कान्हा टाइगर रिजर्व में 11 माह की बाघिन की मौत, दूसरे बाघ से संघर्ष की आशंका; जंगल में मिला शव

जबलपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व से वन्यजीव प्रेमियों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। रिजर्व के कान्हा परिक्षेत्र की नक्तीघाटी बीट में करीब 11 माह की बाघिन शावक मृत मिली। प्रारंभिक जांच में उसके शरीर पर दूसरे वन्यजीव से संघर्ष के निशान और चोटें मिली हैं। वन विभाग ने शुरुआती तौर पर आपसी संघर्ष को मौत की संभावित वजह माना है।
गश्ती दल को मिले खून के निशान और पदचिह्न
पार्क प्रबंधन के अनुसार, 28 सितंबर की सुबह गश्ती दल कक्ष क्रमांक 138 के आसपास निगरानी कर रहा था। इसी दौरान टीम को जमीन पर बाघ के पदचिह्न और खून के निशान दिखाई दिए। निशान देखकर गश्ती दल ने आसपास के इलाके में सघन तलाशी शुरू की। कुछ देर की खोजबीन के बाद टीम को एक बाघ शावक का शव मिला। इसकी जानकारी तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।
डॉग स्क्वाड की मदद से हुई जांच
सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। घटनास्थल और आसपास के इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू की गई। मामले की पड़ताल के लिए डॉग स्क्वाड की भी मदद ली गई। इसके बाद वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की टीम ने मृत बाघिन के शव की जांच की।
शरीर पर मिले संघर्ष के निशान
वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल और पशु चिकित्सक डॉ. ललित चौरसिया की टीम ने शव का परीक्षण किया। जांच में बाघिन की उम्र करीब 11 माह और लिंग मादा पाया गया। शरीर पर संघर्ष के दौरान लगी चोटों के निशान मिले। इन्हीं शुरुआती संकेतों के आधार पर वन विभाग ने आपसी संघर्ष को मौत का संभावित कारण माना है। पोस्टमार्टम के दौरान फॉरेंसिक जांच के लिए जरूरी नमूने भी सुरक्षित किए गए।
NTCA प्रोटोकॉल के तहत किया गया अंतिम संस्कार
वन विभाग ने घटना से जुड़ी निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच और दस्तावेजीकरण पूरा किया। इसके बाद NTCA के मानक प्रोटोकॉल के अनुसार मृत बाघिन शावक का दाह/भस्मीकरण किया गया। इस दौरान क्षेत्र संचालक रविंद्र मणि त्रिपाठी, NTCA द्वारा नामित प्रतिनिधि शिवांगी वेंन्द्रे और दाह/भस्मीकरण समिति के सदस्य मौजूद रहे। वन विभाग ने पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की।



















