बाघ पखवाड़ा का भव्य समापन:सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में कई कार्यक्रम, बच्चों ने वन्यजीव संरक्षण का दिया संदेश

सोहागपुर। 16 दिन तक चले बाघ पखवाड़ा अभियान में 16,444 नागरिकों और छात्र-छात्राओं को बाघ संरक्षण, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। समापन समारोह में प्रतियोगिताएं, नुक्कड़ नाटक, लोकनृत्य और शपथ कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया और 'बाघ मित्र', 'सतपुड़ा साथी' बनने का संकल्प दिलाया गया। अभियान का उद्देश्य जनभागीदारी बढ़ाकर वन और वन्यजीव संरक्षण को और मजबूत बनाना रहा।
प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों को किया जागरूक
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जनसंपर्क अधिकारी सहायक संचालक आशीष खोबरागड़े ने बताया कि समापन समारोह में इटारसी, सोहागपुर, मटकुली, झिरपा, देलाखारी, पिपरिया और पचमढ़ी के विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर चित्रकला, पाम पेंटिंग, क्विज और टेराकोटा पेंटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में वन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता विकसित करने का प्रयास किया गया।
किसानों के समर्थन में उतरे Gen-Z : भोपाल में आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार, सरकार ने बातचीत के दिए संकेत
'बाघ मित्र' और 'सतपुड़ा साथी' बनने की दिलाई शपथ
कार्यक्रम के आखिर में अलग-अलग प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। साथ ही विद्यार्थियों ने 'बाघ मित्र' और 'सतपुड़ा साथी' बनने की शपथ लेकर बाघों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सक्रिय सहयोग का संकल्प लिया। डॉन बॉस्को विद्यालय के विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बाघ संरक्षण का प्रभावी संदेश दिया, जबकि कन्या शाला पिपरिया और माध्यमिक शाला देलाखारी की छात्राओं ने भाषण और लोकनृत्य प्रस्तुत कर वन और पर्यावरण संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया।
एलईडी स्क्रीन से हुआ प्रसारण
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व द्वारा जन-जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने के उद्देश्य से पिपरिया के व्यस्ततम दुर्गा मंदिर चौराहे पर स्थापित एलईडी विज्ञापन स्क्रीन पर 29 जुलाई तक बाघ संरक्षण संबंधी संदेशों का सतत प्रसारण किया गया। इस रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में पचमढ़ी आने वाले पर्यटक गुजरते हैं, जिससे संरक्षण संबंधी संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचे। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का यह अभियान केवल बाघ संरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रकृति, जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने की दिशा में भी एक प्रभावी पहल के रूप में सामने आया।
Edited By: Rohit Sharma












