मजे के लिए शुरू की दौड़, अब एशियाड में इतिहास रचा! सावन बरवाल ने 44 साल बाद दिलाया मैराथन सिल्वर

एशियन गेम्स। एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए दिन की शुरुआत शानदार रही। पुरुषों की मैराथन में भारतीय सेना के सावन बरवाल ने सिल्वर मेडल अपने नाम किया। सावन ने 42 किलोमीटर की रेस 2 घंटे 11 मिनट 36 सेकेंड में पूरी की। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने अपना ही नेशनल रिकॉर्ड सुधार दिया। खास बात यह है कि एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत को 44 साल बाद पदक मिला है। सावन लंबे समय तक रेस में आगे चल रहे थे, लेकिन आखिरी दौर में जापान के धावक ने बढ़त बना ली। इसके बावजूद भारतीय एथलीट ने शानदार वापसी की।
44 साल बाद मैराथन में भारत का पदक
सावन बरवाल ने सिल्वर जीतकर एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत के लंबे इंतजार को खत्म कर दिया। इससे पहले भारत को इस स्पर्धा में आखिरी पदक 1982 के नई दिल्ली एशियाड में मिला था। अब सावन ने रजत जीतकर भारतीय मैराथन इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
अपना ही नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा
सावन का प्रदर्शन सिर्फ मेडल तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2:11:36 के समय के साथ अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया। अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में उन्होंने 2:12:38 का रिकॉर्ड बनाया था और 48 साल पुराने शिवनाथ सिंह के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। अब कुछ महीनों के भीतर उन्होंने अपनी टाइमिंग में फिर सुधार किया है।
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गोल्ड से थोड़ा दूर रह गए सावन
रेस के शुरुआती और मध्य हिस्से में सावन ने मजबूत प्रदर्शन किया और लंबे समय तक आगे बने रहे। आखिरी कुछ किलोमीटर में जापान के इचिटाका यामाशिता ने बढ़त बना ली। यामाशिता ने 2:10:51 के समय के साथ गोल्ड जीता। सावन ने दबाव के बावजूद अपनी रफ्तार बनाए रखी और सिल्वर पर कब्जा किया।
मजे के लिए शुरू हुई थी दौड़
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से आने वाले सावन ने स्कूल के दिनों में दौड़ना शुरू किया था। उनका शुरुआती मकसद कोई बड़ा खेल करियर बनाना नहीं था। वह दौड़ को खुशी और फिटनेस के लिए करते थे। धीरे-धीरे स्कूल और राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में सफलता मिली और उनका सफर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया।
सेना ने पहचानी प्रतिभा
सावन 2016 में भारतीय सेना में शामिल हुए। सेना में उन्हें अपनी दौड़ की क्षमता को निखारने का मौका मिला। शुरुआत में वह 5000 और 10 हजार मीटर में हिस्सा लेते थे, लेकिन बाद में मैराथन पर ध्यान केंद्रित किया। उनकी लंबी दूरी की क्षमता ने उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने का रास्ता दिया।
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अब ओलंपिक पर नजर
एशियन गेम्स का सिल्वर सावन के करियर की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गया है। राष्ट्रीय रिकॉर्ड और एशियाड मेडल के बाद उनकी नजर अब आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर होगी। मैराथन में लगातार बेहतर होती टाइमिंग ने भारतीय एथलेटिक्स में उनके सफर को एक नई पहचान दी है।




















