सीहोर कॉलेज में महाघोटाले का पर्दाफाश, NSUI का आमरण अनशन, बोले-'छात्रों की फीस पर डकैती अब बर्दाश्त नहीं'

सीहोर। कॉलेज में छात्रों के हक पर डकैती डालने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सीहोर में जनभागीदारी समिति के नाम पर बैकडोर से की गई फर्जी और नियमविरुद्ध नियुक्तियों को लेकर भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ दी है। जिले के अग्रणी महाविद्यालय में दो साल से दबाए बैठे इस कथित महाघोटाले की फाइलें अब सड़कों पर खुल चुकी हैं। सोमवार को NSUI जिलाध्यक्ष हरिओम सिसोदिया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कॉलेज परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरना और भूख हड़ताल शुरू कर दी।
सबूतों के साथ सड़क पर जंग: छात्रों के खून-पसीने की कमाई पर डाका
धरना स्थल से सीधे प्रशासनिक गलियारों को ललकारते हुए NSUI जिलाध्यक्ष हरिओम सिसोदिया ने खुला आरोप लगाया कि जनभागीदारी मद के तहत बीते दो वर्षों से मनमाने तरीके से बंदरबांट जारी है। उन्होंने दस्तावेजों का हवाला देते हुए खुलासा किया कि बिना कोई आधिकारिक विज्ञप्ति या विज्ञापन जारी किए, नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को कुर्सियां बांटी गईं। सिसोदिया ने कहा कि जनभागीदारी का पैसा सरकार या शासन का नहीं, बल्कि गरीब छात्रों द्वारा भरी गई गाढ़ी कमाई की फीस का फंड होता है। इस फंड से अपात्र और अयोग्य लोगों को 50-50 हजार रुपए की मोटी पगारें बांटकर छात्रों के भविष्य और उनकी गाढ़ी कमाई पर सरेआम डाका डाला जा रहा है, जिसे अब किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
खुली चुनौती- 'एक क्लास ली हो तो चरण वंदना करेंगे'
विरोध प्रदर्शन में छात्र नेताओं का गुस्सा चरम पर दिखा। कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए एनएसयूआई ने एक शिक्षक विशेष की नियुक्ति को लेकर खुली चुनौती दी। छात्र नेताओं ने कहा कि मनोज शर्मा नामक व्यक्ति को पिछले दो साल से कॉलेज में बिठाकर हर माह 50 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा है, जबकि उनके पास संबंधित विषय की जरूरी योग्यता तक नहीं है। जिलाध्यक्ष ने सीधे अल्टीमेटम दिया कि यदि उक्त व्यक्ति ने पिछले एक पूरे साल के भीतर एक भी क्लास ली हो, तो एनएसयूआई अपना आंदोलन खत्म कर सार्वजनिक तौर पर उनकी चरण वंदना करेगी। यह बयान प्रशासनिक गलियारों में भ्रष्टाचार की सीधी पोल खोल रहा है।
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कलेक्टर टेबल पर आएं, दूध का दूध और पानी का पानी होगा
एनएसयूआई ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन महज कागजी विरोध नहीं, बल्कि आर-पार की निर्णायक लड़ाई है। छात्र नेतृत्व ने कहा कि जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष स्वयं जिला कलेक्टर हैं, इसलिए प्रशासन आंख मूंदकर नहीं बैठ सकता। उन्होंने कलेक्टर को धरना स्थल पर आकर सबूतों की जांच करने की चुनौती दी। छात्र नेताओं ने ऐलान किया कि यदि वे सबूतों के साथ इस महाघोटाले को साबित न कर सके, तो वे तुरंत धरना वापस ले लेंगे। लेकिन अगर गड़बड़ी पाई गई, तो छात्रों के हक पर कुंडली मारकर बैठे भ्रष्टाचारियों और अपात्रों की बर्खास्तगी तक यह आमरण अनशन जारी रहेगा।
कांग्रेस का खुला समर्थन, प्रशासन के फूले हाथ-पांव
छात्रों के इस आक्रामक तेवर को देखते हुए राजनीतिक समर्थन भी खुलकर सामने आ गया है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गुजराती और शहर कांग्रेस अध्यक्ष घनश्याम यादव सहित कई वरिष्ठ कांग्रेसियों ने धरना स्थल पर पहुंचकर इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह केवल कॉलेज का मामला नहीं, बल्कि शिक्षित बेरोजगार युवाओं के अधिकारों का खुला हनन है। भारी संख्या में छात्रों और विपक्षी नेताओं की मौजूदगी के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। एनएसयूआई ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही संदिग्ध नियुक्तियों को निरस्त कर निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की गई, तो यह चिंगारी पूरे जिले में बड़े जनांदोलन का रूप ले लेगी।
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