CG NEWS: सलवा जुडुम स्मृति दिवस: नक्सली हिंसा में मारे गए ग्रामीणों और शहीद जवानों को श्रद्धांजलि

अरुण झा,जगदलपुर। सलवा जुडुम स्मृति दिवस के अवसर पर बस्तर शांति समिति ने सिरहासार चौक में श्रद्धांजलि सभा आयोजित कर नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष ग्रामीणों और शहीद सुरक्षा बलों के जवानों को श्रद्धासुमन अर्पित किए। कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित लोगों ने भाग लेकर बस्तर में शांति और सुरक्षा का संकल्प लिया।
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श्रद्धांजलि से हुई कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत पुष्पांजलि और दो मिनट के मौन के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने नक्सली हिंसा में मारे गए ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, पूर्व सैनिक, पत्रकार और जनजातीय समाज के प्रतिनिधि कार्यक्रम में शामिल हुए।
माओवादी हिंसा के प्रभाव पर हुई चर्चा
नक्सल विषय की विशेषज्ञ एवं लेखिका रचना नायडू ने कहा कि माओवादी हिंसा ने बस्तर के हजारों परिवारों का जीवन प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि इस दौर के इतिहास और ग्रामीणों पर पड़े प्रभाव को समाज के सामने तथ्यात्मक रूप से लाना जरूरी है।
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सलवा जुडुम पर रखे गए विचार
बस्तर शांति समिति के जयराम दास ने कहा कि सलवा जुडुम पर प्रतिबंध के बाद क्षेत्र में माओवादी हिंसा का दायरा बढ़ा। उन्होंने इस पूरे विषय पर व्यापक अध्ययन और सार्वजनिक विमर्श की आवश्यकता बताई। साथ ही न्यायिक प्रक्रिया और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा की जरूरत बताई।
पीड़ितों और बलिदानियों को किया गया याद
नारायणपुर से आए मंगऊ राम कावड़े ने कहा कि यह दिवस किसी संगठन का नहीं, बल्कि उन ग्रामीणों और सुरक्षा बलों के जवानों को याद करने का दिन है जिन्होंने हिंसा के दौर में अपने प्राण गंवाए।

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इतिहास के निष्पक्ष दस्तावेजीकरण की मांग
जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने कहा कि बस्तर के इस दौर का निष्पक्ष अध्ययन और दस्तावेजीकरण होना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां वास्तविक घटनाओं को समझ सकें।
शांति और संवेदनशीलता का संदेश
श्वेताम्बर जैन समाज के किशोर पारख और जनजातीय समाज के दशरथ कश्यप ने हिंसा में जान गंवाने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि देते हुए समाज से शांति और संवेदनशीलता बनाए रखने की अपील की।
स्थायी शांति का लिया संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी और बस्तर में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास के लिए सामूहिक संकल्प लिया।












