MP High Court:पीड़िता को बार-बार कोर्ट में नहीं बुलाया जा सकता, DNA रिपोर्ट के आधार पर दोबारा गवाही की याचिका खारिज

MP High Court ने दुष्कर्म के एक मामले में पीड़िता को दोबारा गवाही के लिए बुलाने की आरोपी की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि DNA Report आने में देरी का मतलब यह नहीं है कि आरोपी पीड़िता को बार-बार परेशान करने का अधिकार हासिल कर ले।
DNA रिपोर्ट के आधार पर मांगी थी दोबारा गवाही
यह मामला छतरपुर जिले के मतगुवां थाना क्षेत्र के ग्राम सकरोबारा से जुड़ा है। आरोपी गोलू उर्फ करन अहिरवार ने ट्रायल कोर्ट में पीड़िता की गवाही के बाद आई डीएनए रिपोर्ट के आधार पर दोबारा जिरह की अनुमति मांगी थी। ट्रायल कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां आरोपी ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 311 के तहत अर्जी दाखिल की थी।
सरकार की ओर से पेश हुई दलीलें
सुनवाई के दौरान उप शासकीय अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री ने सरकार की ओर से पक्ष रखा और आरोपी की मांग का विरोध किया।
हाईकोर्ट का अहम फैसला
जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने सुनवाई के बाद याचिका खारिज करते हुए कहा कि डीएनए रिपोर्ट एक वैज्ञानिक और विशेषज्ञ राय है जिसमें पीड़िता की कोई भूमिका नहीं होती। ऐसे में उससे दोबारा सवाल पूछने का कोई औचित्य नहीं है।
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कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने साफ किया कि न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग कर पीड़िता को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।












