सीहोर : तीन मौत, दो किसानों के कटे हाथ... अब बिजली विभाग के खिलाफ सड़क से सदन तक आर-पार की लड़ाई

सीहोर। ग्राम बडवेली में खेत के ऊपर झूल रही 11 केवी विद्युत लाइन से हुए हादसे ने अब प्रशासन और बिजली विभाग के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। गंभीर रूप से घायल किसान सतीश मेवाड़ा का हाथ काटना पड़ने के बाद किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता गया और आंदोलन अब जिला मुख्यालय से निकलकर राजधानी भोपाल तक पहुंच चुका है। मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग के हस्तक्षेप के बाद पूरे मामले ने हाई-प्रोफाइल रूप ले लिया है। किसान साफ कह रहे हैं कि 25 लाख रुपये का मुआवजा, सरकारी नौकरी और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होने तक आंदोलन किसी भी कीमत पर नहीं रुकेगा।
बडवेली हादसे ने भड़काया किसानों का गुस्सा
किसानों का आरोप है कि बडवेली क्षेत्र में वर्षों से खेतों के ऊपर 11 केवी लाइन के तार झूल रहे हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद बिजली विभाग ने इन्हें दुरुस्त नहीं कराया। इसी लापरवाही के कारण किसान सतीश मेवाड़ा गंभीर हादसे का शिकार हुए और उनका हाथ काटना पड़ा। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में विभाग के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी है।
पांच हादसों का दावा, तीन मौत और दो किसानों के हाथ कटे
आंदोलन कर रहे किसानों का दावा है कि इसी क्षेत्र में अब तक पांच किसान करंट की चपेट में आ चुके हैं। इनमें तीन किसानों की मौत हो चुकी है, जबकि दो किसानों को अपने हाथ गंवाने पड़े। किसानों का आरोप है कि हर घटना के बाद विभाग ने केवल औपचारिक कार्रवाई की और सुरक्षा व्यवस्था सुधारने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
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एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में आंदोलन हुआ तेज
समाजसेवी एवं किसान नेता एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में लगातार धरना-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि किसानों ने दो बार कलेक्टर कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय और अधीक्षण यंत्री कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपे, लेकिन कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया। इसके बाद आंदोलन का दायरा लगातार बढ़ता गया।
भोपाल में ऊर्जा मंत्री और एमडी कार्यालय का घेराव
जब जिला स्तर पर समाधान नहीं मिला तो सैकड़ों किसान भोपाल पहुंचे। मुख्यमंत्री निवास में शिकायत दर्ज कराने के बाद ऊर्जा मंत्री के बंगले का घेराव किया गया। किसानों का दावा है कि ऊर्जा मंत्री ने बिजली कंपनी के प्रबंध संचालक को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन विभागीय स्तर पर अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इसके बाद गोविंदपुरा स्थित एमडी कार्यालय का भी घेराव कर विरोध दर्ज कराया गया।
जांच रिपोर्ट में लापरवाही का दावा
किसानों का कहना है कि मीडिया में मामला प्रमुखता से आने के बाद विद्युत निरीक्षक द्वारा जांच कराई गई। जांच में बिजोरी वितरण केंद्र, खजूरी कला सहित संबंधित अधिकारियों की लापरवाही सामने आने तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि अब तक किसी अधिकारी पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होने से किसानों का आक्रोश और बढ़ गया है।
मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग हुए सक्रिय
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग ने समाचारों का संज्ञान लेते हुए बिजली कंपनी के प्रबंध संचालक से 31 जुलाई तक विस्तृत जांच प्रतिवेदन तलब किया। वहीं मध्यप्रदेश महिला आयोग ने भी राजस्व आयुक्त को निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई तथा पीड़ित को न्याय दिलाने के निर्देश दिए हैं। आयोगों की सक्रियता के बाद प्रशासन और बिजली विभाग में हलचल तेज हो गई है।
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किसानों की चेतावनी, अब विधानसभा और संसद तक पहुंचेगा मामला
किसानों ने दो टूक कहा है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी बनाया जाएगा। सीहोर, भोपाल, शाजापुर और उज्जैन सहित कई जिलों के किसानों को जोड़कर राजधानी में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही सांसदों और विधायकों से इस मुद्दे को विधानसभा और संसद में उठाने की मांग की गई है। किसानों का कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही से लगातार जान-माल का नुकसान हो रहा है, इसलिए अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय चाहिए।












