सीहोर:कोर्ट ने सुनाई सख्त सजा, 2 साल पहले डण्डों से हत्या करने वाले तीन सगे भाइयों को उम्रकैद

सीहोर। दो साल पुराने जिले के चर्चित मुंजखेड़ा हत्याकांड में प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश स्मृता सिंह ठाकुर की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया है। न्यायालय ने जयप्रकाश अहिरवार, सत्यनारायण अहिरवार और प्रमोद अहिरवार को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही अन्य धाराओं में भी कठोर कारावास और कुल 7,500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया। शासन की ओर से मामले की पैरवी अपर लोक अभियोजक शहाना रईस खान ने की।
खेत पर काम के दौरान शुरू हुआ था विवाद
अभियोजन के अनुसार घटना 2 जून 2024 की रात करीब 8:30 बजे ग्राम मुंजखेड़ा में हुई थी। फरियादी राकेश अपने पिता पर्वत सिंह के साथ खेत पर घर का कार्य करवा रहा था। इसी दौरान गांव का जयप्रकाश अहिरवार पिता वहां पहुंचा और काम करने के तरीके को लेकर विवाद करने लगा। विरोध करने पर उसने गाली-गलौज शुरू कर दी और राकेश के साथ मारपीट करने लगा।
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तीनों भाइयों ने डण्डों से किया हमला
कुछ ही देर बाद जयप्रकाश अपने भाइयों सत्यनारायण और प्रमोद के साथ मौके पर लौटा। तीनों के हाथों में डण्डे थे। अभियोजन के अनुसार सत्यनारायण ने राकेश के सिर और हाथ पर डण्डे से वार किया, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आई और खून बहने लगा। बीच-बचाव करने पहुंचे पिता पर्वत सिंह पर भी प्रमोद ने डण्डे से हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। घटना के प्रत्यक्षदर्शी दीपक मालवीय और गौरव ने भी पूरी वारदात देखी। जाते समय आरोपियों ने पूरे परिवार को जान से खत्म करने की धमकी भी दी।
साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्ध
पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने घटना का समर्थन किया। अभियोजन ने दस्तावेजी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए, जिन्हें न्यायालय ने विश्वसनीय मानते हुए तीनों आरोपियों को दोषी ठहराया।
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हत्या सहित अन्य धाराओं में भी सजा
न्यायालय ने तीनों आरोपियों को धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 506 भाग-दो के तहत दो-दो वर्ष का कठोर कारावास तथा धारा 323/34 के तहत एक-एक वर्ष का कठोर कारावास भी दिया। साथ ही तीनों पर कुल 7,500 रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
Edited By: Sumit Shrivastava












