US-Iran War: ट्रंप की मंजूरी मिलते ही 96 घंटे में ईरान पर हमला कर सकता है अमेरिका!

पश्चिमी एशिया में एक बार फिर बड़े युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर ली है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सेना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी मिलने के 96 घंटे के भीतर ईरान पर हमला शुरू करने की स्थिति में है। हालांकि, ट्रंप ने अभी तक सैन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया है। इस बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी शुरू कर दी है और इजरायल के साथ भी आगे की रणनीति पर बातचीत जारी है।
ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकाने हो सकते हैं निशाने पर
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, संभावित सैन्य अभियान में ईरान के रडार, मिसाइल लॉन्चर और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। इसके अलावा ऊर्जा केंद्रों और परमाणु ठिकानों पर भी हमले की योजना पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड और पेंटागन संभावित ठिकानों की विस्तृत सूची तैयार कर रहे हैं। कुछ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ट्रंप इस साल के आखिर तक, खासकर 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव के बाद, सैन्य कार्रवाई का फैसला ले सकते हैं। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि राष्ट्रपति किस विकल्प को चुनेंगे।
अमेरिकी अधिकारियों का यह भी मानना है कि ईरान की सेना अब अमेरिकी सैन्य रणनीति और लड़ने के तरीके को पहले से बेहतर समझती है। ऐसे में ईरान के सभी संभावित ठिकानों को निशाना बनाना अमेरिका के लिए आसान नहीं होगा।
ईरान और हूती कर सकते हैं जवाबी हमला
अमेरिकी खुफिया आकलन के मुताबिक, अगर अमेरिका और इजरायल ईरान पर नया हमला करते हैं तो तेहरान और यमन के हूती विद्रोही जवाबी कार्रवाई कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में पश्चिमी एशिया में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने का खतरा है। इसी आशंका के बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को वापस बुलाने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा अगले सैन्य रोटेशन में कुछ गैर-जरूरी अमेरिकी सैनिकों को पश्चिमी एशिया नहीं भेजने का फैसला लिया गया है।
ईरान पर हमले को लेकर इजरायल की भी तैयारी
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान के पक्ष में बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने अमेरिका से इस कार्रवाई में सहयोग मांगा था, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने फिलहाल इंतजार करने को कहा है। ऐसे में इजरायल ने फिलहाल हमले टाल रखे हैं और आगे अमेरिका के साथ मिलकर कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। वहीं, इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू और सेना प्रमुख इयाल जमीर के बीच मतभेद की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इजरायल का चुनाव से पहले ईरान पर हमला करने का इरादा नहीं था। हालांकि, ईरान की ओर से हमला होने पर इजरायल पूरी ताकत से जवाब देगा।
तनाव का असर तेल की कीमतों पर भी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही बढ़ने के बावजूद कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इसकी एक बड़ी वजह ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई और समुद्री मार्ग पर बढ़ता खतरा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अगर कूटनीतिक बातचीत से कोई रास्ता नहीं निकलता, तो ट्रंप सैन्य कार्रवाई का विकल्प चुन सकते हैं। फिलहाल अमेरिकी सेना संभावित अभियान के लिए तैयार बताई जा रही है, लेकिन अंतिम फैसला राष्ट्रपति के हाथ में है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका बातचीत का रास्ता अपनाता है या ईरान के खिलाफ नया सैन्य अभियान शुरू करता है।



















