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पहले कभी नहीं हुआ ऐसा! SpaceX Starship पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा

SpaceX के Starship रॉकेट ने 28 सितंबर को एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। एलन मस्क की कंपनी के इस विशाल रॉकेट ने पहली बार पृथ्वी की ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी में प्रवेश किया। मिशन के दौरान 26 नए Starlink V3 सैटेलाइट्स भी अंतरिक्ष में तैनात किए गए।
पहले कभी नहीं हुआ ऐसा! SpaceX Starship पहली बार पृथ्वी की कक्षा में पहुंचा
SpaceX Starship ने रचा बड़ा इतिहास, पहली बार ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी में पहुंचा रॉकेट

एलन मस्क की कंपनी SpaceX के सबसे बड़े और ताकतवर रॉकेट #Starship ने 28 सितंबर को एक अहम उपलब्धि हासिल की। इस मिशन में #Starship ने पहली बार पृथ्वी की ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी में प्रवेश किया। इसके साथ ही रॉकेट ने 26 नए Starlink V3 सैटेलाइट्स को भी अंतरिक्ष में तैनात किया। भारतीय समय के मुताबिक #Starship को शाम 6:16 बजे लॉन्च किया गया था।

पहली बार ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी में पहुंचा Starship

#Starship की अब तक की टेस्ट उड़ानों में कंपनी का मुख्य फोकस रॉकेट की तकनीक को परखने और उससे जुड़े आंकड़े जुटाने पर रहा था। पिछली कई उड़ानों में यान को सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर भेजा गया था। इस बार मिशन में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। #Starship ने पृथ्वी की ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी में प्रवेश किया। इसका मतलब है कि यान ने इतनी गति और सही दिशा हासिल की कि वह पृथ्वी की कक्षा में घूमने की स्थिति तक पहुंच सका।

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करीब 3 घंटे में पूरा हुआ मिशन

शुरुआती योजना के अनुसार #Starship को करीब 10 घंटे तक पृथ्वी की कक्षा में रहना था। हालांकि, मिशन के दौरान मिले तकनीकी आंकड़ों और स्थिति की समीक्षा के बाद SpaceX ने उड़ान को तय समय से पहले खत्म करने का फैसला किया। लॉन्च के करीब 2 घंटे 12 मिनट बाद #Starship का डीऑर्बिट बर्न पूरा किया गया। इसके बाद यान ने पृथ्वी की कक्षा से वापस आने की प्रक्रिया शुरू की। मिशन शुरू होने के लगभग तीन घंटे बाद #Starship ने प्रशांत महासागर में लैंडिंग पूरी की। यह #Starship की 14वीं टेस्ट फ्लाइट थी। इस उड़ान के जरिए SpaceX ने रॉकेट की ऑर्बिटल क्षमता और भविष्य के लंबे अंतरिक्ष अभियानों के लिए जरूरी तकनीक को परखने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया।

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ऑर्बिटल और सब-ऑर्बिटल उड़ान में क्या अंतर है?

ऑर्बिटल और सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी को आसान भाषा में समझें तो दोनों में सबसे बड़ा अंतर यान की गति और उसके रास्ते का है। सब-ऑर्बिटल उड़ान में रॉकेट अंतरिक्ष की ऊंचाई तक पहुंचता है, लेकिन पृथ्वी की स्थायी कक्षा में नहीं जाता। इसके बाद गुरुत्वाकर्षण के कारण वह वापस पृथ्वी की ओर लौट आता है। वहीं ऑर्बिटल उड़ान में यान इतनी तेज गति और सही दिशा हासिल करता है कि वह पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में घूम सकता है। #Starship का यह मिशन इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इस बार यान ने पहली बार ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी हासिल की।

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26 नए Starlink V3 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में भेजे

इस मिशन की दूसरी बड़ी उपलब्धि 26 Starlink V3 सैटेलाइट्स की तैनाती रही। ये नए सैटेलाइट Starlink इंटरनेट नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए डिजाइन किए गए हैं। बताया गया है कि एक Starlink V3 सैटेलाइट करीब 1 Tbps डेटा क्षमता जोड़ने के लिए डिजाइन किया गया है। इस हिसाब से 26 सैटेलाइट्स मिलकर सैद्धांतिक तौर पर करीब 26 Tbps क्षमता जोड़ सकते हैं। इन सैटेलाइट्स का उद्देश्य Starlink नेटवर्क को ज्यादा क्षमता देना और अलग-अलग क्षेत्रों में तेज इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने में मदद करना है।

403 फीट ऊंचा है पूरा #Starship सिस्टम

#Starship को दुनिया के सबसे बड़े और ताकतवर रॉकेट सिस्टम में गिना जाता है। इसका पूरा सिस्टम दो मुख्य हिस्सों से मिलकर बना है। ऊपर #Starship spacecraft और नीचे Super Heavy booster होता है। दोनों हिस्सों को मिलाकर #Starship सिस्टम की ऊंचाई करीब 403 फीट है। इसकी डिजाइन भविष्य के बड़े अंतरिक्ष अभियानों को ध्यान में रखकर की गई है।

चंद्रमा और मंगल मिशन के लिए अहम

SpaceX #Starship को सिर्फ पृथ्वी की कक्षा तक पहुंचने वाले रॉकेट के तौर पर नहीं देखती। कंपनी इसे भविष्य में चंद्रमा और मंगल जैसे दूर के मिशनों के लिए भी इस्तेमाल करने की योजना पर काम कर रही है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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