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Raulane Festival :सदियों पुराना हिमाचली राउलाने मेला अचानक हुआ ट्रेंडिंग, ट्रैवल ब्लॉगर्स की पोस्ट ने बढ़ाई चर्चा

कल्पा के शांत पहाड़ों के बीच सदियों से मनाया जाने वाला राउलाने मेला अचानक सोशल मीडिया पर छा गया। कुछ रहस्यमयी तस्वीरें इंस्टाग्राम पर दिखीं- ढके हुए चेहरे, पारंपरिक वेशभूषा, और नकली दुल्हन बनकर चलते पुरुष। किसी को नहीं पता था कि ये तस्वीरें कहां की हैं, कौन लोग इसमें शामिल हैं और क्यों उनका चेहरा छिपाया जाता है।
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सदियों पुराना हिमाचली राउलाने मेला अचानक हुआ ट्रेंडिंग, ट्रैवल ब्लॉगर्स की पोस्ट ने बढ़ाई चर्चा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत जिले किन्नौर का एक अनोखा और प्राचीन त्योहार इन दिनों सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। कल्पा गांव में मनाया जाने वाला Raulane Festival भले ही हर साल मार्च-अप्रैल में आयोजित होता है, लेकिन इसकी पुरानी तस्वीरें इन दिनों इंस्टाग्राम और फेसबुक पर खूब वायरल हो रही हैं। तस्वीरों के वायरल होते ही लोग इस अनोखी परंपरा के बारे में जानने को उत्सुक हो गए हैं।

    Raulane Festival को यहां की 5,000 साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत माना जाता है। इस मेले को स्थानीय लोग ‘ChineKyong’ के नाम से भी जानते हैं। यह त्योहार सर्दियों के अंत और नई फसल के स्वागत का प्रतीक है। पूरे गांव में पांच दिनों तक खुशी, नाच-गाना और उत्सव का माहौल रहता है। खास बात यह है कि इस पूरे मेले में केवल पुरुष ही भाग लेते हैं, चाहे वे किसी भी किरदार में हों।

    मेले में तीन खास किरदार होते हैं- राउला, राउलाने, और पुंदलु

    पुंदलु वे होते हैं जो भेड़-बकरियों की खाल पहनकर चलते हैं और देखने वालों के लिए खास आकर्षण होते हैं।

    राउला पारंपरिक कोट-पेंट पहनता है और चेहरे को गाछी, यानी कमर पर पहनने वाले पारंपरिक वस्त्र से ढक लिया जाता है। वहीं राउलाने, जिसे मेले की ‘नकली दुल्हन’ कहा जाता है वो भी पुरुष ही बनता है। उसे महिलाओं की पारंपरिक पोशाक और भारी किन्नौरी आभूषण पहनाए जाते हैं। उसका चेहरा भी पूरी तरह गाछी से ढका होता है।

    Uploaded media

    इस त्योहार की सबसे रोचक परंपराओं में से एक यह है कि अगर किसी तरह कोई व्यक्ति इस ढके हुए चेहरे वाले राउलाने को पहचान ले, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। मेले के दौरान राउलाने को ब्रह्मा-विष्णु के मंदिर तक भव्य तरीके से ले जाया जाता है।

    लंबे समय तक यह मेला सोशल मीडिया से दूर ही था, लेकिन जैसे ही कुछ ट्रैवल ब्लॉगर्स ने अपनी यात्राओं की तस्वीरें शेयर कीं, राउलाने फेस्टिवल इंटरनेट पर रातों-रात चर्चा का विषय बन गया। आज इसकी रंग-बिरंगी तस्वीरें लोगों को उत्तर भारत की अनोखी संस्कृति और परंपराओं की झलक दिखा रही हैं।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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