छिंदवाड़ा-नागपुर हाईवे पर हो रहे हादसे, करोड़ों रुपए खर्च; लाइटें शोपीस बनीं

छिंदवाड़ा। केंद्र सरकार जहां नेशनल हाईवे को विकास की रफ्तार बता रही है, वहीं सौंसर से गुजरने वाला नागपुर-छिंदवाड़ा नेशनल हाईवे-547 विनाश की कहानी बयां कर रहा है। खुटाम्बा मोड़ पर 10 से 15 फीट तक सड़क उखड़ चुकी है और गहरे गड्ढों में दोपहिया वाहनों के पहिए फंस रहे हैं। रामाकोना में सड़क पर जमा मिट्टी और कूड़ा बारिश के बाद फिसलन पैदा कर रहा है, जबकि टूटी रेलिंग और 4-5 फीट ऊंची झाड़ियों से विजिबिलिटी भी कम हो गई है। वहीं लाखों-करोड़ों की लागत से लगाई गई सोलर लाइटें भी शाम को आधा घंटा टिमटिमाने के बाद पूरी रात बंद रहती हैं और हाईवे पर लगातार बढ़ रहा भारी यातायात खतरे को और बढ़ा रहा है।
खुटाम्बा मोड़ पर आए दिन हो रहे हादसे
ग्राम खुटाम्बा के पास टर्निंग पॉइंट है। यहीं पर सड़क 10 से 15 फीट तक उखड़ चुकी है। गड्ढे इतने गहरे हैं कि दोपहिया वाहन का पूरा पहिया उसमें समा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार शाम ढलते ही यहां रोज कोई न कोई हादसे का शिकार हो जाता है। हवा पंचर बनाने वाले सूरज गुर्वे ने बताया कि मैं पिछले 20 दिनों में 8 से 10 गाड़ियों के पहिए और रिंग सुधार चुका हूं। सभी एक ही जगह, खुटाम्बा मोड़ के गड्ढे में टूटे थे। प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है।
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रामाकोना डिवाइडर पर कचरा और मिट्टी हुई जमा
रामाकोना डिवाइडर के दोनों तरफ जमी हुई मिट्टी और कचरा लंबे अरसे से नहीं हटाया गया। बारिश में यही मिट्टी बहकर हाईवे पर आ जाती है। इससे सड़क पर चिकनी फिसलन बन जाती है। दोपहिया वाहन चालक ब्रेक लगाते ही फिसलकर गिर रहे हैं। स्कूली बच्चों और नेशनल हाईवे से गुजरने वालों के लिए यह मार्ग सबसे खतरनाक साबित हो रहा है।
टूटी रेलिंग और झाड़ियों से जीरो विजिबिलिटी
हाईवे के डिवाइडर की रेलिंग कई जगह से टूटी हुई है और सड़क की तरफ झुकी हुई है। रात में तेज रफ्तार वाहन इससे टकरा सकते हैं। वहीं डिवाइडर और सड़क किनारे 4-5 फीट ऊंची झाड़ियां उग आई हैं, जिससे सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते हैं। ऐसे में रात के समय हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों के लिए खतरा और बढ़ गया है।
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लाखों की लाइटें बनीं शोपीस
सबसे बड़ा सवाल सोलर लाइटों पर है। हाईवे के डिवाइडर पर सैकड़ों से अधिक सोलर लाइटें लगाई गई थीं। दावा था कि रात भर हाईवे लाइट की रोशनी से रोशन रहेगा। लेकिन हकीकत में ये लाइटें शाम को आधा घंटा टिमटिमाती हैं और फिर पूरी रात बंद रहती हैं। इस समय कई सोलर लाइट तो बंद भी पड़े हैं। करोड़ों की लागत से लगे ये सोलर लाइट अब सिर्फ शोपीस बने हुए है। जनता पूछ रही है कि क्या घटिया लाइटें लगाकर शासन के पैसे का बंदरबांट किया गया है? वहीं इस हाईवे पर अब देखने को यह मिल रहा है कि यहां पर ट्रैफिक तेजी से बढ़ गया है। लगातार एक के पीछे एक वाहन दौड़ते नजर आते हैं। जानकार बताते हैं कि ऐसा ट्रैफिक पहले कभी नहीं देखा है। दिन-रात यहां वाहनों का आना-जाना पहले से डबल हो गया है।





















