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प्रतिबंध के बाद भी बन रहा था एनालॉग पनीर, रुद्रांश डेयरी पर फिर छापा; 25 क्विंटल पनीर जब्त, जांच पर उठे सवाल
सीहोर। प्रतिबंध के बावजूद एनालॉग पनीर बनाने पर रुद्रांश डेयरी पर छापे की कार्रवाई की गई।

सीहोर। प्रतिबंध के बावजूद एनालॉग पनीर के निर्माण का मामला एक बार फिर सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग ने पचामा गांव स्थित रुद्रांश डेयरी पर देर रात छापामार कार्रवाई की। भोपाल संभागीय उड़नदस्ता और सीहोर खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने फैक्ट्री से करीब 25 क्विंटल पनीर जब्त कर सील किया है। खास बात यह है कि इसी फैक्ट्री पर करीब एक सप्ताह पहले भी कार्रवाई कर 2 क्विंटल से अधिक संदिग्ध एनालॉग पनीर जब्त किया गया था। इसके बावजूद दोबारा बड़ी मात्रा में माल मिलने से कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गोपनीय शिकायत पर रात में पहुंची टीम

खाद्य सुरक्षा आयुक्त को सीहोर के पचामा औद्योगिक क्षेत्र में नकली अथवा एनालॉग पनीर बनाए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद भोपाल संभागीय उड़नदस्ता प्रभारी पंकज श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने फैक्ट्री में औचक निरीक्षण किया। देर रात हुई कार्रवाई में टीम ने परिसर की जांच की और बड़ी मात्रा में तैयार पनीर को अपने कब्जे में लिया।

25 क्विंटल माल सील, सैंपलिंग भी

उड़नदस्ता प्रभारी के अनुसार फैक्ट्री में नमक और शक्कर की मौजूदगी मिली। मौके पर वनस्पति तेल नहीं मिला, लेकिन पनीर के एनालॉग होने की आशंका और उचित लेबलिंग नहीं होने के कारण करीब 25 क्विंटल पनीर जब्त किया गया। अधिकारियों ने माल को सील कर उसके नमूने जांच के लिए लिए हैं। अब प्रयोगशाला रिपोर्ट से इसकी वास्तविक गुणवत्ता और प्रकृति स्पष्ट होगी।

पैकेट पर कंपनी और उत्पाद का नाम तक नहीं

जांच के दौरान पैकेटों की लेबलिंग में भी गंभीर खामियां सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार पैकेट पर कंपनी और उत्पाद का नाम निर्धारित तरीके से दर्ज नहीं था। खाद्य उत्पाद की पैकेजिंग और लेबलिंग में इस तरह की कमियां उपभोक्ताओं को उत्पाद की वास्तविक पहचान और गुणवत्ता की जानकारी से वंचित कर सकती हैं।

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एक सप्ताह में दूसरी बार उसी फैक्ट्री पर कार्रवाई

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही फैक्ट्री पर एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार कार्रवाई क्यों करनी पड़ी? पहली कार्रवाई में भी प्रतिबंधित एनालॉग पनीर पकड़ा गया था। इसके बाद भी इसी परिसर में 25 क्विंटल माल मिलना विभागीय निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है। क्या पहली कार्रवाई के बाद फैक्ट्री की लगातार निगरानी हुई थी? क्या उत्पादन पूरी तरह बंद कराया गया था? इन सवालों के जवाब कार्रवाई की अगली कड़ी में महत्वपूर्ण होंगे।

जिले में दो दर्जन से अधिक फैक्ट्रियां, जांच को लेकर सवाल

सीहोर जिले में करीब दो दर्जन से अधिक पनीर फैक्ट्रियां संचालित होने की बात सामने आ रही है। ऐसे में एक ही फैक्ट्री पर लगातार कार्रवाई और अन्य इकाइयों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया द्वारा जब अधिकारियों से पूछा गया कि रुद्रांश फैक्ट्री के अलावा अन्य किन पनीर फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की गई है, तो अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी। अब यह मामला इसलिए भी चर्चा में है कि विभाग सभी पनीर निर्माण इकाइयों की समान रूप से जांच करता है या नहीं।

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फैक्ट्री संचालक ने आरोपों से अलग रखा अपना पक्ष

रुद्रांश डेयरी संचालक नीलेश राठौर ने बताया कि फैक्ट्री के पास पहले एनालॉग पनीर निर्माण का वैध लाइसेंस था, लेकिन 12 अगस्त को मुख्यमंत्री के निर्देश और खाद्य विभाग की समझाइश के बाद इसका निर्माण पूरी तरह बंद कर दिया गया। उनके अनुसार पहले लिए गए नमूनों को नियमानुसार कोल्ड स्टोरेज में रखा गया था। वर्तमान में फैक्ट्री में केवल लो-फैट और मीडियम-फैट पनीर तैयार किया जा रहा है, जिसके नमूने भोपाल की टीम ने लिए हैं।

नमक-शक्कर का इस्तेमाल दूसरे डेयरी उत्पादों में: संचालक

संचालक ने परिसर में मिले नमक और शक्कर को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि इनका उपयोग दही, लस्सी और छाछ जैसे अन्य दुग्ध उत्पाद तैयार करने में किया जाता है। यानी फैक्ट्री प्रबंधन ने एनालॉग पनीर बनाए जाने के आरोप से इनकार करते हुए जब्त माल को लेकर जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कही है।

खाद्य विभाग ने कहा- पूरे जिले में हो रही सैंपलिंग

खाद्य सुरक्षा अधिकारी एडलीन पन्ना के अनुसार सीहोर, आष्टा सहित जिले की विभिन्न तहसीलों में लगातार निरीक्षण और सैंपलिंग की कार्रवाई चल रही है। उनके अनुसार शुद्धम, हंबल काउ, न्यू सुपर और पवनश्री फूड्स सहित अन्य डेरियों और संस्थानों से भी नमूने लिए गए हैं। सभी नमूनों को राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजा गया है और रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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प्रतिबंध के बाद कारोबार जारी रहा तो मामला गंभीर

प्रदेश में एनालॉग पनीर के निर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध के बाद भी यदि किसी इकाई में इसका उत्पादन या भंडारण पाया जाता है तो मामला केवल खाद्य गुणवत्ता का नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और नियमों के पालन से भी जुड़ जाता है। फिलहाल रुद्रांश डेयरी से जब्त 25 क्विंटल पनीर की जांच रिपोर्ट पर निगाहें हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ होगा कि जब्त माल वास्तव में प्रतिबंधित एनालॉग पनीर है या नहीं और फैक्ट्री के खिलाफ आगे किस स्तर की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

अब सवाल सिर्फ रुद्रांश का नहीं, पूरे जिले की निगरानी का

एक सप्ताह में दूसरी बार बड़ी मात्रा में संदिग्ध पनीर मिलने के बाद अब निगाहें खाद्य सुरक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं। यदि जिले में अन्य पनीर फैक्ट्रियां भी संचालित हैं तो उनकी जांच, सैंपलिंग और रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से सामने आने से ही यह स्पष्ट होगा कि कार्रवाई समान रूप से हो रही है या नहीं। 25 क्विंटल की जब्ती के बाद अब असली सवाल यही है-क्या जांच सिर्फ एक फैक्ट्री तक सीमित रहेगी या पूरे जिले की पनीर फैक्ट्रियों पर शिकंजा कसेगा?

Sunil Sharma
By Sunil Sharma

सुनील शर्मा, सीहोर जिला ब्यूरो, पीपुल्स समाचार ढाई दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। दैनिक भास्कर, पत्रि...Read More

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