नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट तनाव के बीच सोमवार से संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हुआ। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में मिडिल ईस्ट के हालात पर सरकार का पक्ष रखा।
हालांकि जब जयशंकर बयान देने के लिए खड़े हुए तो विपक्षी सांसदों ने आपत्ति जताई और सदन में हंगामा शुरू हो गया। हंगामे के बीच ही विदेश मंत्री ने अपना बयान जारी रखा और सरकार की तैयारियों और कदमों की जानकारी दी।
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विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मिडिल ईस्ट में तेजी से बदल रहे हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के सभी संबंधित मंत्रालय आपस में समन्वय करके स्थिति पर प्रतिक्रिया देने की तैयारी में लगे हुए हैं।
जयशंकर ने बताया कि सरकार ने 20 फरवरी को ही एक आधिकारिक बयान जारी कर क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। उस समय भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और हालात को काबू में रखने की अपील भी की थी।
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जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक काम करते हैं और भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी इसी क्षेत्र से पूरा होता है। इसके अलावा भारत का व्यापार भी खाड़ी देशों के साथ काफी बड़े स्तर पर जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा संघर्ष के कारण वहां सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है। कई जगहों पर आर्थिक गतिविधियां भी धीमी पड़ गई हैं। ऐसे में भारत सरकार लगातार स्थिति का आकलन कर रही है।
विदेश मंत्री ने बताया कि सरकार शुरुआत से ही इस स्थिति पर नजर रखे हुए है। समय-समय पर भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि तेहरान में मौजूद छात्रों और तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। इसके अलावा कई कमर्शियल फ्लाइट्स भी चालू की गई हैं ताकि लोग सुरक्षित भारत लौट सकें। अब तक करीब 67 हजार भारतीय नागरिकों को वापस भारत लाया जा चुका है।
जयशंकर ने बताया कि ईरान समेत अन्य खाड़ी देशों में स्थित भारतीय दूतावास पूरी तरह एक्टिव हैं। वहां के राजनयिक लगातार भारतीय समुदाय से संपर्क में हैं और जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि तेहरान, यूएई, दुबई और बहरीन में मौजूद भारतीय दूतावास फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालात को देखते हुए कई खाड़ी देशों के नेताओं से सीधे बातचीत की है। इनमें यूएई, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, जॉर्डन, ओमान और इजरायल जैसे देश शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि भारत इन देशों के साथ कूटनीतिक स्तर पर लगातार संपर्क बनाए हुए है। खुद उन्होंने भी कई देशों के विदेश मंत्रियों से बात की है। साथ ही ईरान के विदेश मंत्री अराघची से भी बातचीत की गई है ताकि स्थिति को समझा जा सके और भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
विदेश मंत्री ने आगे कहा कि सरकार ऊर्जा क्षेत्र की स्थिति पर भी लगातार नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं की जरूरतों और देश की ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा।
उन्होंने साफ कहा कि भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हित हैं।