रूस की NATO को सीधी चेतावनी: कालिनिनग्राद को अलग करने की कोशिश की तो होगा सीधा युद्ध

मॉस्को। Russia NATO Tension: रूस और NATO के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। मॉस्को ने NATO को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि कालिनिनग्राद (Kaliningrad) को अलग-थलग करने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। रूस ने साफ कहा है कि ऐसा कोई भी कदम सीधे तौर पर युद्ध को न्योता देने जैसा होगा।मॉस्को के मुताबिक, उसके पास बाल्टिक सागर स्थित इस रणनीतिक इलाके की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी हथियार मौजूद हैं। अगर कालिनिनग्राद को मुख्य रूस से काटने की कोशिश हुई, तो रूस अपने पूरे हथियार जखीरे का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा।बेल्जियम स्थित रूसी दूतावास ने दी चेतावनीयह अहम चेतावनी बेल्जियम में मौजूद रूसी दूतावास की ओर से जारी की गई है, जो NATO के साथ रूस के कूटनीतिक संपर्कों को संभालता है। दूतावास ने बताया कि उसने NATO के इंटरनेशनल सेक्रेटेरिएट और बेल्जियम के विदेश मंत्रालय के सामने रूस का सैद्धांतिक रुख स्पष्ट रूप से रख दिया है।रूसी न्यूज एजेंसी TASS के अनुसार, दूतावास ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "NATO नेतृत्व और उसके सदस्य देशों की आक्रामक नीतियों को देखते हुए, हमने NATO सेक्रेटेरिएट और बेल्जियम के विदेश मंत्रालय को अवगत करा दिया है कि रूस इस मुद्दे पर बेहद गंभीर है।"बयान में आगे कहा गया कि NATO का यह लापरवाह और गैर-जिम्मेदाराना रवैया रूस के साथ सीधे सैन्य टकराव (Direct Military Conflict) के खतरे को तेजी से बढ़ा रहा है।
कालिनिनग्राद तनाव का केंद्र क्यों है?
जानिए इसकी रणनीतिक अहमियतबाल्टिक सागर के किनारे बसा कालिनिनग्राद रूस का एक ऐसा हिस्सा है जो भौगोलिक रूप से मुख्य रूस से पूरी तरह कटा हुआ है। यह चारों तरफ से NATO देशों से घिरा है - एक तरफ पोलैंड और दूसरी तरफ लिथुआनिया। इसी वजह से इसकी लोकेशन मॉस्को और NATO दोनों के लिए बेहद संवेदनशील और रणनीतिक रूप से अहम मानी जाती है।NATO के हवाई अभ्यास के बाद आई रूस की चेतावनीरूस की यह ताजा चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब करीब एक महीने पहले ही NATO ने कालिनिनग्राद के करीब उत्तर-पूर्वी पोलैंड में बड़ा हवाई अभ्यास किया था।इस अभ्यास में अमेरिका और नॉर्वे के फाइटर जेट, NATO का E-3A Sentry AWACS निगरानी विमान, हवा में ईंधन भरने वाले टैंकर और अमेरिका का EA-37B इलेक्ट्रॉनिक-वॉरफेयर एयरक्राफ्ट शामिल थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ड्रिल में 25 से 50 लड़ाकू विमानों ने हिस्सा लिया था।पोलैंड की ऑपरेशनल कमांड ने साफ किया था कि यह अभ्यास पूरी तरह NATO द्वारा समन्वित था और इसका रूसी वायु सेना की किसी गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है। इसका मकसद सहयोगी देशों की सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करना और जॉइंट एयर-ऑपरेशन की तैयारियों को परखना था।
कालिनिनग्राद को अलग करने की कोशिश को आक्रामकता मानेगा रूस
मॉस्को की दो टूकरूस ने अब कालिनिनग्राद के आसपास बढ़ती NATO गतिविधियों को सीधे इस इलाके को मुख्य रूस से अलग-थलग करने की साजिश से जोड़ दिया है। मॉस्को ने साफ कहा है कि इस तरह की किसी भी कोशिश को रूसी क्षेत्र के खिलाफ सीधा हमला माना जाएगा।रूसी राजनयिकों ने चेतावनी देते हुए कहा, "हमने स्पष्ट कर दिया है कि रूस के पास किसी भी संभावित आक्रामकता का जवाब देने के लिए सभी जरूरी साधन मौजूद हैं। अगर NATO देश कालिनिनग्राद को रूस के बाकी हिस्सों से काटने की कोशिश करते हैं, तो मॉस्को अपने पूरे हथियार भंडार का इस्तेमाल करने के लिए तैयार है।"NATO से तनाव न बढ़ाने की अपीलबेल्जियम स्थित रूसी दूतावास ने NATO सदस्य देशों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी कदम या बयान से बचें जिससे हालात और ज्यादा बिगड़ सकते हैं।दूतावास ने कहा, "हमने गठबंधन के सदस्य देशों से आग्रह किया है कि वे भड़काऊ बयानबाजी और तनाव बढ़ाने वाली सैन्य गतिविधियों से परहेज करें, ताकि बड़े पैमाने पर टकराव को टाला जा सके।"




















