विदेश से MBBS, भारत में परीक्षा फेल :24 लाख में फर्जी FMG सर्टिफिकेट बनवाकर हासिल किया डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन

जयपुर। विदेश से एमबीबीएस करने के बाद भारत में जरूरी एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा पास नहीं कर पाने वाले एक युवक ने कथित तौर पर 24 लाख रुपए देकर फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट बनवाया और उसी के आधार पर मेडिकल प्रैक्टिस का अधिकार हासिल कर लिया। राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। जांच में अब तक 100 से ज्यादा संदिग्धों की पहचान हो चुकी है, जबकि इस मामले में 28 लोगों की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है।
कई बार परीक्षा में फेल होने के बाद बनाया फर्जी सर्टिफिकेट
एसओजी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विशाल बंसल ने बताया कि आरोपी चरण सिंह ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी। भारत लौटने के बाद उसने राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) की एफएमजी स्क्रीनिंग परीक्षा कई बार दी, लेकिन सफल नहीं हो सका। आरोप है कि इसके बाद उसने 24 लाख रुपये देकर फर्जी एफएमजी सर्टिफिकेट तैयार कराया।
फर्जी दस्तावेज के आधार पर इंटर्नशिप और रजिस्ट्रेशन
जांच के मुताबिक आरोपी ने फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे राजकीय मेडिकल कॉलेज धौलपुर में इंटर्नशिप पूरी की। बाद में राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण भी करा लिया। एसओजी का आरोप है कि इस पूरे मामले में मेडिकल काउंसिल के कुछ कर्मचारियों और अधिकारियों की भी मिलीभगत रही।
जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क
एसओजी की जांच में पता चला है कि विदेश से एमबीबीएस करने वाले कई छात्र एफएमजी परीक्षा पास नहीं कर सके थे। इसके बाद उन्होंने भानाराम नाम के व्यक्ति के जरिए फर्जी सर्टिफिकेट बनवाए। एजेंसी के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए 20 से 30 लाख रुपये लेकर फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराए जाते थे और मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण भी कराया जाता था।
100 से ज्यादा संदिग्ध, 28 गिरफ्तार
एसओजी के अनुसार अब तक 100 से अधिक संदिग्धों की पहचान की जा चुकी है। इस मामले में राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा समेत कुल 28 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर पंजीकरण कराने वाले कई विदेश से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टर भी शामिल हैं।
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एसओजी बोली- पूरे नेटवर्क की जांच जारी
एसओजी का कहना है कि 4 फरवरी 2026 को दर्ज मामले की जांच अभी जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस फर्जीवाड़े से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।












