Israel Election 2026: क्या फिर नेतन्याहू बनेंगे प्रधानमंत्री या गादी आइजेनकोट और नफ्ताली बेनेट पलटेंगे बाजी?

इजरायल में आज, 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। करीब 73.3 लाख मतदाता देश की संसद यानी नेसेट की 120 सीटों के लिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता और उनके राजनीतिक भविष्य पर सबकी नजर है। उनके सामने पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइसेनकोट, पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट, यायर लापिड, एविग्डोर लिबरमैन और यायर गोलान जैसे नेताओं की चुनौती है। यह चुनाव केवल सरकार चुनने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इजरायल की राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक संस्थाओं, सैन्य सेवा और फिलिस्तीन से जुड़े भविष्य के फैसलों के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले के बाद यह पहला आम चुनाव है।
नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू लंबे समय से इजरायल की राजनीति के प्रमुख चेहरे रहे हैं। उनकी पार्टी लिकुड और दक्षिणपंथी सहयोगी दल राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य ताकत और ईरान के खतरे से निपटने को प्रमुख चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। हालांकि, उनकी सरकार को 7 अक्टूबर के हमले से पहले और उसके दौरान हुई सुरक्षा संबंधी चूकों को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा, गाजा युद्ध, बंधकों की स्थिति, न्यायपालिका में सुधार और भ्रष्टाचार के मुकदमे जैसे मुद्दे भी उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।
गादी आइसेनकोट कौन हैं और क्यों हैं अहम?
गादी आइसेनकोट इजरायली सेना के पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ रह चुके हैं। वह अपनी याशार पार्टी के जरिए नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों में शामिल हैं। उनके अभियान में राष्ट्रीय सुरक्षा, सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। आइसेनकोट का सैन्य अनुभव उन्हें सुरक्षा के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण चेहरा बनाता है। वह 7 अक्टूबर के हमले से जुड़ी घटनाओं की जवाबदेही और देश की अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने जैसे विषयों को भी प्रमुखता देते हैं।
नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड का गठबंधन कितना मजबूत?
पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट और यायर लापिड के नेतृत्व वाला बेयाखाद यानी टुगेदर गठबंधन भी चुनावी मुकाबले में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह गठबंधन दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी मतदाताओं को साथ लाने की कोशिश करता है। इसके प्रमुख मुद्दों में राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य सेवा में समानता, रिजर्व सैनिकों पर पड़ने वाले दबाव को कम करना और संवैधानिक व्यवस्था में सुधार शामिल हैं। इजरायल में अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय के कुछ समूहों को सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट लंबे समय से राजनीतिक विवाद का विषय रही है। विपक्षी दल इस व्यवस्था में बदलाव की मांग करते रहे हैं।
एविग्डोर लिबरमैन और यायर गोलान की भूमिका
एविग्डोर लिबरमैन की यिसराइल बेइतेनु पार्टी सुरक्षा के कड़े रुख और धर्मनिरपेक्ष नीतियों के लिए जानी जाती है। वह सभी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा में अधिक समानता और सार्वजनिक जीवन में धार्मिक प्रभाव सीमित करने जैसे मुद्दों का समर्थन करती है दूसरी ओर, यायर गोलान के नेतृत्व वाली डेमोक्रेटिक पार्टी लोकतांत्रिक संस्थाओं, कूटनीतिक समाधान और फिलिस्तीन से जुड़े मुद्दों पर अलग दृष्टिकोण रखती है।
इजरायल में चुनाव कैसे होता है?
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है और इसमें कुल 120 सीटें होती हैं। यहां मतदाता किसी व्यक्तिगत प्रधानमंत्री उम्मीदवार के बजाय राजनीतिक पार्टी की सूची को वोट देते हैं। चुनाव की प्रक्रिया इस प्रकार है-
चर्च में 9 लोगों की मौत, फिर जॉर्डन ने बरसाए बम! सीरिया में कई ठिकाने तबाह
- पार्टी को वोट: मतदाता अपनी पसंद की पार्टी चुनते हैं।
- वोट के अनुपात में सीटें: पार्टियों को राष्ट्रीय स्तर पर मिले वोटों के अनुपात के आधार पर सीटें आवंटित होती हैं।
- 3.25 प्रतिशत की सीमा: किसी पार्टी को संसद में प्रवेश के लिए निर्धारित न्यूनतम राष्ट्रीय वोट सीमा पार करनी होती है।
- 61 सीटों का बहुमत: सरकार बनाने के लिए आम तौर पर 120 सदस्यीय संसद में कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है।
- गठबंधन की भूमिका: कोई पार्टी सबसे बड़ी बन जाए, तब भी उसे सहयोगी दलों का समर्थन जुटाना पड़ सकता है।
7 अक्टूबर हमले के बाद पहला आम चुनाव क्यों है खास?
7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले ने इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद गाजा में लंबे समय तक चले युद्ध ने देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरा असर डाला। इस चुनाव में मतदाता केवल सुरक्षा नीति नहीं, बल्कि सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक व्यवस्था की दिशा पर भी फैसला कर रहे हैं। सैन्य सेवा का बोझ किस तरह बांटा जाए, न्यायपालिका की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित हो और क्षेत्रीय संघर्षों से कैसे निपटा जाए- ये सभी अहम मुद्दे हैं।
अब नतीजों पर टिकी दुनिया की नजर
इजरायल के आम चुनाव में नेतन्याहू और विपक्षी नेताओं के बीच मुकाबला देश के भविष्य की दिशा तय कर सकता है। हालांकि, किसी एक दल को बढ़त मिलना और स्थिर सरकार बनना दो अलग बातें हैं। अंतिम परिणाम के बाद गठबंधन की बातचीत ही सत्ता की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेगी।


















