नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है। यह चरण राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि कई बड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव, खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा, रूस से तेल खरीद और राष्ट्रपति से जुड़े विवाद जैसे मुद्दे संसद में गूंज सकते हैं।
सत्र की शुरुआत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर संसद में विस्तृत बयान देंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अपनी रणनीति भी स्पष्ट कर सकती है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा दोनों में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर बयान देंगे। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ा है, जिसके कारण वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
खाड़ी देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और भारत की अर्थव्यवस्था में उनका महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में सरकार इस बयान के जरिए यह बताने की कोशिश करेगी कि भारतीयों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित निकालने की क्या व्यवस्था है।
संसद का दूसरा चरण काफी हंगामेदार रहने की संभावना जताई जा रही है। विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव हो सकता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव भी इस सत्र में चर्चा का विषय बन सकता है। इसके अलावा मिडिल ईस्ट का संकट और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष सरकार से जवाब मांग सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन मुद्दों को लेकर संसद में तीखी बहस और हंगामा देखने को मिल सकता है।
विपक्ष, सरकार को उस फैसले को लेकर भी घेरने की तैयारी में है, जिसमें अमेरिका ने भारत को 30 दिनों के लिए रूस से तेल खरीदने की छूट दी है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ पक्ष भी विपक्ष पर हमला करने की तैयारी में है। हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान हुए प्रोटोकॉल विवाद को लेकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को ‘शर्मनाक और अभूतपूर्व’ बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद का सम्मान होना चाहिए और इस मामले में राज्य सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
संसद का यह बजट सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान सरकार को वित्त विधेयक और विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों को पारित कराना है।
हालांकि अभी तक सरकार ने इस सत्र के लिए अपना पूरा विधायी एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया है।