सीहोर: हनुमान मंदिर के शिखर पर गिरी आसमानी बिजली, बजरंगबली की कृपा से दर्जनों भक्त बाल-बाल बचे
सीहोर। बुधनी तहसील के ग्राम जलाखेड़ा में रविवार रात एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने ग्रामीणों को कुछ पल के लिए दहला दिया और बाद में वही घटना उनके लिए आस्था का विषय बन गई। ग्राम पंचायत होलीपुरा के इस गांव में गणेश आरती की तैयारियां चल रही थीं। हनुमान मंदिर परिसर में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और अन्य ग्रामीण मौजूद थे। इसी दौरान मौसम अचानक बदला और तेज गर्जना के साथ आसमानी बिजली मंदिर के नवनिर्मित शिखर से जा टकराई। बिजली गिरने से शिखर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन मंदिर परिसर में मौजूद किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई। जनहानि नहीं होने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और इसे संकटमोचन हनुमान जी की कृपा से जोड़कर देखा।
आरती की तैयारी के बीच बदला मौसम
गांव के हनुमान मंदिर परिसर में गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। रविवार रात यहां आरती की तैयारियां चल रही थीं। प्रतिदिन की तरह ग्रामीण धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए मंदिर पहुंच रहे थे। महिलाएं और बच्चे भी बड़ी संख्या में मौजूद थे। इसी बीच आसमान पर बादल छाने लगे और मौसम अचानक बदल गया।
तेज हवा और बारिश के बीच गूंजी गर्जना
मौसम खराब होने के साथ हल्की बारिश और तेज हवाएं चलने लगीं। ग्रामीणों के मुताबिक इसी दौरान अचानक आसमान में जोरदार बिजली चमकी और कड़कड़ाती आवाज के साथ वज्रपात हुआ। बिजली सीधे मंदिर के शिखर पर जा गिरी। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि मंदिर परिसर और आसपास मौजूद लोग घबरा गए।
कुछ पल के लिए थम गईं सांसें
बिजली गिरने के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। बच्चे सहम गए और महिलाएं भी घबरा गईं। लोगों ने तत्काल एक-दूसरे को संभाला और यह देखने लगे कि कहीं कोई घायल तो नहीं हुआ। जब सभी लोग सुरक्षित मिले तो ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। हादसे की गंभीरता को देखते हुए जनहानि नहीं होना गांव के लिए सबसे बड़ी राहत रही।
सोमवार को सामने आई नुकसान की तस्वीर
घटना के बाद सोमवार को ग्रामीण जब मंदिर पहुंचे तो शिखर का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त मिला। नवनिर्मित शिखर पर बिजली गिरने के निशान और टूटे हिस्से देखकर ग्रामीणों को रात में हुए वज्रपात की तीव्रता का अंदाजा हुआ। बताया जा रहा है कि मंदिर का निर्माण कार्य अभी चल रहा है और शिखर का निर्माण हाल ही में कराया गया था।
मंदिर को नुकसान, लेकिन भक्त पूरी तरह सुरक्षित
ग्रामीणों के लिए सबसे भावुक करने वाली बात यह रही कि बिजली का प्रहार मंदिर के शिखर पर हुआ, लेकिन परिसर में मौजूद लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। जिस समय घटना हुई, उस समय मंदिर में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग मौजूद थे। ग्रामीण इसी बात को भगवान हनुमान की कृपा से जोड़ रहे हैं।
रूपसिंह बोले- यह बजरंगबली का आशीर्वाद
ग्रामवासी रूपसिंह ने घटना पर कहा कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद किसी ग्रामीण को खरोंच तक नहीं आई। उनका कहना है कि मंदिर में भगवान हनुमान की मौजूदगी और उनकी कृपा से बड़ा संकट टल गया। ग्रामीणों के बीच यह घटना अब केवल नुकसान की वजह से नहीं, बल्कि भगवान के प्रति उनके विश्वास से जुड़ी घटना के रूप में चर्चा में है।
गांव में गूंजा 'जाको राखे साइयां
वज्रपात के बाद ग्रामीणों के बीच 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय' की कहावत भी चर्चा में रही। लोगों का कहना है कि मंदिर के शिखर को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी भक्त का बाल भी बांका नहीं हुआ। यही वजह है कि भयावह घटना के बावजूद गांव में भगवान हनुमान के प्रति श्रद्धा और विश्वास और गहरा दिखाई दे रहा है।
क्षतिग्रस्त शिखर को देखकर भावुक हुए ग्रामीण
सोमवार को मंदिर का क्षतिग्रस्त हिस्सा देखने पहुंचे ग्रामीणों के बीच एक तरफ शिखर के नुकसान को लेकर चिंता थी, तो दूसरी तरफ किसी तरह की जनहानि नहीं होने की राहत भी थी। ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर का निर्माण दोबारा कराया जा सकता है, लेकिन लोगों की जिंदगी सबसे महत्वपूर्ण है। उनके लिए यह राहत भगवान की कृपा के रूप में सामने आई है।
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सरपंच ने प्रशासन को दी सूचना
घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम पंचायत सरपंच कमल सिंह ने तहसील कार्यालय को सूचना दी। प्रशासन ने भी तत्काल मामले का संज्ञान लिया। तहसीलदार राकेश खजूरिया ने क्षेत्रीय पटवारी को मौके पर जाकर निरीक्षण करने और वज्रपात से हुए नुकसान का आकलन करने के निर्देश दिए हैं।
पटवारी की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई
प्रशासनिक अमला मंदिर पहुंचकर क्षतिग्रस्त शिखर और अन्य संभावित नुकसान का मुआयना करेगा। नुकसान की स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल ग्रामीणों का ध्यान मंदिर के क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने और शिखर के पुनर्निर्माण की ओर है।
नुकसान की तस्वीर के बीच आस्था की बड़ी कहानी
जलाखेड़ा की यह घटना अपने पीछे एक अलग ही भाव छोड़ गई है। आसमानी बिजली ने मंदिर के शिखर को जरूर नुकसान पहुंचाया, लेकिन उसी समय मंदिर परिसर में मौजूद दर्जनों लोगों का सुरक्षित बचना ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ा संदेश बन गया। शिखर के टूटने का दर्द अपनी जगह है, लेकिन भक्तों के सुरक्षित रहने की खुशी उससे कहीं बड़ी है। यही कारण है कि जलाखेड़ा में अब इस घटना को “संकटमोचन की कृपा से टला संकट” कहकर याद किया जा रहा है।






















