ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें! ट्रंप बोले- समझौता या हमला, अब होगा फैसला

मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति की कोशिशें जारी हैं, लेकिन दोनों देश अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं। एक तरफ ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी सात शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक अमेरिका से बातचीत नहीं होगी। वहीं, दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। ट्रंप का कहना है कि अब उन्हें फैसला करना होगा कि ईरान के साथ समझौता किया जाए या फिर सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाया जाए।
ईरान ने अमेरिका के सामने रखीं 7 शर्तें
ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करने के लिए अपनी सात शर्तों को पूरा करने की मांग दोहराई है। ईरान की संसद के स्पीकर के प्रवक्ता अब्बास गौजर्दी ने कहा कि जब तक अमेरिका इन शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तब तक बातचीत करने का कोई फायदा नहीं है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईएसएनए से बातचीत में गौजर्दी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ट्रंप के बयान केवल ईरान पर दबाव बनाने और उसे डराने की कोशिश हैं। गौजर्दी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान की परमाणु क्षमता और होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसके नियंत्रण को कमजोर करना चाहता है।
कतर ने शुरू की समझौते की कोशिश
दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार, 25 अक्टूबर को कतर के मध्यस्थ ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे। इस यात्रा का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता निकालना और क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना है। कतर पहले भी दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाने और समझौता कराने की कोशिश कर चुका है। हालांकि, इस बार बातचीत में सबसे बड़ी रुकावट ईरान की शर्तें और अमेरिका की मांगें बनी हुई हैं।
ट्रंप बोले- अब फैसला करने का समय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि उनके सामने दो विकल्प हैं। पहला विकल्प ईरान के साथ समझौता करना है, जबकि दूसरा विकल्प उसके खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू करना है। ट्रंप ने कहा कि उन्हें जल्द तय करना होगा कि आगे कौन-सा रास्ता अपनाया जाए। उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। उनके इस बयान के बाद एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
3 नवंबर के बाद बढ़ सकता है तनाव
अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में ट्रंप के अगले फैसले पर दुनिया की नजर बनी हुई है। ट्रंप पहले भी संकेत दे चुके हैं कि चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है। इस बीच अमेरिका ने फारस की खाड़ी की ओर अतिरिक्त सैन्य संसाधन भेजे हैं। इनमें तीसरा विमानवाहक पोत समूह भी शामिल है। अमेरिका की बढ़ती सैन्य मौजूदगी के कारण क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। वहीं, ईरान भी अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों फंसा विवाद?
अमेरिका और ईरान के बीच विवाद की एक बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती रही है। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले उसके बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाए और तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध खत्म करे। दूसरी तरफ अमेरिका चाहता है कि बातचीत की शुरुआत से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा हो। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच समझौते की कोशिशें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं।
क्या फिर बढ़ सकता है सैन्य टकराव?
मिडिल ईस्ट में पहले से ही हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ ईरान और यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से धमकियां बढ़ने की खबरों ने भी चिंता बढ़ाई है। ऐसे समय में ट्रंप की चेतावनियां और ईरान का सख्त रुख शांति की कोशिशों को मुश्किल बना रहे हैं। हालांकि, कतर के जरिए बातचीत का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। अब यह देखना होगा कि अमेरिका ईरान की मांगों पर क्या फैसला लेता है और क्या दोनों देश किसी समझौते तक पहुंच पाते हैं।
क्या हैं ईरान की अमेरिका से बातचीत के लिए 7 शर्तें?
ईरान ने सात शर्तें रखी हैं, लेकिन इनकी पूरी आधिकारिक सूची सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की गई है। अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, ईरान की प्रमुख मांगें ये हैं:
- बंदरगाहों की नाकाबंदी खत्म हो: अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई समुद्री नाकाबंदी हटाए।
- तेल निर्यात पर प्रतिबंध हटें: ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की छूट मिले।
- क्षेत्र में लड़ाई बंद हो: ईरान और दूसरे क्षेत्रीय मोर्चों पर जारी सैन्य टकराव खत्म किया जाए।
- जब्त संपत्ति वापस मिले: विदेशों में फंसी ईरान की रकम और संपत्तियां जारी की जाएं।
बाकी तीन शर्तों का पूरा और स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें बिना आधिकारिक पुष्टि के सात अलग-अलग मांगों के रूप में बताना सही नहीं होगा। फिलहाल ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा है, जबकि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम को भी समझौते का हिस्सा बनाना चाहता है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।



















